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जिला पंचायत की करतूत : बिना बजट स्वीकृत कर डाले 10.50 करोड़ के कार्य
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बलिया। जिला पंचायत में बजट नहीं होने के बाद भी 10.50 करोड़ से ज्यादा के कार्य स्वीकृत कर दिए गए। दूसरे बजट का पैसा दूसरे कार्यों में लगाकर कुछ कार्य करा दिए गए, कुछ अधूरे हैं तो कुछ शुरू भी नहीं हुए। प्रकरण कई वर्ष पहले से चला आ रहा है, लेकिन अधिकारी इसे दबाते रहे और इधर का पैसा उधर लगाकर काम चलाते रहे। किसी ने इसकी जानकारी शासन को नहीं दी और वित्तीय अनियमितता होती रही। नए अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार सिंह ने कार्यभार संभाला तो मामला संज्ञान में आया। पिछले चार वर्ष में करीब 10.50 करोड़ का गड़बड़झाला मिलने पर इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
जिला पंचायत में विकास के लिए शासन से राज्य वित्त आयोग (वर्तमान में पांचवें) की गाइडलाइन के अनुसार धनराशि दी जाती है। इस धनराशि से कई प्रकार के विकास कार्य कराए जाते हैं। बताया जा रहा है कि जिला पंचायत में इस मद से प्रतिवर्ष निर्धारित बजट के सापेक्ष पिछले कुछ वर्षों निर्धारित मानक से अधिक कार्य स्वीकृत कर दिए गए। टेंडर आदि भी करा कार्यों को शुरू करा दिया गया। ये कारनामा कई वर्षों से चलता आ रहा है। इस बीच कुछ माह पहले जिला पंचायत के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी रमेश सिंह का स्थानांतरण हो गया। नये अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार सिंह ने कार्यभार संभाला। पुराने कार्यों के लिए ठेकेदारों ने भुगतान के लिए तेजी मचाई तो फाइलें खंगाली जाने लगी। पिछले चार वर्ष का आंकड़ा निकाला गया तो पता चला कि निर्धारित बजट से 10.50 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत कर दिए गए हैं। नतीजा यह है कि कई कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। वित्तीय अनियमितता के इस गंभीर मामले को देखते हुए अपर मुख्य अधिकारी ने मामले की रिपोर्ट शासन को भेज कर मार्गदर्शन मांगा है।
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जिला पंचायत में विकास के लिए शासन से राज्य वित्त आयोग (वर्तमान में पांचवें) की गाइडलाइन के अनुसार धनराशि दी जाती है। इस धनराशि से कई प्रकार के विकास कार्य कराए जाते हैं। बताया जा रहा है कि जिला पंचायत में इस मद से प्रतिवर्ष निर्धारित बजट के सापेक्ष पिछले कुछ वर्षों निर्धारित मानक से अधिक कार्य स्वीकृत कर दिए गए। टेंडर आदि भी करा कार्यों को शुरू करा दिया गया। ये कारनामा कई वर्षों से चलता आ रहा है। इस बीच कुछ माह पहले जिला पंचायत के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी रमेश सिंह का स्थानांतरण हो गया। नये अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार सिंह ने कार्यभार संभाला। पुराने कार्यों के लिए ठेकेदारों ने भुगतान के लिए तेजी मचाई तो फाइलें खंगाली जाने लगी। पिछले चार वर्ष का आंकड़ा निकाला गया तो पता चला कि निर्धारित बजट से 10.50 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत कर दिए गए हैं। नतीजा यह है कि कई कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। वित्तीय अनियमितता के इस गंभीर मामले को देखते हुए अपर मुख्य अधिकारी ने मामले की रिपोर्ट शासन को भेज कर मार्गदर्शन मांगा है।
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