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Ballia News: सुबह नौ बजे तक बंद रहे दो पर्ची काउंटर, 95 मरीजों को पर्ची के लिए 30 मिनट करना पड़ा इंतजार
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जिला अस्पताल के ओपीडी में लगी मरीजों और तीमारदारों की भीड़। संवाद
बलिया। मौसम में बदलाव, बारिश और उमस के बीच वायरल संक्रमण का असर बढ़ने लगा है। इससे जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। लेकिन जिला अस्पताल में सुबह 9 बजे तक दो पर्ची काउंटर बंद रहे। इससे 30 मिनट तक 95 मरीजों को 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। दोनों काउंटर सुबह आठ बजे की जगह नौ बजे के बाद खुले।
जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को 1729 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। फिजिशियन ओपीडी में सबसे अधिक भीड़ रही, जहां करीब 419 मरीजों ने चिकित्सकीय परामर्श लिया। इनमें 260 से अधिक मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण पाए गए। बाल रोग ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सकों के अनुसार करीब 60 फीसदी बच्चे वायरल संक्रमण, तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में अकड़न और निमोनिया जैसी शिकायतों के साथ पहुंचे।
बारिश के बाद वातावरण में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव से वायरल संक्रमण का प्रसार बढ़ा है। चिकित्सकों ने कहा कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचने की संभावना रहती है। चिकित्सकों ने बिना सलाह एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेने से बचने की सलाह दी और मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी।
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चार लक्षण वाले मरीजों का जांच को लिया सैंपल
जिला अस्पताल के आरटीसीपीआर लैब में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा शुरू कर दी गई है। चार लक्षण वाले मरीजों का सैंपल जांच के लिए लिया गया है। जांच रिपोर्ट आने की बाद स्वाइन फ्लू की पुष्टि होगी। चिकित्सकों का कहना है कि सिर्फ लक्षणों के आधार पर एच1 एन1 या स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं की जा सकती। जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय परीक्षण और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होती है। लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने पर मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि चार लक्षण वाले मरीजों की
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दो पर्ची काउंटर बंद होने से मरीजों की बढ़ी परेशानी
बलिया। रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को दूरदराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार इलाज की उम्मीद में सुबह ही जिला अस्पताल पहुंच गए। सुबह नौ बजे तक पर्ची काउंटर पर महिला-पुरुष मरीजों समेत करीब दो सौ से अधिक लोगों की भीड़ जुट गई। इस दौरान केवल एक काउंटर खुला होने से पर्ची बनवाने के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा। व्यवस्था संभालने के लिए दो सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। अन्य काउंटर नहीं खुलने से परेशान मरीजों और तीमारदारों ने हंगामा किया, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने समझाकर मामला शांत कराया। करीब सवा नौ बजे के बाद दो अन्य पर्ची काउंटर खुलने पर मरीजों को राहत मिली और पर्ची बनवाने की प्रक्रिया तेज हुई।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को 1729 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। फिजिशियन ओपीडी में सबसे अधिक भीड़ रही, जहां करीब 419 मरीजों ने चिकित्सकीय परामर्श लिया। इनमें 260 से अधिक मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण पाए गए। बाल रोग ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सकों के अनुसार करीब 60 फीसदी बच्चे वायरल संक्रमण, तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में अकड़न और निमोनिया जैसी शिकायतों के साथ पहुंचे।
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बारिश के बाद वातावरण में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव से वायरल संक्रमण का प्रसार बढ़ा है। चिकित्सकों ने कहा कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचने की संभावना रहती है। चिकित्सकों ने बिना सलाह एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेने से बचने की सलाह दी और मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी।
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चार लक्षण वाले मरीजों का जांच को लिया सैंपल
जिला अस्पताल के आरटीसीपीआर लैब में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा शुरू कर दी गई है। चार लक्षण वाले मरीजों का सैंपल जांच के लिए लिया गया है। जांच रिपोर्ट आने की बाद स्वाइन फ्लू की पुष्टि होगी। चिकित्सकों का कहना है कि सिर्फ लक्षणों के आधार पर एच1 एन1 या स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं की जा सकती। जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय परीक्षण और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होती है। लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने पर मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि चार लक्षण वाले मरीजों की
दो पर्ची काउंटर बंद होने से मरीजों की बढ़ी परेशानी
बलिया। रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को दूरदराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार इलाज की उम्मीद में सुबह ही जिला अस्पताल पहुंच गए। सुबह नौ बजे तक पर्ची काउंटर पर महिला-पुरुष मरीजों समेत करीब दो सौ से अधिक लोगों की भीड़ जुट गई। इस दौरान केवल एक काउंटर खुला होने से पर्ची बनवाने के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा। व्यवस्था संभालने के लिए दो सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। अन्य काउंटर नहीं खुलने से परेशान मरीजों और तीमारदारों ने हंगामा किया, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने समझाकर मामला शांत कराया। करीब सवा नौ बजे के बाद दो अन्य पर्ची काउंटर खुलने पर मरीजों को राहत मिली और पर्ची बनवाने की प्रक्रिया तेज हुई।