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मतदान है अधिकार, आए अड़चन तो करें टेंडर, चैलेंज और प्रॉक्सी का इस्तेमाल

Sat, 12 Feb 2022 11:14 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Feb 2022 11:14 PM IST
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Voting is a right, if there is a hurdle, use tender, challenge and proxy
बलिया। यदि किसी और ने आपके नाम से वोट दे दिया है, और आपका नाम मतदाता सूची में है, तो आप मतदान कर सकते हैं। यही नहीं यदि आप बूथ पर मतदान करने जाएं और कोई आपकी पहचान पर सवाल उठाए लेकिन आप सही हैं, तो वोट कर सकते हैं। इसी तरह यदि आप सर्विस मतदाता हैं और बाहर तैनात हैं, तो परिवार के किसी सदस्य को वोट देने के लिए नामित कर सकते हैं। एडीएम राजेश कुमार बताते हैं कि कोई भी मतदाता टेंडर वोट व चैलेंज वोट के अधिकार का प्रयोग कर सकता है। प्रॉक्सी वोट का प्रयोग सेना और अर्द्धसैनिक बलों में तैनात लोग कर सकते हैं। इन्हें पोस्टल बैलेट का भी अधिकार होता है।
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टेंडर वोट क्या है
कोई मतदाता बूथ पर मताधिकार का प्रयोग करने पहुंचता है, लेकिन पहले ही कोई उसके नाम से वोट डाल चुका होता है तो मतदाता सूची में नाम होने की स्थिति में पीठासीन अधिकारी उससे एक प्रपत्र पर मतदान करवाता है। इसके बाद मतपत्र को लिफाफे में बंद कर देता है। मतगणना के समय कम वोट के अंतर से हार-जीत की स्थिति में ऐसे वोट की गणना की जाती है। इसे टेंडर वोट कहा जाता हैं।
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प्रॉक्सी वोट क्या है
यदि आप सर्विस मतदाता (सेना और अर्द्धसैनिक बल में तैनात हैं) हैं और अपने चुनाव क्षेत्र से बाहर हैं तो परिवार के किसी सदस्य को अपने बदले वोट डालने के लिए लिखित में नामित कर सकते हैं। पीठासीन अधिकारी लिखित प्रारूप की जांच के बाद नामित व्यक्ति को वोट डालने देगा। ऐसे मतदाता की दो अंगुलियों में अमिट स्याही लगाई जाएगी। प्रॉक्सी वोट के लिए मध्य अंगुली में, जबकि उसके खुद के मत के प्रयोग के लिए तर्जनी अंगुली में अमिट स्याही लगाई जाती है। हालांकि सर्विस मतदाता को पोस्टल बैलेट का भी अधिकार होता है।
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चैलेंज वोट क्या है
यदि कोई वोटर बूथ पर मतदान करने पहुंचता है और बूथ का एजेंट अथवा कोई दूसरा व्यक्ति आपत्ति कर देता है कि इस नाम का व्यक्ति गांव में नहीं रहता है, तो ऐसी स्थिति में मतदाता उस व्यक्ति को चैलेंज कर सकता है। अपने को सही साबित करने के लिए उसे पीठासीन अधिकारी से शिकायत करनी होगी। पीठासीन अधिकारी शिकायतकर्ता को दो रुपये फीस के रूप में जमा कराएगा। इसके बाद पीठासीन अधिकारी अपने स्तर से मामले की जांच करेगा। यदि जांच में मामला सही पाया जाता है तो शिकायत करने वाला वोटर मतदान कर सकता है। यदि मामला झूठा मिला तो फर्जी मतदान करने के प्रयास के आरोप में संबंधित व्यक्ति को पुलिस को सौंपा जाएगा। ऐसे व्यक्ति पर केस दर्ज हो सकता है।
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