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शव आते ही शोक में डूबा गांव
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 22 Nov 2016 12:23 AM IST
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बांसडीह रोड थाने के बघौली गांव में ट्रेन हादसे में मृत राजमणि तिवारी का शव आने के बाद रोती-बिलखती परिवार की महिलाएं।
- फोटो : ballia
झांसी-कानपुर रेलखंड पर पुखराया स्टेशन के समीप रविवार की भोर में हुए भीषण रेल हादसे में जिले के तीन लोगों की जान चली गई। इनमें नगरा थाना क्षेत्र के ढेकवारी गांव निवासी मुन्ना राम (45), राजकिशोर (जिऊत) तथा बांसडीरोड थाना क्षेत्र के बघौली गांव निवासी राजमणि तिवारी (28) शामिल हैं। सोमवार को राजकिशोर और राजमणि का शव उनके घर पर पहुंचा तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
नगरा थाना क्षेत्र के ढेकवारी गांव के दलित परिवार के मुन्ना राम (45), राजकिशोर (जिऊत) (20) एवं मुकेश (18) इंदौर में किसी प्राइवेट कम्पनी में कार्य करते थे। मृतक मुन्ना राम की भतीजी सीमा की शादी 22 नवंबर को होनी सुनिश्चित थी।
इसी शादी में शिरकत करने के लिए तीनों लोग पटना-इंदौर एक्सप्रेस से घर आ रहे थे। चलते समय शायद राजकिशोर और मुन्ना ने यह नहीं सोचा होगा कि बीच रास्ते में भतीजी के शादी में शिरकत करने का उनकी हसरत पूरी नहीं हो पाएगी। मुन्ना और राज किशोर के ट्रेन हादसे में मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची रूदन-क्रंदन शुरू हो गया।
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प्रशासन ने सोमवार को राजकिशोर और राजमणि का शव गांव भेजवा दिया। जबकि मुन्ना का शव अभी कानपुर से नहीं चला है। राजकिशोर का शव गांव पहुंचते ही घर में रूद्रन-क्रंदन शुरू हो गया।
परिवार को रोते-बिलखते देख हर किसी के आंखों में आंसू आ जा रहा था। वहीं मौत की खबर सुन जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर पासवान सहित अन्य शुभचिंतक दरवाजे पर पहुंचे ढाढ़स बढ़ाते रहे।
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नगरा थाना क्षेत्र के ढेकवारी गांव के दलित परिवार के मुन्ना राम (45), राजकिशोर (जिऊत) (20) एवं मुकेश (18) इंदौर में किसी प्राइवेट कम्पनी में कार्य करते थे। मृतक मुन्ना राम की भतीजी सीमा की शादी 22 नवंबर को होनी सुनिश्चित थी।
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इसी शादी में शिरकत करने के लिए तीनों लोग पटना-इंदौर एक्सप्रेस से घर आ रहे थे। चलते समय शायद राजकिशोर और मुन्ना ने यह नहीं सोचा होगा कि बीच रास्ते में भतीजी के शादी में शिरकत करने का उनकी हसरत पूरी नहीं हो पाएगी। मुन्ना और राज किशोर के ट्रेन हादसे में मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची रूदन-क्रंदन शुरू हो गया।
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प्रशासन ने सोमवार को राजकिशोर और राजमणि का शव गांव भेजवा दिया। जबकि मुन्ना का शव अभी कानपुर से नहीं चला है। राजकिशोर का शव गांव पहुंचते ही घर में रूद्रन-क्रंदन शुरू हो गया।
परिवार को रोते-बिलखते देख हर किसी के आंखों में आंसू आ जा रहा था। वहीं मौत की खबर सुन जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर पासवान सहित अन्य शुभचिंतक दरवाजे पर पहुंचे ढाढ़स बढ़ाते रहे।