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Ballia News: कहीं राम मनावन तो कहीं रावण उत्पात का मंचन
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प्राचीन आदर्श रामलीला समिति के तत्वाधान मे प्राचीन दुर्गा मंदिर परिसर में भरत मनावन लीला का मंच
बलिया। जनपद में रामलीला का मंचन शुरू हो चुका है। इसे देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रामलीला के दौरान प्रभु के जयकारे से माहौल भक्तिमय हो जा रहा है। कहीं राम मनावन तो कहीं रावण उत्पात का मंचन किया गया
इंदरपुर: प्राचीन आदर्श रामलीला समिति की ओर से दुर्गा मंदिर परिसर में बुधवार को कलाकारों ने चित्रकूट में भरत की ओर से राम के मनावन के प्रसंग का मंचन किया गया। भरत अपने गुरु, माता से मिल कर राम को मनाने के लिए चित्रकूट पहुंचे। भरत ने बार बार राम से अयोध्या वापस चलने का आग्रह किया लेकिन भगवान राम को दशरथ के वचन को पूरा करने के लिए अपने वनवास को जारी रखने का संकल्प दोहराया और अयोध्या जाने से इन्कार कर दिया। कलाकारों में दिव्यांश पाठक, अमित पाठक व संकल्प पाठक की भूमिका सराहनीय रही। संचालन रविप्रकाश पाठक, उमेश पाठक व पवन पाठक ने किया।
भीमपुरा : बरौली की ऐतिहासिक रामलीला के तीसरे दिन बृजेश सिंह के निर्देशन में रावण जन्म व रावण उत्पात का जीवंत मंचन किया गया। रावण, कुंभकर्ण और विभीषण राज्य में बैठे रहते हैं। अलकापुरी के राजा कुबेर से पुष्पक विमान को पाना चाहता है, लेकिन युद्ध में हार जाता है। पिता के कहने पर तपस्या करने लगता है। उसके बाद रावण को पुष्पक विमान मिल जाता है। रावण अहंकार में चूर हो जाता है। उसके उत्वात से साधु-संत और पृथ्वी लोक के लोग, देवता परेशान होकर भगवान शंकर पास जाते हैं। विजेंद्र सिंह,आकाश सिंह बघेल, टिंकू सिंह बघेल, आदि रहे।
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नगरा : जनता इंटर कॉलेज में सार्वजनिक रामलीला समिति की ओर से प्रभु श्रीराम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न के जन्म का मंचन किया गया। जन्म होते ही पूरी अयोध्या में खुशी का माहौल हो जाता है। प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए भगवान भोलेनाथ रूप बदलकर अयोध्या में आए। कार्यक्रम में राजेश गुप्ता, शशि प्रकाश कुशवाहा, हरेराम गुप्ता, निर्भय प्रकाश, बृजमोहन गुप्ता, रामायन ठाकुर, संजय सोनी, राजू चौहान उपस्थित रहे।
विशुनपुरा : हबसापुर रामलीला समिति की ओर से श्रीराम जन्म का मंचन हुआ। शुरुआत राजा दशरथ के अश्वमेध यज्ञ प्रसंग से हुई। अध्यक्ष चंद्रभान सिंह ने बताया कि रामलीला का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों को समाज में जीवित रखना है। शमशेर सिंह, रामायण सिंह, पुन्नू सिंह आदि रहे।
रसड़ा : छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध ऐतिहासिक रामलीला में बुधवार को भरत मनावन लीला का सजीव मंचन किया गया। अयोध्या में पहुंचने पर भरत को जब पता चलता है कि भगवान प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण व जानकी चौदह वर्ष के लिए वनवास चले गए तो रोने लगते हैँ। मनाने के लिए निकले भरत का जंगल में भगवान प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण व जानकी से मिलन होता है। श्रीराम अयोध्या चलने से इन्कार कर देते हैं। इससे पहले भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, महंत कौशलेंद्र गिरी, पूर्व नपाध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह और पूर्व प्रमुख अनिल सिंह ने शुभारंभ किया।
बेल्थरारोड : बीचला पोखरा स्थित रामलीला मंच पर अयोध्या धाम के कलाकारों ने अध्यक्ष राजेश वर्मा की देखरेख में नारद मोह का मंचन किया। कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद नारद को अहंकार हो गया था। नारद का अहंकार तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने मायानगरी का निर्माण करने के बाद विश्व मोहिनी का स्वयंवर रचा।
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इंदरपुर: प्राचीन आदर्श रामलीला समिति की ओर से दुर्गा मंदिर परिसर में बुधवार को कलाकारों ने चित्रकूट में भरत की ओर से राम के मनावन के प्रसंग का मंचन किया गया। भरत अपने गुरु, माता से मिल कर राम को मनाने के लिए चित्रकूट पहुंचे। भरत ने बार बार राम से अयोध्या वापस चलने का आग्रह किया लेकिन भगवान राम को दशरथ के वचन को पूरा करने के लिए अपने वनवास को जारी रखने का संकल्प दोहराया और अयोध्या जाने से इन्कार कर दिया। कलाकारों में दिव्यांश पाठक, अमित पाठक व संकल्प पाठक की भूमिका सराहनीय रही। संचालन रविप्रकाश पाठक, उमेश पाठक व पवन पाठक ने किया।
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भीमपुरा : बरौली की ऐतिहासिक रामलीला के तीसरे दिन बृजेश सिंह के निर्देशन में रावण जन्म व रावण उत्पात का जीवंत मंचन किया गया। रावण, कुंभकर्ण और विभीषण राज्य में बैठे रहते हैं। अलकापुरी के राजा कुबेर से पुष्पक विमान को पाना चाहता है, लेकिन युद्ध में हार जाता है। पिता के कहने पर तपस्या करने लगता है। उसके बाद रावण को पुष्पक विमान मिल जाता है। रावण अहंकार में चूर हो जाता है। उसके उत्वात से साधु-संत और पृथ्वी लोक के लोग, देवता परेशान होकर भगवान शंकर पास जाते हैं। विजेंद्र सिंह,आकाश सिंह बघेल, टिंकू सिंह बघेल, आदि रहे।
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नगरा : जनता इंटर कॉलेज में सार्वजनिक रामलीला समिति की ओर से प्रभु श्रीराम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न के जन्म का मंचन किया गया। जन्म होते ही पूरी अयोध्या में खुशी का माहौल हो जाता है। प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए भगवान भोलेनाथ रूप बदलकर अयोध्या में आए। कार्यक्रम में राजेश गुप्ता, शशि प्रकाश कुशवाहा, हरेराम गुप्ता, निर्भय प्रकाश, बृजमोहन गुप्ता, रामायन ठाकुर, संजय सोनी, राजू चौहान उपस्थित रहे।
विशुनपुरा : हबसापुर रामलीला समिति की ओर से श्रीराम जन्म का मंचन हुआ। शुरुआत राजा दशरथ के अश्वमेध यज्ञ प्रसंग से हुई। अध्यक्ष चंद्रभान सिंह ने बताया कि रामलीला का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों को समाज में जीवित रखना है। शमशेर सिंह, रामायण सिंह, पुन्नू सिंह आदि रहे।
रसड़ा : छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध ऐतिहासिक रामलीला में बुधवार को भरत मनावन लीला का सजीव मंचन किया गया। अयोध्या में पहुंचने पर भरत को जब पता चलता है कि भगवान प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण व जानकी चौदह वर्ष के लिए वनवास चले गए तो रोने लगते हैँ। मनाने के लिए निकले भरत का जंगल में भगवान प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण व जानकी से मिलन होता है। श्रीराम अयोध्या चलने से इन्कार कर देते हैं। इससे पहले भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, महंत कौशलेंद्र गिरी, पूर्व नपाध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह और पूर्व प्रमुख अनिल सिंह ने शुभारंभ किया।
बेल्थरारोड : बीचला पोखरा स्थित रामलीला मंच पर अयोध्या धाम के कलाकारों ने अध्यक्ष राजेश वर्मा की देखरेख में नारद मोह का मंचन किया। कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद नारद को अहंकार हो गया था। नारद का अहंकार तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने मायानगरी का निर्माण करने के बाद विश्व मोहिनी का स्वयंवर रचा।