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Ballia News: बिना मान्यता धड़ल्ले से चल रहे स्कूल, जिम्मेदार मौन
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बलिया। जिले में मान्यता विहीन स्कूलों की भरमार है। नर्सरी से लेकर हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई इन स्कूलों में कराई जा रही है। अध्ययनरत विद्यार्थियों का पंजीकरण सेटिंग से मान्यता प्राप्त स्कूलों से कराया जा रहा है। इस साल विभाग ने करीब 126 गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को चिह्नित कराया था। मगर नौ स्कूलों पर ही अब तक कार्रवाई की गई। जिनमें सात स्कूलों के खिलाफ मनियर बीईओ ने नोटिस जारी किया है। जबकि बिना मान्यता के संचालित दो स्कूलों के खिलाफ विभाग द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
योजना थी कि वर्तमान सत्र में मान्यता विहीन स्कूलों को नहीं चलने दिया जाएगा। इसके लिए इन विद्यालयों की सूची तैयार की गई है। प्रशासन अधिकारियों की सख्ती के बाद विभाग ने जुलाई में अभियान भी चलाया। ताबड़तोड़ सात विद्यालयों को नोटिस जारी कर दो विद्यालय संचालकों पर एफआईआर करा दिया गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई से हाथ खींच लिया। माहौल शांत हुआ तो तालाबंदी वाले विद्यालयों में से कुछ ने पढ़ाई शुरू करा दी है। इसके अलावा कार्रवाई से वंचित 117 स्कूल बेधड़क चल रहे हैं। विभाग ने चुप्पी साध ली है। जबकि मान्यता विहीन स्कूलों को बंद कराने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों के अलावा खंड शिक्षाधिकारियों को दायित्व सौंपा गया है।
मान्यता देने में बड़ा खेल
निजी स्कूलों की मान्यता में भी बड़ा खेल है। ऑनलाइन आवेदन के बाद सेटिंग का खेल शुरू होता है।जिम्मेदारों तक गहरी पैठ बनाकर चढ़ावा चढ़ाने में सफल होने वाला ही मान्यता की बाजी मारता है। वरना आवेदन रद्द हो जाता है। यह पुरानी परंपरा बरकरार है। चढ़ावा न चढ़ाने पर नियमों के मकड़जाल में संचालकों को उलझा दिया जाता है। वर्तमान सत्र में मान्यता के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से अभी बीईओ के निरीक्षण से आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी है। जबकि 100 से अधिक आवेदन हुए हैं। जानकारों की मानें तो जब सत्र समाप्ति के करीब होता है, तभी मान्यता की कुछ फाइलों पर अनुमोदन दिया जाता है।
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सांठगांठ से चल रहे स्कूल
आरोप है कि नर्सरी से जूनियर या हाईस्कूल से इंटरमीडिएट तक के बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों की विभागीय जिम्मेदारों से सांठगांठ रहती है। उनके बगैर मौन सहमति के यह विद्यालय नहीं चलाए जा सकते हैं। विद्यालय चलाने के लिए संचालकों को बाकायदे जिम्मेदारों तक चढ़ावा भी चढ़ाना पड़ रहा है।
बिना मान्यता के संचालित स्कूलों का निरीक्षण कर बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही कार्रवाई शुरू होगी। जहां तक मान्यता देने की बात है तो निचले स्तर से रिपोर्ट आने के बाद ही कमेटी बैठती है। मानक के अनुरूप पाए जाने पर विद्यालयों को मान्यता दी जाती है।
- मनीष सिंह, बीएसए
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योजना थी कि वर्तमान सत्र में मान्यता विहीन स्कूलों को नहीं चलने दिया जाएगा। इसके लिए इन विद्यालयों की सूची तैयार की गई है। प्रशासन अधिकारियों की सख्ती के बाद विभाग ने जुलाई में अभियान भी चलाया। ताबड़तोड़ सात विद्यालयों को नोटिस जारी कर दो विद्यालय संचालकों पर एफआईआर करा दिया गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई से हाथ खींच लिया। माहौल शांत हुआ तो तालाबंदी वाले विद्यालयों में से कुछ ने पढ़ाई शुरू करा दी है। इसके अलावा कार्रवाई से वंचित 117 स्कूल बेधड़क चल रहे हैं। विभाग ने चुप्पी साध ली है। जबकि मान्यता विहीन स्कूलों को बंद कराने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों के अलावा खंड शिक्षाधिकारियों को दायित्व सौंपा गया है।
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मान्यता देने में बड़ा खेल
निजी स्कूलों की मान्यता में भी बड़ा खेल है। ऑनलाइन आवेदन के बाद सेटिंग का खेल शुरू होता है।जिम्मेदारों तक गहरी पैठ बनाकर चढ़ावा चढ़ाने में सफल होने वाला ही मान्यता की बाजी मारता है। वरना आवेदन रद्द हो जाता है। यह पुरानी परंपरा बरकरार है। चढ़ावा न चढ़ाने पर नियमों के मकड़जाल में संचालकों को उलझा दिया जाता है। वर्तमान सत्र में मान्यता के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से अभी बीईओ के निरीक्षण से आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी है। जबकि 100 से अधिक आवेदन हुए हैं। जानकारों की मानें तो जब सत्र समाप्ति के करीब होता है, तभी मान्यता की कुछ फाइलों पर अनुमोदन दिया जाता है।
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सांठगांठ से चल रहे स्कूल
आरोप है कि नर्सरी से जूनियर या हाईस्कूल से इंटरमीडिएट तक के बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों की विभागीय जिम्मेदारों से सांठगांठ रहती है। उनके बगैर मौन सहमति के यह विद्यालय नहीं चलाए जा सकते हैं। विद्यालय चलाने के लिए संचालकों को बाकायदे जिम्मेदारों तक चढ़ावा भी चढ़ाना पड़ रहा है।
बिना मान्यता के संचालित स्कूलों का निरीक्षण कर बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही कार्रवाई शुरू होगी। जहां तक मान्यता देने की बात है तो निचले स्तर से रिपोर्ट आने के बाद ही कमेटी बैठती है। मानक के अनुरूप पाए जाने पर विद्यालयों को मान्यता दी जाती है।
- मनीष सिंह, बीएसए