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वैदिक मंत्रोचार संग मां सरस्वती कां पूजा, गूंजे फाग

Sat, 05 Feb 2022 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Feb 2022 11:39 PM IST
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Worship of Mother Saraswati with Vedic chants, echoes
बलिया। विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का पट शनिवार की शाम वैदिक मंत्रोचार एवं हवन पूजन के साथ खोला गया। मां सरस्वती का पट खुलते ही जयकारे, शंख व घंट-घड़ियाल से वातावरण देवीमय हो गया। तत्पश्चात समिति के सदस्यों ने एक-दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर प्रसाद वितरण किया। वहीं ढोल के थाप पर लोगों ने पारम्परिक फाग गीत गाया। उधर, सुरक्षा के मद्देनजर नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकारी व पुलिसकर्मी चक्रमण करते रहे।
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जनपद के 22 थाना अंतर्गत 587 स्थानों पर मां सरस्वती की प्रतिमा का पट वैदिक मंत्रोच्चार व हवन-पूजन के बाद खोला गया। वहीं, शिक्षण संस्थानों में भी मां सरस्वती की पूजन-अर्चन किया गया। इसके अलावा लोगों ने अपने-अपने घरों पर भी स्नान करने के बाद मां शारदे का विधिवत पूजन अर्चन किया और अबीर गुलाल लगाकर परिवार के सुख-समृद्घि की कामना की। पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनपद के 22 थाना क्षेत्र के कुल 587 स्थानों पर मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित होंगी। इसमें शहर कोतवाली में 77, दुबहर में 25, गड़वार में 42, सुखपुरा में 19, फेफना में बांसडीह में 27, बांसडीहरोड में 18, सहतवार में 58, मनियर में 11, बैरिया में 40, दोकटी में 17, रेवती में 36, हल्दी में 37, फेफना में 25, नरहीं में 12, चितबड़ागांव में 26, खेजुरी में 15, पकड़ी में 14, रसड़ा में 17, नगरा में 27, भीमपुरा में 09, सिकंदरपुर में 18 मां सरस्वती की प्रतिमा का पट खोला गया। तत्पश्चात लोगों ने ढोल के थाप पर पारम्परिक फाग गीत गाया और एक-दूसरे से गले मिल बधाई दी। धर, ध्वनि यंत्र से देवीमय गीत बज रहे थे। जिससे पूरा वातावरण देवीमय हो गया।
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शिक्षण संस्थानों में सादगी के साथ पूंजी गई मां सरस्वती
रेवती। माघ शुक्ल पंचमी की तिथि पर नगर तथा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों तथा शिक्षण संस्थानों में विद्या की देवी सरस्वती का पूजन अर्चन किया गया। कोविड के नियमों के अंतर्गत विद्यालयों में सादे रूप में शारदा जहां पूजी गयी। वहीं छोटे छोटे पंडालों में किशोरों के द्वारा वीणा वादिनी की प्रतिमाओं की स्थापना करके विद्या की देवी की पूजा की गयी। इस अवसर पर विद्यालयों में जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। वहीं पंडालों से ध्वनि विस्तारकों के माध्यम से पूरे दिन गीतों की गूंज होती रही। मां सरस्वती शिक्षण संस्थान में मेधावी छात्र/छात्राओं को सम्मानित किया गया।निरन्तर तीन वर्षों तक उत्कृष्ट स्थान पाई एक छात्रा को जहां एलईडी टीवी से नवाजा गया। वहीं विभिन्न कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पाए छात्र छात्राओं को दीवाल घड़ी, डायरी, पेन आदि से से सम्मानित किया गया।
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मां वाग्देवी का सविधि पूजन अर्चन
गड़वार। क्षेत्र के बभनौली स्थित एपेक्स स्कूल में बसंत पंचमी पर्व पूरे उल्लास से मनाया गया। इस अवसर विद्यालय परिसर में मां सरस्वती का पूजन आचार्य पंडित राहुल उपाध्याय ने विधिवत हवन पूजन कर कराया। बेल्थरारोड प्रतिनिधि के अनुसार बसंत पंचमी पर मां सरस्वती पूजन विधिवत आयोजित किए गए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नई फसल को गुड़ के साथ पूजन अर्चन कर प्रसाद ग्रहण किया। उधर, विभिन्न विद्यालयों में विद्या और बुद्धि की अधिष्ठात्री मां वाग्देवी का सविधि पूजन अर्चन किया गया। सेंट जेवियर्स स्कूल पर उप प्रधानाचार्य शीला मिश्रा की देखरेख में बच्चों नेंगीतमय प्रस्तुति कर तालियां बटोरीं। न्यू सेंट्रल पब्लिक एकेडमी पर प्रबंधक सतीश दुबे की देखरेख में नयनाभिराम झांकियां सजाकर आराधना की गई। इसके अलावा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर सरस्वती पूजन की धूम रही। रसड़ा प्रतिनिधि के अनुसार: क्षेत्र के अखनपुरा स्थित नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर के प्रांगण में सरस्वती पूजन के अवसर पर विद्यालय के तरफ से पांच वर्ष से नीचे के बच्चों को विद्यारंभ संस्कार का कार्यक्रम आयोजन किया गया। जिसमें क्षेत्र के 151 बच्चे शामिल रहे। विद्यालय के प्रबंधक अनिल सिंह यजमान की भूमिका में रहे। प्रधानाचार्य रमेश राय ने कहा कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बसंत पंचमी मनाई जाती है। बसंत पंचमी के दिन वाणी, ज्ञान, कला और शिक्षा की देवी मां सरस्वती की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। ऐसी मान्यता है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मां सरस्वती प्रकट हुई थीं। इसी कारण से बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा-आराधना होती है। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि इस दिन विद्या आरंभ करने से ज्ञान में वृद्धि होती है और बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है और दिन कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त के संपन्न किया जा सकता है। बसंत पंचमी के दिन न सिर्फ गंगा स्नान, दान और देवी सरस्वती की पूजा होती है, बल्कि कई अन्य कारणों से इसका विशेष महत्व होता है। इस मौके पर विभाग प्रचारक श्री प्रकाश जिला प्रचारक अनुज, अन्य कालिका सिंह, मार्कंडेय वर्मा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कौशल पांडेय ने किया।

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ढोल की थाप पर गूंजे फाग, उड़े अबीर-गुलाल
दुबहर। नगवा गांव स्थित आदि देव मंदिर प्रांगण में बसंत पंचमी पर ग्रामीणों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें व्यास मंडली के कलाकारों ने झाल, मजीरा, ताशा एवं ढोलक की थाप पर फाग की ताल ठोकी। एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाया। कार्यक्रम की शुरुआत पं.अश्वनी कुमार उपाध्याय ने ज्ञान एवं स्वर की देवी, मां सरस्वती के चित्र पर दीप जला एवं श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया। गायक हरेराम पाठक व्यास और गायक राजेश पाठक ने अपनी पारंपरिक फाग गीत ‘जेहि सुमिरत सब काम बनतु है, सुमिरीले श्रीभगवान...’ प्रण यही मेरो, एक राम से खेलब होरी...‘, इतसे निकली नवल राधिका, उतसे कुंवर कन्हाई...’ और ‘इत शिव भूत- प्रेत लिए संग में, वाहन बैल सवारी...’ आदि गीतों की प्रस्तुति कर लोगों को खूब झूमाया। इस मौके पर सूर्यनारायण पाठक, शिवजी पाठक, उमाशंकर पाठक, बच्चा खरवार, जगदीश नारायण पाठक, रविशंकर पाठक प्रफुल्लचंद्र पाठक, श्रीकांत शर्मा, हरेराम प्रसाद, धीरज यादव, अशोक पाठक आदि मौजूद रहे।
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