जयप्रकाश नगर। बुधवार की देर शाम से हो रही अनवरत बारिश ने बाढ़ पीडि़तों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया हैं। पहले से ही गंगा व घाघरा के बाढ़ का दंश झेल रहे बाढ़ पीडि़त घर बार छोड़कर बंधे पर छोटे से तिरपाल में परिवार व अपने पशुओं को लेकर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ पीडि़तों के लिए यह तिरपाल नाकाफी साबित हो रहे हैं। बाढ़ पीडि़त बारिश में भीग कर अपना रहने को मजबूर है। इन बाढ़ पीडि़तों को बारिश से बचाने में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
मालूम हो कि चौबेछपरा, सुघरछपरा, केहरपुर, दुबेछपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा, पांडेयपुर, बुधनचक, चिंतामणि राय के टोला, गुदरी सिंह के टोला, मिश्र गिरी के मठिया, मिश्र के हटा, वंश गोपाल छपरा, रामपुर कोड़रहा, भवन टोला, भगवान टोला, शिवनारायण टोला, रमेश्वर टोला, दलेल टोला, बड़का सुफल टोला, चांददीयर, बैजनाथ के डेरा, पियारी के टोला, बकुल्हा, बकुल्हा पूर्वी, टोला फतेह राय के टोला सहित डेढ़ दर्जन गांव के हजारों की आबादी में बाढ़ पीडि़त एनएच-31, बीएसटी बांध, पुरानी रेलवे लाइन के पटरियों पर शरण लिए हुए हैं। मौसम जब साफ था तो बाढ़ पीडि़त खुले आसमान में भी समय बिता लेते थे। लेकिन बुधवार की शाम से अनवरत हो रही बरसात के कारण बाढ़ पीडि़तों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पक्का पकाया भोजन वह राहत सामग्री लेकर पहुंचने वाले स्वयंसेवकों का रास्ता बारिश ने रोक दिया है। वहीं शासन से उपलब्ध कराए जाने वाले बाढ़ राहत सामग्री दुर्व्यवस्था की भेंट चढ़ गया है। पशु चिकित्सा केंद्र व स्वास्थ्य शिविर केंद्रों पर भी चिकित्सक, चिकित्सा कर्मी बृहस्पतिवार को नदारद दिखे।