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गंगा की लहरें मचा रहीं तबाही, पुलिया भी जलधारा में समाई
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चक्की नौरंगा गांव में उपजाऊ भूमि को काटती गंगा नदी की लहरे।
- फोटो : BALLIA
मझौवां। बैरिया विकासखंड के गंगा के अंतिम छोर पर बसे चक्की (नौरंगा) में लगातार पांच दिनों से गंगा की उतरतीं लहरें अपना कहर बरपा रही हैं। मंगलवार की सुबह गंगा की कटान में प्रधानमंत्री सड़क पर बनी तीसरी पुलिया भी गंगा की मुख्य धारा में समाहित हो गई। तेज कटान की वजह से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल उत्पन्न हो गया।
गंगा का पानी नीचे खिसकने के बाद भी कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इससे पूर्व यानी सोमवार को गंगा की लहरों में तीन किमी सड़क और सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन भी गंगा की कटान की भेंट चढ़ गया था। बस्ती से महज 100 मीटर की दूरी पर गंगा तांडव मचा रही हैं। इससे लगभग 115 एकड़ उपजाऊ भूमि मंगलवार को गंगा की लहरों में समा गई। ऐसे में बस्ती की ओर बढ़ रही गंगा को देखते हुए गांव के ही राजमंगल ठाकुर, लकड़ी मिश्र, रमाकांत ठाकुर आदि ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर आज शिकायत दर्ज कराई है कि प्रशासन की तरफ से कोई भी बचाव कार्य नहीं किया जा रहा है। चक्की (नौरंगा) में मंगलवार की सुबह से ही गंगा की उतरती लहरें अब अपना रुख सीधे चक्की नौरंगा गांव को निशाने पर लेने के लिए आतुर दिख रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर यही स्थिति रही तो यह गांव भी पानी में विलीन हो जाएगा। ग्रामीणों ने हरे पेड़ों की टहनियों को काटकर नदी में डालकर कटान रोकने की पूरी कोशिश की लेकिन कटान लंबी दूरी में है। इससे कोई सफलता नहीं मिली। गांव की करीब 30 हजार की आबादी के अपने पुरखों की संपति को गंगा में विलीन होते देख उनके होश उड़े हुए हैं। नदी की कटान से अब तक पांच दर्जन से अधिक किसानों की लगभग दो सौ एकड़ से अधिक परवल की फसल सहित करीब तीन सौ एकड़ उपजाऊ भूमि, तीन किमी मार्ग के अलावा प्रधानमंत्री सड़क पर बनी तीन पुलिया गंगा की मुख्यधारा में विलीन हो गई हैं।
30 हजार की आबादी का संपर्क टूटा
मझौवां। चक्की (नौरंगा) से भुआला छपरा फेकू बाबा के स्थान को जोड़ने वाली मात्र एक सड़क प्रधानमंत्री योजना के अंर्तगत बनाई गई थी। 30 हजार आबादी का तीसरी पुलिया गंगा नदी में समा जाने से सम्पर्क टूट चुका है। इसी सड़क से चक्की नौरंगा गांव के साथ ही बिहार के लोग भी कम दूरी तय करके गंगा नदी को पार कर बलिया-बैरिया आते जाते थे। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को हैं कि दोनों गांव के लोगों की आस्था का केंद्र भुआल छपरा में स्थित फेकू बाबा का प्रचीन मंदिर स्थित है। इसमें दोनों गावों की महिलाएं सोमवार एवं शुक्रवार को हर घर से पूजा करने के लिए आती हैं, जो अब मुश्किल दिख रहा है। यूपी बिहार में जाने के लिए अब लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।
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गंगा का पानी नीचे खिसकने के बाद भी कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इससे पूर्व यानी सोमवार को गंगा की लहरों में तीन किमी सड़क और सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन भी गंगा की कटान की भेंट चढ़ गया था। बस्ती से महज 100 मीटर की दूरी पर गंगा तांडव मचा रही हैं। इससे लगभग 115 एकड़ उपजाऊ भूमि मंगलवार को गंगा की लहरों में समा गई। ऐसे में बस्ती की ओर बढ़ रही गंगा को देखते हुए गांव के ही राजमंगल ठाकुर, लकड़ी मिश्र, रमाकांत ठाकुर आदि ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर आज शिकायत दर्ज कराई है कि प्रशासन की तरफ से कोई भी बचाव कार्य नहीं किया जा रहा है। चक्की (नौरंगा) में मंगलवार की सुबह से ही गंगा की उतरती लहरें अब अपना रुख सीधे चक्की नौरंगा गांव को निशाने पर लेने के लिए आतुर दिख रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर यही स्थिति रही तो यह गांव भी पानी में विलीन हो जाएगा। ग्रामीणों ने हरे पेड़ों की टहनियों को काटकर नदी में डालकर कटान रोकने की पूरी कोशिश की लेकिन कटान लंबी दूरी में है। इससे कोई सफलता नहीं मिली। गांव की करीब 30 हजार की आबादी के अपने पुरखों की संपति को गंगा में विलीन होते देख उनके होश उड़े हुए हैं। नदी की कटान से अब तक पांच दर्जन से अधिक किसानों की लगभग दो सौ एकड़ से अधिक परवल की फसल सहित करीब तीन सौ एकड़ उपजाऊ भूमि, तीन किमी मार्ग के अलावा प्रधानमंत्री सड़क पर बनी तीन पुलिया गंगा की मुख्यधारा में विलीन हो गई हैं।
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30 हजार की आबादी का संपर्क टूटा
मझौवां। चक्की (नौरंगा) से भुआला छपरा फेकू बाबा के स्थान को जोड़ने वाली मात्र एक सड़क प्रधानमंत्री योजना के अंर्तगत बनाई गई थी। 30 हजार आबादी का तीसरी पुलिया गंगा नदी में समा जाने से सम्पर्क टूट चुका है। इसी सड़क से चक्की नौरंगा गांव के साथ ही बिहार के लोग भी कम दूरी तय करके गंगा नदी को पार कर बलिया-बैरिया आते जाते थे। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को हैं कि दोनों गांव के लोगों की आस्था का केंद्र भुआल छपरा में स्थित फेकू बाबा का प्रचीन मंदिर स्थित है। इसमें दोनों गावों की महिलाएं सोमवार एवं शुक्रवार को हर घर से पूजा करने के लिए आती हैं, जो अब मुश्किल दिख रहा है। यूपी बिहार में जाने के लिए अब लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।
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