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दोहरी शिक्षा नीति देश के लिए घातक : डा. संदीप

Fri, 03 Jul 2015 11:46 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया Updated Fri, 03 Jul 2015 11:46 PM IST
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The dual education policy fatal for the country : Dr . Sandeep
दोहरी शिक्षा नीति देश के लिए घातक है। जरूरी यह है कि शिक्षा नीति एक हो और सभी सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और राजनेताओं के बच्चे परिषदीय स्कूलों में पढ़ें। जिस दिन यह व्यवस्था लागू हो जाएगी उस दिन देश का विकास स्वत: होने लगेगा।
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पिछली यूपीए सरकार में शिक्षा गारंटी योजना के तहत 25 फीसदी गरीब छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने का बिल पारित किया था, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक लागू नहीं किया है। शिक्षा नीति की वजह से ही इरान जैसे देश में 99 प्रतिशत लोग साक्षर हैं,  जबकि हमारे देश में 65 फीसदी ही साक्षरता है। ये बातें मैगसायसाय पुरस्कार से सम्मानित डा. संदीप पांडेय ने जिले के सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान समारोह का संबोधित करते हुए कही।
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मुख्य अतिथि काबीना मंत्री रामगोविंद चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शरुआत की। 30 जून को सेवानिवृत्त हुए 226 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सम्मान में बेरूआरबारी बीआरसी परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षामंत्री ने दोहरी शिक्षा नीति को देश के विकास में बाधक बताया।
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केंद्रीय शिक्षा नीति पर प्रहार करते हुए सवाल दागा कि यह कहां का कानून है कि कक्षा 01 से 08 तक के बच्चों की न परीक्षा होगी न ही उन्हें फेल किया जाएगा। शिक्षकों को कर्तव्यबोध कराते हुए उन्होंने कहा कि बलिया की बेसिक शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है, जिसकी लौ लखनऊ तक पहुंच चुकी है।

आप गुरुजन ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाएं, ताकि देश के लिए बलिया की बेसिक शिक्षा रोल मॉडल बन जाए। कान्वेंट स्कूलों में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों के नामांकन व्यवस्था की चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा जिस दिन शिक्षक अपने कर्तव्य को समझ जाएंगे, उस दिन 25 प्रतिशत बच्चे कांवेंट स्कूलों में नहीं, बल्कि कांवेंट के बच्चे आपके स्कूल में दाखिला लेने आएंगे।

कहा कि गुरुजनों को कानून में बांधने की इच्छा नहीं है, कानून से ज्यादा जरूरी आत्मचिंतन है। जिस दिन शिक्षकों की आत्मा जागृत हो जाएगी, उसी दिन से हमारी व्यवस्था भी सुधरने लगेगी। बलिया के इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि  जब अपना जिला अंग्रेजों को खदेड़ने में सबसे आगे हो सकता है तो बुनियादी शिक्षा को बेहतर बनाने में क्यों नही। सेवानिवृत्त शिक्षकोें से आह्वान किया कि आप खुद को अवकाश प्राप्त न समझें। आप अपने गांव के आसपास के स्कूलों में जाएं और अपने अनुभवों को छात्रों और शिक्षकों में साझा करें।

समारोह में बीएसए ने सभी शिक्षकों को आश्वस्त किया कि आप अपनी समस्या से न घबरायें, आपकी एक-एक समस्याओं पर पैनी नजर रखी जा रही है। आप केवल पठन पाठन पर ध्यान दें। वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश
सिंह ने समारोह में आए अतिथियों व शिक्षकों के प्रति आभार जताया। प्राशिसं के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह व धर्मेन्द्र सिंह ने शिक्षामंत्री को चांदी के मुकुट से मसम्मानित किया।


इस मौके पर शिक्षकों के सभी देयकों का भुगतान एक साथ चेक के माध्यम से किया गया साथ ही सेवानिवृत्त हुए 226 शिक्षक एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। समारोह में रिटायर्ड शिक्षकों को काबीना मंत्री ने अंगवस्त्रम़ देकर कर सम्मानित किया।  इस मौके पर सपा युवजन सभा के प्रदेश सचिव धीरेन्द्र यादव, तेजप्रताप सिंह, डॉ.राजेश पाण्डेय, शैलेन्द्र यादव, संजय दूबे, मनोज यादव, सुनील सिंह, धमेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र यादव, अजय मिश्र, गुरूनाम सिंह, विनय पाण्डेय, अजय कुमार मिश्र, उपेंद्र सिंह, सुनील सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, रासबिहारी आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता महेन्द्र प्रताप शुक्ल व संचालन वृजमोहन ‘अनाड़ी‘ ने किया।

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