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Ballia News: बलिया में काम न आई शाह की रणनीति, मुरझा गया कमल

Thu, 06 Jun 2024 02:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jun 2024 02:22 AM IST
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Shah's strategy did not work in Ballia, lotus withered
पूर्वांचल की हाॅट सीटों में शुमार बलिया संसदीय सीट पर सपा के सनातन पांडेय जीत दर्ज कर न सिर्फ इतिहास कायम किया है बल्कि भाजपा की हैट्रिक भी रोकी है। इस सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें सपा के सनातन पांडेय ने 43384 वोटों से हराया।
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जबकि चुनाव से तीन दिन पहले सपा के कद्दावर नेता रहे नारद राय को भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी में शामिल भी कराया था, बावजूद इसके भाजपा यहां कमल मुरझा गया।
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खास बात यह रही कि हमेशा से भाजपा के साथ रहे ब्राह्मण, भूमिहार एवं अन्य पिछड़ी जातियों की सपा को जीत दिलाने में मुख्य भूमिका रही। स्थानीय मुद्दों के आधार पर पिछड़े एवं अल्पसंख्यक मतदाताओं के साथ ही ब्राह्मण भूमिहार व वैश्य मतदाताओं ने सपा का साथ दिया है। बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर युवा एवं किसान भी सपा के पक्ष में लामबंद हुए।
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हालांकि चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने हैट्रिक बनाने के लिए खूब माहौल बनाया। पड़ोसी जनपद गाजीपुर में मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को सपा से टिकट दिए जाने पर बलिया लोकसभा में भी सपा के प्रति लोगों में नफरत पैदा करने की कोशिश की। लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ, बल्कि सपा उम्मीदवार सनातन पांडेय के प्रति लोगों की सहानुभूति बढ़ती गई।
जबकि भाजपा ने अपने वर्तमान सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त का टिकट काटकर राज्यसभा सांसद नीरज शेखर को पार्टी से टिकट दिया था ताकि एंटी इनकमबेंसी फैक्टर को कम किया जा सकें, लेकिन सारी कवायद फेल रही।
विशेषज्ञों की मानें तो भाजपा से नीरज शेखर के उम्मीदवार बनते ही राजनीतिक समीकरण फिट नहीं बैठा। पार्टी में अंदरूनी खींचतान भी चलती रही। इसे समय रहते नीरज शेखर ठीक नहीं कर पाए। हालांकि इसे सुधारने के लिए भाजपा के दिग्गज नेताओं ने नामांकन से लेकर चुनाव के अंतिम समय तक कोशिश की। इस बीच गृहमंत्री अमित शाह का लगातार दो दिन कार्यक्रम भी बलिया में लगाया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अलग-अलग विधानसभाओं में जनसभा को संबोधित किए। उपमुख्यमंत्री सहित गैर प्रांतों के मुख्यमंत्री एवं अन्य बड़े नेताओं के कार्यक्रम निरंतर चलते रहे। बलिया के मतदाताओं का मूड परिवर्तित करने के लिए सबने पूरी ताकत झोंकी। लेकिन इसे वोटरों ने सिरे से नकार दिया।

बता दें कि आजादी के बाद पहली बार इस सीट पर किसी ब्राह्मण उम्मीदवार ने जीत हासिल की है। जबकि इसकी गिनती ब्राह्मण बहुल सीटों में होती है और यहां ब्राह्मण बिरादरी के वोटरों की आबादी 15 फीसदी से अधिक है।
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