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Ballia News: बलिया में भूमि विवाद में चाचा-भतीजे की हत्या, चार पुलिसकर्मी निलंबित

Thu, 06 Feb 2025 11:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 06 Feb 2025 11:21 PM IST
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Uncle and nephew killed in land dispute in Ballia, four policemen suspended
सिकंदरपुर। गांव खरीद में बुधवार की देर शाम भूमि विवाद में एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इसमें मां-बेटे सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में चाचा-भतीजे की मौत हो गई। दो की हालत नाजुक है। पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। वहीं, पुलिस ने 11 नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, बलवा और संगठित अपराध सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले में एसपी ने चार पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए।
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गांव खरीद स्थित भवानी मंदिर के पास मोती चंद्र यादव (60) का घर है। पट्टीदार रामजीत यादव का घर थोड़ी दूरी पर है। दोनों पक्षों में करीब 30 वर्षों से जमीन को लेकर विवाद है। बुधवार की शाम करीब 7:30 बजे मोतीचंद्र यादव, अनिल यादव और पंकज बैठका में बातें कर रहे थे। उसी दौरान रामजीत यादव के परिवार के पुरुष और महिलाएं लाठी-डंडा, कुदाल, फावड़ा और कुल्हाड़ी के साथ आ धमके। महिलाएं और कुछ अन्य सदस्य घर में घुस गए और महिलाओं, बच्चों और लड़कियों को पीटना शुरू कर दिया।
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पैरों से दिव्यांग मोतीचंद्र गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन हमलावर नहीं माने। हमले में मोतीचंद्र, चचेरे भाई अनिल (42) पुत्र कोमल, भतीजे पंकज (24) पुत्र अक्षय लाल यादव, गीता देवी (55) पत्नी अक्षयलाल यादव, शुभम (10) पुत्र अनिल, संजना (13) पुत्र अनिल, चंद्रकला (30) पत्नी अनिल और रंजना (20) पुत्री अक्षयलाल घायल हो गईं। करीब 25 मिनट तक उपद्रव के बाद आरोपी भाग गए। फायरिंग की भी बात सामने आ रही है। इसके बाद घायलों को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां से पंकज और अनिल को वाराणसी जा रहे थे। रास्ते में फेफना के पास पंकज की मौत हो गई, जबकि मऊ में इलाज के दौरान अनिल यादव ने दम तोड़ दिया।
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मोतीचंद्र और गीता का इलाज मऊ के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। सूचना पर पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह पहुंचे। दोपहर बाद डीआईजी आजमगढ़ सुनील सिंह ने भी मौका मुआयना किया। सुरक्षा के मद्देनजर सिकंदरपुर, मनियर, पकड़ी और सहतवार सहित आधा दर्जन थानों की पुलिस तैनात कर दी गई है। पीड़िता गीता देवी की तहरीर पर रामजीत यादव के अलावा इसके पुत्र नीरज यादव, निरंजन और मनीष, मीना पत्नी रामजीत, सुमन, इंद्रासन, सुशील और सुमित, संतोष यादव, प्रभु को नामजद किया गया है। कई अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।



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इन्हें किया गया निलंबित
सिकंदरपुर। कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता, अकर्मण्यता एवं अनुशासनहीनता बरतने के आरोप में एसपी ओमवीर सिंह ने प्रशिक्षु उपनिरीक्षक सुमित सिंह, मुख्य आरक्षी सोहन सोनकर, आरक्षी विशनवीर चौधरी एवं आरक्षी विजय प्रकाश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रभारी निरीक्षक सिकंदरपुर विकासचंद्र पांडेय तथा पूर्व हलका प्रभारी उपनिरीक्षक धर्मवीर यादव के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

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तीन भाइयों में सबसे बड़ा था पंकज

सीआरपीएफ जवान अक्षयलाल यादव के तीन पुत्रों में पंकज सबसे बड़ा था। घर पर ही रहता था। उसके दो छोटे भाई पीयूष और प्रवीण प्रयागराज में रह कर पढ़ाई करते हैं। एक बहन बिहार में शिक्षक है, जबकि दूसरी बहन रंजना घटना के वक्त घर पर ही थी, जिसके सिर में गंभीर चोट लगी है। मृत अनिल यादव घर पर खेतीबाड़ी करते थे। घटना में अनिल का दस वर्षीय पुत्र शुभम, 13 वर्षीया पुत्री संजना और पत्नी चंद्रकला को भी काफी चोट आई हैं। इनको बृहस्पतिवार की सुबह घर पहुंचे रिश्तेदार अस्पताल ले गए। घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है।
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पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप

दोनों पट्टीदारों का खानगी बंटवारा चार पीढ़ी पूर्व ही हो चुका है। सभी पक्ष अपने हिस्से पर काबिज भी हैं। मोतीचंद्र के घर के पास वाली जमीन पर रामजीत का परिवार अपना दावा करता है। 1995 से विचाराधीन इस मामले में सिविल कोर्ट से स्थगन आदेश है। करीब सात माह पूर्व विपक्षी ने पीड़ित के घर के पास नाद बना लिया और गोबर रखना शुरू कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने विपक्षियों की मदद की। इस बीच दोनों पक्षों में कई बार तनातनी की स्थिति बनी। गोबर हटवाने का जिला और सत्र न्यायालय ने निर्देश दिया, बावजूद पुलिस टाल मटोल करती रही। ग्रामीणों का कहना है यदि पुलिस अदालती आदेश का अनुपालन करा दी होती तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती।



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दिसंबर में भी हुई थी मारपीट

गोबर रखने को लेकर बीते दिसंबर में भी दोनों पक्षों में मारपीट की घटना हुई थी। इसमें दोनों तरफ के लोग चोटिल हुए थे। पुलिस ने दोनों पक्षों पर मुकदमा दर्ज कर चालान कर पल्ला झाड़ लिया था। पीड़ित परिवार के सदस्य ऋषिकेश यादव का आरोप है कि इस मामले में पुलिस का रवैया ठीक नहीं था। विपक्षियों के प्रति पुलिस उदार बनी रही। एसएचओ सिकंदरपुर के समक्ष स्थगन आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की गुहार लगाई जाती रही। इस दरम्यान कई बार अदालत का डायरेक्शन भी हुआ बावजूद पुलिस मनमानी करती रही। यदि पुलिस मामले की गंभीरता को समझी होती तो शायद यह घटना नहीं होती।

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सहमा सहमा रहता था पीड़ित परिवार

ग्रामीणों के अनुसार पुलिस की शह पाकर विपक्षियों का मनोबल बढ़ा था। इस कारण पीड़ित परिवार सहमा रहता था। एक माह पहले हुई मारपीट की घटना के बाद परिवार के अधिकतर सदस्य बाहर ही रह रहे थे। यहां तक कि छुट्टी पर आए सीआरपीएफ जवान अक्षय लाल यादव घर नहीं रह रहे थे। तीन दिन पूर्व ही ड्यूटी पर लौटे थे। विपक्षियों की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए पीड़ित परिवार ने सीसीटीवी लगा रखा था। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने डीवीआर कब्जे में ले लिया है।



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वर्जन

- रात आठ बजे मारपीट की सूचना मिली। एक पक्ष के रामजीत यादव और पुत्र निरंजन यादव, नीरज यादव, मनीष यादव व अन्य लोगों ने घर में घुसकर हमला किया। इससे पंकज यादव और अनिल यादव की मौत हो गई। गीता देवी व मोतीचंद्र का इलाज चल रहा है। दोनों पक्षों में वर्षों से भूमि विवाद है। इस पर न्यायालय का स्थगन आदेश भी है। एक महीने पहले भी विवाद होने पर दोनों तरफ से केस दर्ज हुआ था। - ओमवीर सिंह, एसपी।
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