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जहां रहता था घुटने भर पानी, वहां होने लगी खेती
ब्यूरो/ अमर उजाला, बलिया
Updated Sat, 02 Apr 2016 10:01 PM IST
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सूखने लगी है गंगा
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मोक्ष दायिनी गंगा की अब हालत यह हो गई है कि बीच में रेती के बड़े टीलों पर खेती होने लगी है। हर साल छोटे होते जा रहे पाट रेतीले टीले यहीं बता रहे हैं कि गंगा के लिए आने वाले दिन शुभ नहीं हैं। चार साल पहले गंगा के बीच में गर्मी के दिनों में घुटने भर पानी में बच्चे उछलकूद करते थे, वहां अब तरबूज की खेती हो रही है। केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे कितना सफल होगा, यह समय ही बताएगा। सफाई तो दूर केंद्र सरकार हावड़ा से इलाहाबाद तक जल मार्ग कैसे शुरू करेगी। इसको लेकर संशय पैदा हो रहा है।
जलीय जीव भी गंगा से विलुप्त हो रहे हैं। प्रदूषण और कई बांध के चलते गंगा का जलस्तर दिनों दिन घटता जा रहा है। भरौली-बक्सर के बीच में गंगा बहती हैं। गंगा के बीच में एक किलोमीटर दूरी तक रेत का बड़ा टिला बन गया है। इसका उपयोग दो मछुआरे तरबूज की खेती के रूप में कर रहे हैं। इस रेती पर कोई लगान भी भी नहीं लगना है और सुरक्षा के साथ ही सिंचाई की भी परेशानी नहीं है।
यहां एक फीट खुदाई करने पर पानी आ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चिंता इस बात की है कि नदी को बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं हो रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह होने की संभावना है। क्योंकि 2009 में पर्यटन विभाग ने विदेशी सैलानियों को कोलकाता से वाराणसी तक जल मार्ग को यात्रा के लिए वातानुकूलित पांडव क्रूज शुरू किया लेकिन वह भी सफल नहीं हुआ। किसी तरह मशक्कत के बाद चार बार ही आ पाया। वह भी गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंच पाया था।
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जलीय जीव भी गंगा से विलुप्त हो रहे हैं। प्रदूषण और कई बांध के चलते गंगा का जलस्तर दिनों दिन घटता जा रहा है। भरौली-बक्सर के बीच में गंगा बहती हैं। गंगा के बीच में एक किलोमीटर दूरी तक रेत का बड़ा टिला बन गया है। इसका उपयोग दो मछुआरे तरबूज की खेती के रूप में कर रहे हैं। इस रेती पर कोई लगान भी भी नहीं लगना है और सुरक्षा के साथ ही सिंचाई की भी परेशानी नहीं है।
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यहां एक फीट खुदाई करने पर पानी आ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चिंता इस बात की है कि नदी को बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं हो रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह होने की संभावना है। क्योंकि 2009 में पर्यटन विभाग ने विदेशी सैलानियों को कोलकाता से वाराणसी तक जल मार्ग को यात्रा के लिए वातानुकूलित पांडव क्रूज शुरू किया लेकिन वह भी सफल नहीं हुआ। किसी तरह मशक्कत के बाद चार बार ही आ पाया। वह भी गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंच पाया था।
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