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सेक डाटा से वंचित पात्रों का नाम जुड़ेगा सूची में
ballia
Updated Mon, 19 Jun 2017 11:21 PM IST
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सामाजिक, आर्थिक व जातिगत गणना (सेक डाटा) 2011 से वंचित पात्रों का नाम अब सूची में जोड़ा जाएगा। इसके लिए 20 जुलाई तक सर्वे कर शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। प्रधानमंत्री आवास के लिए की गई कवायद का फरमान जिले में पहुंच गया है और इस बात डीआरडीए के पीडी की ओर से सभी ब्लाक अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिया गया है।
वर्ष 2016-17 में भारत सरकार की ओर से सालों से चल रहे इंदिरा आवास योजना को बंद कर प्रधानमंत्री आवास का संचालन किया गया। इसके लिए सरकार की ओर से लाभार्थियों के चयन के लिए नई गाइड लाइन भी जारी किया गया। पीएम आवास के लाभार्थियों का चयन सेक डाटा से करने का निर्देश जारी कर संबंधित ब्लाकों के बीडीओ के लॉगिन पर सूची उपलब्ध कराया गया।
यह भी व्यवस्था दी गई कि संबंधित गांवों की सूची का अनुमोदन ग्रामसभा की खुली बैठक में कराते हुए पात्रता तय की जाए और अपात्र पाए जाने पर सूची में अंकित अगले क्रम के लाभार्थी को आवास आवंटित किया जाए। हालांकि इसे लागू होने में काफी समय लगा और इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2015-16 के आवासों का चयन अभी भी जारी है।
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इस दौरान कमोवेश सभी गांवों के इस बात की शिकायत शासन को मिली कि पात्रों का चयन नहीं किया जा रहा है जबकि अपात्रों का चयन किया जा रहा है। इसकी पड़ताल करने पर सामने आया कि वर्ष 2011 में तैयार किए गए सेक डाटा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और गरीबों का नाम सूची से वंचित है।
सेक डाटा में पात्रों का नाम नहीं होने के कारण वह प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हो रहे थे। हालांकि यह मामला उच्च स्तर पर उठ चुका है और प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी सत्ता संभालने के बाद उठाया था। इसे देखते हुए शासन ने गांवों में रहने वाले वैसे पात्रों का नाम सेक डाटा में शामिल करने का निर्देश दिया है, जिनका नाम किन्हीं कारणों से सेक डाटा में नहीं है।
ग्राम्य विकास आयुक्त पार्थसारथी सेन शर्मा ने इस बाबत निर्देश जारी करते हुए ऐसे पात्रों का सर्वे कर 20 जुलाई तक सूची शासन को उपलब्ध कराने को कहा है। डीआरडीए के परियोजना निदेशक ने गांवों में सर्वे कर सेक डाटा से वंचित पात्रों की सूची तैयार करने का निर्देश सभी ब्लाक अधिकारियों को दिया है।
छह सालों में गांवों की बदल चुकी हैं परिस्थितियां
बलिया। सामाजिक, आर्थिक व जातिगत गणना का कार्य वर्ष 2011 में किया गया था और भारत सरकार ने प्रधानमंत्री आवास के लिए इसी सूची को आधार बनाया है। बताया जाता है कि करीब छह साल पहले इस सूची को बनाने के लिए किए सर्वे के बाद गांवों में काफी परिस्थितियां बदल गई हैं।
इसके अलावा जिले में वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव के पूर्व हुए ग्राम पंचायतों के पुनगर्ठन के दौरान कुल 116 नई ग्राम पंचायतें बन गई। आलम यह है कि सेक डाटा में नई ग्राम पंचायतों का कहीं उल्लेख नहीं होने के कारण पात्रों का निर्धारण करना मुश्किल हो रहा है। सेक डाटा में पात्रों का नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुुरु होने से जिले के हजारों गरीबों को लाभ मिल सकेगा।
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सेक डाटा में वंचित पात्रों का नाम जोड़ने के लिए सर्वे कर सूची तैयार करने का निर्देश शासन से प्राप्त हो चुका है। इस बात कार्रवाई के लिए सभी ब्लाकों को निर्देश जारी कर दिया है। ब्लाकों से सूची प्राप्त होते ही शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। आरके त्रिपाठी, पीडी, डीआरडीए, बलिया
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वर्ष 2016-17 में भारत सरकार की ओर से सालों से चल रहे इंदिरा आवास योजना को बंद कर प्रधानमंत्री आवास का संचालन किया गया। इसके लिए सरकार की ओर से लाभार्थियों के चयन के लिए नई गाइड लाइन भी जारी किया गया। पीएम आवास के लाभार्थियों का चयन सेक डाटा से करने का निर्देश जारी कर संबंधित ब्लाकों के बीडीओ के लॉगिन पर सूची उपलब्ध कराया गया।
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यह भी व्यवस्था दी गई कि संबंधित गांवों की सूची का अनुमोदन ग्रामसभा की खुली बैठक में कराते हुए पात्रता तय की जाए और अपात्र पाए जाने पर सूची में अंकित अगले क्रम के लाभार्थी को आवास आवंटित किया जाए। हालांकि इसे लागू होने में काफी समय लगा और इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2015-16 के आवासों का चयन अभी भी जारी है।
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इस दौरान कमोवेश सभी गांवों के इस बात की शिकायत शासन को मिली कि पात्रों का चयन नहीं किया जा रहा है जबकि अपात्रों का चयन किया जा रहा है। इसकी पड़ताल करने पर सामने आया कि वर्ष 2011 में तैयार किए गए सेक डाटा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और गरीबों का नाम सूची से वंचित है।
सेक डाटा में पात्रों का नाम नहीं होने के कारण वह प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हो रहे थे। हालांकि यह मामला उच्च स्तर पर उठ चुका है और प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी सत्ता संभालने के बाद उठाया था। इसे देखते हुए शासन ने गांवों में रहने वाले वैसे पात्रों का नाम सेक डाटा में शामिल करने का निर्देश दिया है, जिनका नाम किन्हीं कारणों से सेक डाटा में नहीं है।
ग्राम्य विकास आयुक्त पार्थसारथी सेन शर्मा ने इस बाबत निर्देश जारी करते हुए ऐसे पात्रों का सर्वे कर 20 जुलाई तक सूची शासन को उपलब्ध कराने को कहा है। डीआरडीए के परियोजना निदेशक ने गांवों में सर्वे कर सेक डाटा से वंचित पात्रों की सूची तैयार करने का निर्देश सभी ब्लाक अधिकारियों को दिया है।
छह सालों में गांवों की बदल चुकी हैं परिस्थितियां
बलिया। सामाजिक, आर्थिक व जातिगत गणना का कार्य वर्ष 2011 में किया गया था और भारत सरकार ने प्रधानमंत्री आवास के लिए इसी सूची को आधार बनाया है। बताया जाता है कि करीब छह साल पहले इस सूची को बनाने के लिए किए सर्वे के बाद गांवों में काफी परिस्थितियां बदल गई हैं।
इसके अलावा जिले में वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव के पूर्व हुए ग्राम पंचायतों के पुनगर्ठन के दौरान कुल 116 नई ग्राम पंचायतें बन गई। आलम यह है कि सेक डाटा में नई ग्राम पंचायतों का कहीं उल्लेख नहीं होने के कारण पात्रों का निर्धारण करना मुश्किल हो रहा है। सेक डाटा में पात्रों का नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुुरु होने से जिले के हजारों गरीबों को लाभ मिल सकेगा।
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सेक डाटा में वंचित पात्रों का नाम जोड़ने के लिए सर्वे कर सूची तैयार करने का निर्देश शासन से प्राप्त हो चुका है। इस बात कार्रवाई के लिए सभी ब्लाकों को निर्देश जारी कर दिया है। ब्लाकों से सूची प्राप्त होते ही शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। आरके त्रिपाठी, पीडी, डीआरडीए, बलिया