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फंसा मुकाबला, खामोश वोटा, प्रत्याशियों के चेहरे पर भी शिकन

Thu, 17 Feb 2022 11:41 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Feb 2022 11:41 PM IST
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Trapped contest, silent vote, wrinkle on the faces of the candidates
बलिया। स्थानीय विधानसभा का चुनावी भूगोल इस बार बदला हुआ है। टिकट कटने पर विधायक सुरेंद्र सिंह के भाजपा छोड़ वीआईपी से मैदान में आने और सपा से टिकट न मिलने पर सुभाष यादव के बसपा से मैदान में आने से चुनाव कड़े मुकाबले में फंस गया। माहोल को देख जहां मतदाताओं ने खामोशी की चादर ओढ़ ली है, वहीं प्रत्याशियों के माथे पर शिकन साफ दिख रही है। विधानसभा चुनाव-2022 में ऊंच किस करवट बैठेगा इस पर कयासों का दौर जारी है।
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तीन तरफ से बिहार और गंगा तथा सरयू नदी से घिरे विधानसभा में विकास से लेकर बाढ़ और कटान तक के तमाम मुद्दे हैं, लेकिन हर बार यहां का चुनाव जातीय समीकरण पर आकर सिमट जाता है। इस बार विधानसभा चुनाव का परिदृश्य कुछ ऐसा बना है कि जातीय समीकरण भी उलझ नजर आ रहा है। मतदाताओं की वैसी लामबंदी इस बार नहीं दिख रही है जैसे कि पहले के चुनाव में दिखती थी। भाजपा से टिकट कटने से एक वर्ग सुरेंद्र सिंह के पक्ष में खासा नाराज दिख रहा है। इस वर्ग का नाराजगी बनी रही थी तो भाजपा के रास्ते में कांटे बिछने तय है। वहीं, आम लोगों में मिलनसार छवि वाले पूर्व विधायक सुभाष यादव के मैदान में ताल ठोकने से सपा का यादव मतों को लेकर आशंकित होना लाजिमी है। हालांकि भाजपा से राज्यमंत्री आनंद स्वरुप शुक्ल और सपा से पूर्व विधायक जय प्रकाश अंचल दमदारी से मैदान में लगे हुए हैं, लेकिन प्रत्याशियों के चेहरे पर शिकन साफ दिख रही है।
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क्षत्रिय-यादव बराबर, ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग होंगे निर्णयक
जयप्रकाश नगर। यह क्षेत्र संपूर्ण क्रांति के प्रणेता व समाजवाद के अग्रज रहे लोकनायक जयप्रकाश नारायण और छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र का गृह विधानसभा क्षेत्र है। यहां की राजनीति इस बार इतनी उलझी दिख रही है कि, कौन किस पर भारी पड़ेगा यह तय कर पाना मुश्किल है। पल-पल समीकरण बदल रहे हैं। भाजपा के साथ ही सपा ने विधानसभा से बाहर के प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है। इसको लेकर भी पूरे विधानसभा क्षेत्र में बहस छिड़ी है। जातिगत हिसाब से यहां क्षत्रिय और यादवों की संख्या बराबर है। इस बार निर्णायक मतदाता के नाम पर प्रमुख रूप से ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग है।
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2017 के टिकट बंटवारे में भी चली थी खूब दांव-पेच
जयप्रकाश नगर। विधानसभा चुनाव-2017 में भी बैरिया में टिकट बंटवारे को लेकर कई दांव-पेच चले थे। 2012 में मुक्तेश्वर सिंह बसपा से चुनाव लड़ रहे थे, भरत सिंह भाजपा से और जयप्रकाश अंचल सपा से प्रत्याशी थे। मुक्तेश्वर और भरत सिंह के बीच अगड़ी जाति का वोट बंटा और सपा के जयप्रकाश अंचल लगभग चुनाव जीते थे। चुनाव हारने के बाद भरत सिंह 2014 में भाजपा से लोकसभा चुनाव में उतरे और विजयी हुए। सांसद बनने के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए भरत सिंह ने सुरेंद्रनाथ सिंह को चुना। 2019 के लोकसभा चुनाव में भरत सिंह का टिकट भी कट गया। भाजपा से वीरेंद्र सिंह मस्त सांसद हैं।
कुल मतदाता-362293
पुरुष-196732
महिला-165545
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