{"_id":"5ab295744f1c1bbf758b6aba","slug":"secretary-and-accountant-guilty-in-investigation","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच में सचिव आैर लेखाकार दोषी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जांच में सचिव आैर लेखाकार दोषी
ballia
Updated Wed, 21 Mar 2018 10:55 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्य विकास अधिकारी ने हाईकोर्ट के निर्देश पर नवानगर ब्लॉक के कठौड़ा गांव के पीएम आवास व शौचालयों की जांच अलग-अलग अधिकारियों से कराई। जांच अधिकारी ने आवास आवंटन में जहां ग्राम पंचायत सचिव व ब्लॉक के सहायक लेखाकार को दोषी माना वहीं शौचालय निर्माण में गड़बड़ी के लिए ग्राम पंचायत सचिव को दोषी है। इन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी को निर्देश दिया है।
बताया जाता है कि नवानगर ब्लॉक के कठौड़ा गांव निवासी केके राय ने आठ माह पहले अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर बताया कि गांव में वर्ष 2015-16 में आवास आवंटन व शौचालयों के निर्माण में धांधली की गई है। जब महीनों बाद भी अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं तो राय ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई।
कोर्ट ने 13 सितंबर 17 को इस मामले में जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीडीओ संतोष कुमार ने प्रधानमंत्री आवास आवंटन की जांच के लिए जिला विकास अधिकारी व शौचालय निर्माण की जांच के लिए लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता व नवानगर ब्लॉक के एडीओ पंचायत की टीम बनाई। डीडीओ ने आवास निर्माण की जांच में पाया कि सोनामती पत्नी जंग बहादुर का आवास गलत खाता नंबर फ्रीज होने के कारण स्वीकृत नहीं हो सका और इसके लिए ग्राम विकास अधिकारी राजभुवन प्रसाद दोषी हैं।
विज्ञापन
इसी तरह शिवजी पुत्र गोपीचंद की आईडी पर अपात्र व्यक्ति को आवास आवंटित किया गया। ललिता पत्नी बैकुंठ के आवास आवंटन की जांच में डीडीओ ने पाया कि बैकुंठ पुत्र बुधन को वर्ष 2003-04 में आवास के लिए धनराशि जारी की गई है और वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास आवंटित किया गया है और पहली किश्त भी 40 हजार दी गई है। फूलमती पत्नी श्रीराम के आवास आवंटन के मामले में पता चला कि श्रीराम को वर्ष 2001-02 में आवास स्तरोन्नयन की धनराशि दी गई है और वर्ष 2013-14 में पत्नी के नाम से आवास आवंटित किया गया है।
डीडीओ इस धांधली के लिए पंचायत सचिव राजभुवन प्रसाद व ब्लॉक के सहायक लेखाकार माजिद अली को दोषी माना।
उधर, वर्ष 2015-16 के शौचालयों की जांच में जांच अधिकारियों ने पाया कि कुछ शौचालयों की गुणवत्ता सामान्य कोटि की है तो कुछ में दरवाजा और छत तक नहीं बने हैं। इसके लिए पंचायत सचिव राजभुवन प्रसाद को दोषी माना गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
बताया जाता है कि नवानगर ब्लॉक के कठौड़ा गांव निवासी केके राय ने आठ माह पहले अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर बताया कि गांव में वर्ष 2015-16 में आवास आवंटन व शौचालयों के निर्माण में धांधली की गई है। जब महीनों बाद भी अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं तो राय ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई।
विज्ञापन
कोर्ट ने 13 सितंबर 17 को इस मामले में जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीडीओ संतोष कुमार ने प्रधानमंत्री आवास आवंटन की जांच के लिए जिला विकास अधिकारी व शौचालय निर्माण की जांच के लिए लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता व नवानगर ब्लॉक के एडीओ पंचायत की टीम बनाई। डीडीओ ने आवास निर्माण की जांच में पाया कि सोनामती पत्नी जंग बहादुर का आवास गलत खाता नंबर फ्रीज होने के कारण स्वीकृत नहीं हो सका और इसके लिए ग्राम विकास अधिकारी राजभुवन प्रसाद दोषी हैं।
विज्ञापन
इसी तरह शिवजी पुत्र गोपीचंद की आईडी पर अपात्र व्यक्ति को आवास आवंटित किया गया। ललिता पत्नी बैकुंठ के आवास आवंटन की जांच में डीडीओ ने पाया कि बैकुंठ पुत्र बुधन को वर्ष 2003-04 में आवास के लिए धनराशि जारी की गई है और वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास आवंटित किया गया है और पहली किश्त भी 40 हजार दी गई है। फूलमती पत्नी श्रीराम के आवास आवंटन के मामले में पता चला कि श्रीराम को वर्ष 2001-02 में आवास स्तरोन्नयन की धनराशि दी गई है और वर्ष 2013-14 में पत्नी के नाम से आवास आवंटित किया गया है।
डीडीओ इस धांधली के लिए पंचायत सचिव राजभुवन प्रसाद व ब्लॉक के सहायक लेखाकार माजिद अली को दोषी माना।
उधर, वर्ष 2015-16 के शौचालयों की जांच में जांच अधिकारियों ने पाया कि कुछ शौचालयों की गुणवत्ता सामान्य कोटि की है तो कुछ में दरवाजा और छत तक नहीं बने हैं। इसके लिए पंचायत सचिव राजभुवन प्रसाद को दोषी माना गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।