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ग्राम प्रधानों को दिया जाए उनका अधिकार
अमर उजाला ब्यूरोः बलिया
Updated Fri, 23 Sep 2016 10:27 PM IST
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नगर मजिसट्रेट को ज्ञापन सौंपते प्रधान संगठन के पदाधिकारी।
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अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले रथ यात्रा लेकर निकले पदाधिकारियों का काफिला शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचा। जहां ग्राम प्रधानों को लेकर विशाल सभा की गई। इस दौरान प्रदेश के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित मांग पत्र नगर मजिस्ट्रेट मनोहर लाल को सौंपा।
अपने संबोधन में प्रदेश अध्यक्ष रामसेवक यादव ने कहा कि ग्राम प्रधानों को अधिकार तो बहुत दिए गए हैं, लेकिन उनके अधिकारों की कटौती कर उन्हें गांव का चपरासी बना दिया गया। जिलाधिकारी से लेकर तकनीकी सहायक तक ग्राम प्रधानों का शोषण करने तक में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कहा कि ग्राम प्रधानों को भी एक सम्मानजनक वेतन दिया जाना चाहिए। जहां एक तरफ देश की बड़ी पंचायतों में बैठने वाले सांसद तथा विधायकों को उनके सचिव से एक रुपये कम वेतन दिया जाता है। वहीं ग्राम प्रधानों को सचिव के दसवें हिस्सा में भी वेतन नहीं मिलता है। कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में सामाजिक और आर्थिक सर्वे कराया गया। जिसमेें ग्राम पंचायतों को विश्वास में नहीं लिया गया था। यह सर्वे सरकार ने अपनी एजेंसियों से कराया। जिसमें 90 फीसदी पात्र व्यक्ति छूट गए थे। यह सर्वे दोबारा कराया जाए तो पात्र व्यक्तियों को लाभ मिल सकेगा। कहा कि खुली बैठक के नाम पर अधिकारी अपना उल्लू सीधा कर रहे।
वर्तमान सरकार के आदेश के क्रम में पंचायतें मात्र 50 हजार रुपये तक खर्च कर सकती है। इसके ऊपर के लिए ग्राम प्रधान को एडीओ पंचायत, डीपीआरओ तथा जिलाधिकारी से स्वीकृति लेनी पड़ती है। अखिलानंद सिंह, ब्रजेश कन्नौजिया, सुभाष चंद्र, मुरारी तिवारी, संजय कुमार, विनोद कुमार सिंह, शुभनाथ आदि मौजूद रहे।
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अपने संबोधन में प्रदेश अध्यक्ष रामसेवक यादव ने कहा कि ग्राम प्रधानों को अधिकार तो बहुत दिए गए हैं, लेकिन उनके अधिकारों की कटौती कर उन्हें गांव का चपरासी बना दिया गया। जिलाधिकारी से लेकर तकनीकी सहायक तक ग्राम प्रधानों का शोषण करने तक में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कहा कि ग्राम प्रधानों को भी एक सम्मानजनक वेतन दिया जाना चाहिए। जहां एक तरफ देश की बड़ी पंचायतों में बैठने वाले सांसद तथा विधायकों को उनके सचिव से एक रुपये कम वेतन दिया जाता है। वहीं ग्राम प्रधानों को सचिव के दसवें हिस्सा में भी वेतन नहीं मिलता है। कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में सामाजिक और आर्थिक सर्वे कराया गया। जिसमेें ग्राम पंचायतों को विश्वास में नहीं लिया गया था। यह सर्वे सरकार ने अपनी एजेंसियों से कराया। जिसमें 90 फीसदी पात्र व्यक्ति छूट गए थे। यह सर्वे दोबारा कराया जाए तो पात्र व्यक्तियों को लाभ मिल सकेगा। कहा कि खुली बैठक के नाम पर अधिकारी अपना उल्लू सीधा कर रहे।
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वर्तमान सरकार के आदेश के क्रम में पंचायतें मात्र 50 हजार रुपये तक खर्च कर सकती है। इसके ऊपर के लिए ग्राम प्रधान को एडीओ पंचायत, डीपीआरओ तथा जिलाधिकारी से स्वीकृति लेनी पड़ती है। अखिलानंद सिंह, ब्रजेश कन्नौजिया, सुभाष चंद्र, मुरारी तिवारी, संजय कुमार, विनोद कुमार सिंह, शुभनाथ आदि मौजूद रहे।
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