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वोटर कार्ड...इतना खूबसूरत, सोचा न था!
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बलिया। रंगीन वोटर कार्ड के जरिए मतदाताओं को लुभाने का केंद्रीय निर्वाचन आयोग का फार्मूला पिछले चुनावों में ही काम कर गया था। इसकी बानगी वर्तमान चुनाव में भी देखने को मिल रही है। करीब 29 बसंत देख चुका वोटर आई कार्ड युवाओं के हाथों में पहुंचकर खिलखिला रहे हैं।
समय बदलने के साथ वोटर आईकार्ड अपने धारकों की तरह ही हैंडसम हो गया है। अब उसने अपना पुराना काला और सफेद चोला उतारकर रंगीन लिबास पहन लिया है। नए रंगीन पहचान पत्र पैन कार्ड सरीखे बेहद खूबसूरत और लोगों का ध्यान खींचने वाले हैं। 1993 में चुनावों को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने एपिक यानि इलेक्ट्रोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड जारी करने का फैसला किया। नए वोटर कार्ड को देखकर युवा बोल रहे हैं कि हमने तो सोचा भी नहीं वोटर कार्ड इतना खूबसूरत होगा। वर्तमान विधानसभा चुनाव के पहले पुनरीक्षण अभियान में भी जिले की सभी विधानसभा सीटों से करीब 23558 युवा वोटर बने हैं।
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एक नजर अंतर पर
पुराना वोटर काड नया वोटर कार्ड
ब्लैक एंड व्हाइट रंगीन
साधारण कागज पर प्रिंट पीवीसी कार्ड पर प्रिंट
मुद्रण क्वालिटी साधारण बेहतर मुद्रण क्वालिटी
फोटो छपाई भद्दी फोटो की छपाई बेहतर
लिंग और जन्मतिथि जन्मतिथि और लिंग अग्र भाग में
विधानसभा का नाम और संख्या विधानसभा का नाम के लिए अलग लाइन नहीं, संख्या के लिए अलग लाइन
भाग संख्या व नाम भाग संख्या व नाम के के लिए अलग पंक्ति नहीं
जन्मतिथि और निर्वाचक सूची जन्मतिथि और निर्वाचक के बारे में घोषणा नहीं
निर्वाचन आयोग का लोगो निर्वाचन आयोग का लोगो नहीं, बार कोड अंकित है
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ऐसे रहा वोटर आईडी कार्ड का सफर
-भारत निर्वाचन आयोग ने अगस्त 1993 में एपिक यानि मतदाता फोटो पहचान पत्र जारी करने का फैसला किया।
-इसके बाद देश में कैंप लगाकर मतदाताओं के वोटर आई कार्ड बनाने का काम शुरू हुआ।
-2004 में वोटर आई कार्ड का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया।
- शुरूआत में इन वोटर कार्डों की क्वालिटी अच्छी थी, लेकिन बाद में गुणवत्ता खराब हुई।
-पहचान पत्र का साइज घटता बढ़ता रहा।
-वोटर कार्ड बाइलिंगुअल यानि दो भाषाओं में मुद्रित होते है। यह राज्यों की क्षेत्रीय भाषाओं पर निर्भर हैं।
-वोटर आई कार्ड बनने के लिए प्रारूप छह फार्म भरा जाता है। इसे मैनुअल और ऑनलाइन दोनों तरीकों से भरा जाता है।
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समय बदलने के साथ वोटर आईकार्ड अपने धारकों की तरह ही हैंडसम हो गया है। अब उसने अपना पुराना काला और सफेद चोला उतारकर रंगीन लिबास पहन लिया है। नए रंगीन पहचान पत्र पैन कार्ड सरीखे बेहद खूबसूरत और लोगों का ध्यान खींचने वाले हैं। 1993 में चुनावों को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने एपिक यानि इलेक्ट्रोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड जारी करने का फैसला किया। नए वोटर कार्ड को देखकर युवा बोल रहे हैं कि हमने तो सोचा भी नहीं वोटर कार्ड इतना खूबसूरत होगा। वर्तमान विधानसभा चुनाव के पहले पुनरीक्षण अभियान में भी जिले की सभी विधानसभा सीटों से करीब 23558 युवा वोटर बने हैं।
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एक नजर अंतर पर
पुराना वोटर काड नया वोटर कार्ड
ब्लैक एंड व्हाइट रंगीन
साधारण कागज पर प्रिंट पीवीसी कार्ड पर प्रिंट
मुद्रण क्वालिटी साधारण बेहतर मुद्रण क्वालिटी
फोटो छपाई भद्दी फोटो की छपाई बेहतर
लिंग और जन्मतिथि जन्मतिथि और लिंग अग्र भाग में
विधानसभा का नाम और संख्या विधानसभा का नाम के लिए अलग लाइन नहीं, संख्या के लिए अलग लाइन
भाग संख्या व नाम भाग संख्या व नाम के के लिए अलग पंक्ति नहीं
जन्मतिथि और निर्वाचक सूची जन्मतिथि और निर्वाचक के बारे में घोषणा नहीं
निर्वाचन आयोग का लोगो निर्वाचन आयोग का लोगो नहीं, बार कोड अंकित है
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ऐसे रहा वोटर आईडी कार्ड का सफर
-भारत निर्वाचन आयोग ने अगस्त 1993 में एपिक यानि मतदाता फोटो पहचान पत्र जारी करने का फैसला किया।
-इसके बाद देश में कैंप लगाकर मतदाताओं के वोटर आई कार्ड बनाने का काम शुरू हुआ।
-2004 में वोटर आई कार्ड का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया।
- शुरूआत में इन वोटर कार्डों की क्वालिटी अच्छी थी, लेकिन बाद में गुणवत्ता खराब हुई।
-पहचान पत्र का साइज घटता बढ़ता रहा।
-वोटर कार्ड बाइलिंगुअल यानि दो भाषाओं में मुद्रित होते है। यह राज्यों की क्षेत्रीय भाषाओं पर निर्भर हैं।
-वोटर आई कार्ड बनने के लिए प्रारूप छह फार्म भरा जाता है। इसे मैनुअल और ऑनलाइन दोनों तरीकों से भरा जाता है।
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