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सरयू का पानी हुआ कम, कटान तेज
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सरयू का पानी हुआ कम, कटान तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
बेल्थरारोड। पिछले कई दिनों से सरयू नदी के जलस्तर में कमी का सिलसिला जारी रहने के बाद बीते मंगलवार की शाम नदी का पानी खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया। जिससे तटवर्ती दर्जनों ग्रामों के हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है। इससे बाढ़ की संभावना फिलहाल खत्म हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार की शाम जलस्तर 63.90 मीटर दर्ज किया गया। जबकि खतरे का निशान 64.01 मीटर है। दूसरी ओर जलस्तर कम होने से कटाने तेज हो गया है।
नदी का पानी लाल निशान से नीचे चले जाने के बावजूद तटवर्ती क्षेत्रों में लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नदी के वेगवती की लहरें तटवर्ती क्षेत्रों में पहुंच रही हैं। जिससे कटान की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इसके साथ ही नदी के उस पार देवरिया जिले में बने कटान रोधी ठोकर से टकराने के बाद नदी की जलधारा हवा के सहारे सीधे मुड़ते हुए बलिया जिले के तटवर्ती क्षेत्रों में पहुंचती है। जिससे कट-कट कर कृषि योग्य भूमि नदी में समाहित हो रही है। तेजी से हो रहे कटान के चलते तटवर्ती बाशिंदों में खलबली मची हुई है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य अहमद कमाल लड्डन ने तटवर्ती क्षेत्रों में कटानरोधी ठोकर बनाने की मांग की, ताकि कटान से मुक्ति मिल सके। लड्डन ने बताया कि पिछले एक दशक के दौरान कटान के चलते हजारों एकड़ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बेल्थरारोड। पिछले कई दिनों से सरयू नदी के जलस्तर में कमी का सिलसिला जारी रहने के बाद बीते मंगलवार की शाम नदी का पानी खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया। जिससे तटवर्ती दर्जनों ग्रामों के हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है। इससे बाढ़ की संभावना फिलहाल खत्म हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार की शाम जलस्तर 63.90 मीटर दर्ज किया गया। जबकि खतरे का निशान 64.01 मीटर है। दूसरी ओर जलस्तर कम होने से कटाने तेज हो गया है।
नदी का पानी लाल निशान से नीचे चले जाने के बावजूद तटवर्ती क्षेत्रों में लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नदी के वेगवती की लहरें तटवर्ती क्षेत्रों में पहुंच रही हैं। जिससे कटान की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इसके साथ ही नदी के उस पार देवरिया जिले में बने कटान रोधी ठोकर से टकराने के बाद नदी की जलधारा हवा के सहारे सीधे मुड़ते हुए बलिया जिले के तटवर्ती क्षेत्रों में पहुंचती है। जिससे कट-कट कर कृषि योग्य भूमि नदी में समाहित हो रही है। तेजी से हो रहे कटान के चलते तटवर्ती बाशिंदों में खलबली मची हुई है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य अहमद कमाल लड्डन ने तटवर्ती क्षेत्रों में कटानरोधी ठोकर बनाने की मांग की, ताकि कटान से मुक्ति मिल सके। लड्डन ने बताया कि पिछले एक दशक के दौरान कटान के चलते हजारों एकड़ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है।
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