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Ballia News: बुखार, दस्त से पीड़ित हों या घायल, भेज रहे जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में रेफर मरीज को लेकर आईं एंबुलेंस। संवाद
- फोटो : संवाद
बलिया। जिला अस्पताल के इमरजेंसी में ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना 50 से 60 मरीज रेफर हो कर आते हैं। इसमें सबसे अधिक, सोनबरसा बैरिया, बांसडीह, सिकंदरपुर, सीयर, नरहीं सीएचसी के मरीज हैं। सबसे अधिक सोनबरसा से रोजाना 10 ये 15 मरीज रेफर होकर इलाज के लिए आते हैं।
इसमें उल्टी दस्त व सड़क दुर्घटना में चोटिल ज्यादा होते हैं, अगर इन्हें भर्ती कर इलाज किया जाता तो उन्हें जिला अस्पताल रेफर नहीं करना पड़ता।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1600 से दो हजार मरीज बेहतर इलाज कराने पहुंचते हैं।
इनमें 80 फीसदी से ऊपर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज होते हैं। सर्दी जुकाम, बुखार, पैर में दर्द, पेट में दर्द व डायरिया की शिकायत होती है। सीएचसी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियाें पर हर माह तीन से चार करोड़ से ऊपर वेतन पर खर्च होने के बावजूद सड़क दुर्घटना में चोटिल व उल्टी दस्त के मरीज़ों को भर्ती कर इलाज करने की जगह स्वास्थ्यकर्मी रेफर करने पर ज्यादा जोर देते हैं।
स्थिति ये है कि इमरजेंसी में 70 प्रतिशत मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से सिर्फ गैस, उल्टी दस्त व सड़क दुर्घटना में चोटिल पहुंचते हैं।
वह मरीज का इलाज करने की जगह प्राथमिक मरहम पट्टी कर वहां खड़ी एंबुलेंस से जिला अस्पताल को रेफर कर देते हैं। इस स्थिति के पीछे स्वास्थ्य विभाग 210 के सापेक्ष सिर्फ 85 चिकित्सकों की तैनाती होना भी एक वजह है।
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इसमें उल्टी दस्त व सड़क दुर्घटना में चोटिल ज्यादा होते हैं, अगर इन्हें भर्ती कर इलाज किया जाता तो उन्हें जिला अस्पताल रेफर नहीं करना पड़ता।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1600 से दो हजार मरीज बेहतर इलाज कराने पहुंचते हैं।
इनमें 80 फीसदी से ऊपर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज होते हैं। सर्दी जुकाम, बुखार, पैर में दर्द, पेट में दर्द व डायरिया की शिकायत होती है। सीएचसी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियाें पर हर माह तीन से चार करोड़ से ऊपर वेतन पर खर्च होने के बावजूद सड़क दुर्घटना में चोटिल व उल्टी दस्त के मरीज़ों को भर्ती कर इलाज करने की जगह स्वास्थ्यकर्मी रेफर करने पर ज्यादा जोर देते हैं।
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स्थिति ये है कि इमरजेंसी में 70 प्रतिशत मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से सिर्फ गैस, उल्टी दस्त व सड़क दुर्घटना में चोटिल पहुंचते हैं।
वह मरीज का इलाज करने की जगह प्राथमिक मरहम पट्टी कर वहां खड़ी एंबुलेंस से जिला अस्पताल को रेफर कर देते हैं। इस स्थिति के पीछे स्वास्थ्य विभाग 210 के सापेक्ष सिर्फ 85 चिकित्सकों की तैनाती होना भी एक वजह है।
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