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पुण्यतिथि: महाराजा रणजीत सिंह के दान से काशी में बना स्वर्ण मंदिर, शिखर पर आज भी है उनकी निशानी
Sun, 27 Jun 2021 02:47 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sun, 27 Jun 2021 02:47 PM IST
सार
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि वर्तमान मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा सन 1780 में करवाया गया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1853 में 22 मन शुद्ध सोने द्वारा शिखर को मंडित कराया और कलश स्थापित कराया।
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महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा
- फोटो : फाइल
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विस्तार
शेर-ए- पंजाब महाराजा रणजीत सिंह पंजाब के लोकजीवन और लोककथाओं में रचे बसे हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश का स्वर्ण मंदिर कहे जाने वाले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर को स्वर्णमंडित कराने में भी उनका उल्लेखनीय योगदान है।
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काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि वर्तमान मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा सन 1780 में करवाया गया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1853 में 22 मन शुद्ध सोने द्वारा शिखर को मंडित कराया और कलश स्थापित कराया।
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महाराजा रणजीत सिंह पंजाब के लोक जीवन और लोक कथाओं में इस कदर रच बस गए हैं कि उनके नाम को अलग करना दूध से पानी को निकालने जैसा है। ब्रिटिश इतिहासकार जेटी व्हीलर ने लिखा था कि महाराजा रणजीत सिंह अगर एक पीढ़ी पुराने होते तो पूरे हिंदुस्तान को ही फतह कर लेते। वह पढ़े लिखे नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में शिक्षा और कला को बहुत प्रोत्साहन दिया। उन्होंने पंजाब में कानून एवं व्यवस्था कायम की और कभी किसी को सजा ए मौत नहीं दी। वह सभी धर्मों का बराबर सम्मान करते थे।
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परिचय
- शासनावधि - 12 अप्रैल 1801 से 27 जून 1839
- राज्याभिषेक - 12 अप्रैल 1801, लाहौर किले में
- जन्म- 13 नवंबर 1780 गुजरांवाला, सुकरचकिया मिस्ल
- निधन- 27 जून 1839 (उम्र 58) लाहौर, पंजाब, सिख साम्राज्य (आज के पाकिस्तान में)
- समाधि-अस्थि अवशेष लाहौर में सुरक्षित