फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Shere Ballia Chittu Pandey was made the collector today in 1942, declaration of independence was made

1942 में आज ही कलेक्टर बने थे शेरे बलिया चित्तू पांडेय, हुई थी आजादी क घोषणा

Tue, 18 Aug 2020 10:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2020 10:51 PM IST
विज्ञापन
Shere Ballia Chittu Pandey was made the collector today in 1942, declaration of independence was made
बलिया। उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर पर बसा बलिया जनपद, बलिया जंग-ए-आजादी का नायक रहा है। अगस्त क्रांति आंदोलन का पहला चरण नौ अगस्त 1942 को शुरू हुआ। 10 अगस्त को सुबह बलिया नगर के मध्य स्थित ओक्डेनगंज पुलिस चौकी से सटे पूरबी चौराहे पर गांधी जी की जय, भारत माता की जय तथा इंकलाब जिंदाबाद के नारे एकाएक गूंज उठे। 11 अगस्त को शहर में विद्यार्थियों ने जुलूस निकाला तथा चौक में सभा की। 12 अगस्त को क्रांतिकारियों ने जिले की संचार व्यवस्था छिन्न-भिन्न कर दी। 13 अगस्त को गुलामी की जंजीरों से आजाद होने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाएं भी कूद पड़ीं। 14 अगस्त को इस दिन शहर में प्राय: शांति रही, लेकिन जनपद के प्रमुख स्थानों पर विद्रोह ने उग्र रूप धारण कर लिया था। 15 अगस्त को रेवती में क्रांतिकारियों ने रेल लाइन उखाड़ने, जगह-जगह खाई खोदकर संपर्क मार्ग को बंद करने, एकजुटता प्रदर्शित करने के बाद रेवती को आजाद करा लिया। 16 व 17 अगस्त को भूपनारायण सिंह आदि की अगुवाई में भीड़ बैरिया थाने पर पहुंची। भीड़ को देख थानेदार काजिम हुसैन ने थाने पर तिरंगा फहरा कर जान बचाई। लेकिन रात में फोर्स बुलाकर फिर अंग्रेजी झंडा लगा दिया, तब 18 अगस्त को बैरिया थाने पर तिरंगा लहराने में 17 क्रांतिकारियों को जान गंवानी पड़ी। इसके बाद क्रांतिकारियों का आक्रोश ऐसा बढ़ा कि 19 अगस्त को जिला मुख्यालय पर क्रांति की ज्वाला धधक उठी। 19 अगस्त को लगभग 10 हजार लोग जेल के सामने एकत्र हुए और जेल में बंद चित्तू पांडेय की रिहाई की मांग करने लगे। तत्कालीन कलेक्टर का नियंत्रण प्रशासन पर नहीं रह गया था और उसे हार मानकर जेल के दरवाजे खोलने पड़े और वह चित्तू पांडेय से यह कहने को मजबूर हुआ कि पंडित जी अब आप ही इस भीड़ को संभालें और शांति व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी लें। इस तरह चित्तू पांडेय ने स्वाधीन बलिया की बागडोर संभाली और तीन दिनों के लिए बलिया स्वतंत्र हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed