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सामुदायिक शौचालयों के संचालन के लिए स्वयं सहायता समूहों का चयन नहीं
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बलिया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालयों का निर्माण भी अब बेमानी साबित हो रहा है। जिले में 229 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है लेकिन इसके संचालन को महिला स्वयं सहायता समूह का चयन नहीं हो सका है। इसके चलते शौचालयों पर ताले लटके हुए हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब 19 माह पहले सरकार ने व्यक्तिगत शौचालय निर्माण को स्थगित करते हुए गांवों में सामुदायिक शौचालय के निर्माण का निर्देश दिया। मकसद था कि जिन ग्रामीणों के पास शौचालय की सुविधा नहीं है वह खुले में न जाकर सामुदायिक शौचालय का प्रयोग करें। इसके निर्माण के लिए राज्य वित्त, केंद्र वित्त तथा मनरेगा से धनराशि निर्धारित की गई। योजना के तहत 122 गांवों में जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण कुल 818 गांवों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का कार्य शुरु कराया गया। अब तक कुल 755 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है। लेकिन इसके संचालन को लेकर विभाग अभी भी उदासीन बना हुआ है। बताया जाता है 100 से अधिक सामुदायिक शौचालय तो महीनों से बनकर तैयार हैं लेकिन इसके संचालन को महिला स्वयं समूह का चयन नहीं हो सका है। बताया जाता है कि ग्राम पंचायतों में इसके संचालन के लिए महिला स्वयं समूह के चयन को लेकर खींचतान के कारण यह अधर में लटका है। आंकड़ों को देखें तो अब तक केवल 526 सामुदायिक शौचालयों को ही महिला स्वयं समूह को हैंडओवर किया जा सका है।
सामुदायिक शौचालयों के संचालन को लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सभी शौचालयों को हैंडओवर किया जाएगा। -इसरार अहमद, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब 19 माह पहले सरकार ने व्यक्तिगत शौचालय निर्माण को स्थगित करते हुए गांवों में सामुदायिक शौचालय के निर्माण का निर्देश दिया। मकसद था कि जिन ग्रामीणों के पास शौचालय की सुविधा नहीं है वह खुले में न जाकर सामुदायिक शौचालय का प्रयोग करें। इसके निर्माण के लिए राज्य वित्त, केंद्र वित्त तथा मनरेगा से धनराशि निर्धारित की गई। योजना के तहत 122 गांवों में जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण कुल 818 गांवों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का कार्य शुरु कराया गया। अब तक कुल 755 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है। लेकिन इसके संचालन को लेकर विभाग अभी भी उदासीन बना हुआ है। बताया जाता है 100 से अधिक सामुदायिक शौचालय तो महीनों से बनकर तैयार हैं लेकिन इसके संचालन को महिला स्वयं समूह का चयन नहीं हो सका है। बताया जाता है कि ग्राम पंचायतों में इसके संचालन के लिए महिला स्वयं समूह के चयन को लेकर खींचतान के कारण यह अधर में लटका है। आंकड़ों को देखें तो अब तक केवल 526 सामुदायिक शौचालयों को ही महिला स्वयं समूह को हैंडओवर किया जा सका है।
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सामुदायिक शौचालयों के संचालन को लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सभी शौचालयों को हैंडओवर किया जाएगा। -इसरार अहमद, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन
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