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मरीज अस्पताल के अंदर लगा रहे हैं छाता

Thu, 06 Jul 2017 10:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बलिया
अमर उजाला ब्यूरो/बलिया Updated Thu, 06 Jul 2017 10:29 PM IST
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The patient is putting the umbrella inside the hospital
नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जर्जर भवन में छाता लेकर इलाज कराते मरीज।
क्षेत्र के नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छाता के सभी भवन में पानी टपक रहा है। आलम यह है कि बारिश होने पर अस्पताल के अंदर कर्मचारी व मरीजों को बैठना मुश्किल हो जाता है। किसी तरह पानी बरसने पर छाता लगाकर चिकित्सक रोगियों का इलाज कर रहे हैं। जबकि लाखों रुपये की लागत से बनी पानी टंकी शो-पीस बनी हुई है। वहीं पूरे अस्पताल परिसर में कर्मचारियों का आवास जर्जर होने के साथ ही उसकी चारों तरफ जंगल में तब्दील हो गया है।
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दुबहर विकास खंड के छाता गांव में नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन 28 जनवरी 1991 को तत्कालीक स्वास्थ्य मंत्री माता प्रसाद पांडेय के करकमलो द्वारा उद्घाटन किया गया था। उस समय ग्रामीणों को काफी हर्ष हुआ। क्षेत्र में अस्पताल खुलने से ग्रामीणों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। प्रभारी चिकित्सक एवं कर्मचारी तो प्रतिदिन आते हैं, लेकिन जब भी बारिश होती है तो मरीजों को इलाज कराने के लिए छाता लेकर डाक्टर के पास खड़ा रहना पड़ता है। यदि कोई मरीज नहीं रहता है तो चिकित्सक एवं कर्मचारी पूरे भवन के चैनल गेट के पास खड़ा होकर बारिश खत्म होने का इंतजार करते हैं।
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बताते चले कि अस्पताल में एक डाक्टर रूम, एक पैथालाजी, एक स्टोर रूम, जच्चा-बच्चा के लिए एक बेड रूम, ड्रेसिंग रूम सहित सहित हाल में पानी कई वर्षों से टपक रहा है। स्थिति यह है कि अब भवन काफी जर्जर हो चुका है। जो कभी भी गिरने की आशंका बनी रहती है। गांव के महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के लिए भवन बने हैं। उसकी चारों तरफ जंगल-झाड़ लगा हुआ है। प्रभारी फार्मासिस्ट जितेंद्र नाथ साह ने बताया कि अस्पताल का शिलान्यास के बाद आज तक अस्पताल भवन में विद्युत की व्यवस्था नहीं हो पाई। रामनाथ पासवान ने बताया कि इस अस्पताल के आसपास करीब डेढ़ दर्जन से अधिक गांव के लोग इलाज कराने आते हैं। लेकिन अस्पताल में जर्जर व्यवस्था के कारण मरीज भी यहां आने से घबराने लगे हैं।
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