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Ballia News: बलिया के सत्तू बिक्री डाकघर में शुरू
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पीएमजी (पोस्टमास्टर जर्नल) कर्नल विनोद कुमार ने वाराणसी कैंट प्रधान डाकघर में बलिया के सत्तू की बिक्री की शुरुआत की।
बनारस परिक्षेत्र के अंतर्गत बलिया के सत्तू का विक्रय पहली बार किया जा रहा है। इसके लिए कोई भी व्यक्ति वाराणसी के डाकघरों से सत्तू के आधा किलो का पैकेट 75 रुपये खरीद सकता है।
कर्नल विनोद ने बताया कि इस सेवा से भारतीय डाक विभाग को अच्छा रेवेन्यू प्राप्त होने की उम्मीद है। सत्तू बलिया से सीधे डाकघरों तक पहुंचाया जाएगा और उपभोक्ता को उचित दर पर उपलब्ध होगा।
स्वदेशी उत्पादों के प्रोत्साहन और ओडीओपी को ध्यान में रखते हुए सत्तू की बिक्री के लिए वाराणसी परिक्षेत्र में 100 डाकघरों में ये सेवा शुरू की गई है। सफल होने पर इसका विस्तार उत्तर प्रदेश के सभी डाकघरों में किया जाएगा। फिलहाल बनारस के साथ साथ चंदौली, मुगलसराय, जौनपुर, बलिया, नौगढ़ और गाज़ीपुर में भी सत्तू बिक्री की व्यवस्था की गई है।
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सहायक निदेशक परमानंद ने कहा कि सत्तू बिक्री के आने से स्टाफ के लिए भी फ़ायदा होगा, क्योंकि उनको इसकी खरीद के लिए कहीं और नहीं जाना होगा।
डाकघर से सत्तू बिक्री शुरू करने पर आयोजित कार्यक्रम में निधि उद्योग के प्रतिनिधि सौरभ ने बताया कि बलिया के सत्तू को छोटे चने से बनाया जाता है जो मलाई चने के नाम से मशहूर है।
कार्यक्रम के बाद पहले ग्राहक के रूप में कर्नल विनोद ने सत्तू का पहला पैकेट खरीदा और उनके साथ ही डाकघर में मौजूद जनता ने सत्तू के पैकेट विक्रय करने शुरू किए।
अधीक्षक बलिया हेमंत, वाराणसी वेस्ट अधीक्षक सुरेश ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
20 अगस्त 1942 में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में बलिया ने अपने को आज़ाद घोषित कर दिया था।
इस तरह से सत्तू की पोस्ट ऑफिस में बिक्री एक ऐतिहासिक दिन पर शुरू हुई है। योजना के पहले ही दिन 2500 से अधिक सत्तू पैकेट की बिक्री हुई।
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बनारस परिक्षेत्र के अंतर्गत बलिया के सत्तू का विक्रय पहली बार किया जा रहा है। इसके लिए कोई भी व्यक्ति वाराणसी के डाकघरों से सत्तू के आधा किलो का पैकेट 75 रुपये खरीद सकता है।
कर्नल विनोद ने बताया कि इस सेवा से भारतीय डाक विभाग को अच्छा रेवेन्यू प्राप्त होने की उम्मीद है। सत्तू बलिया से सीधे डाकघरों तक पहुंचाया जाएगा और उपभोक्ता को उचित दर पर उपलब्ध होगा।
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स्वदेशी उत्पादों के प्रोत्साहन और ओडीओपी को ध्यान में रखते हुए सत्तू की बिक्री के लिए वाराणसी परिक्षेत्र में 100 डाकघरों में ये सेवा शुरू की गई है। सफल होने पर इसका विस्तार उत्तर प्रदेश के सभी डाकघरों में किया जाएगा। फिलहाल बनारस के साथ साथ चंदौली, मुगलसराय, जौनपुर, बलिया, नौगढ़ और गाज़ीपुर में भी सत्तू बिक्री की व्यवस्था की गई है।
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सहायक निदेशक परमानंद ने कहा कि सत्तू बिक्री के आने से स्टाफ के लिए भी फ़ायदा होगा, क्योंकि उनको इसकी खरीद के लिए कहीं और नहीं जाना होगा।
डाकघर से सत्तू बिक्री शुरू करने पर आयोजित कार्यक्रम में निधि उद्योग के प्रतिनिधि सौरभ ने बताया कि बलिया के सत्तू को छोटे चने से बनाया जाता है जो मलाई चने के नाम से मशहूर है।
कार्यक्रम के बाद पहले ग्राहक के रूप में कर्नल विनोद ने सत्तू का पहला पैकेट खरीदा और उनके साथ ही डाकघर में मौजूद जनता ने सत्तू के पैकेट विक्रय करने शुरू किए।
अधीक्षक बलिया हेमंत, वाराणसी वेस्ट अधीक्षक सुरेश ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
20 अगस्त 1942 में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में बलिया ने अपने को आज़ाद घोषित कर दिया था।
इस तरह से सत्तू की पोस्ट ऑफिस में बिक्री एक ऐतिहासिक दिन पर शुरू हुई है। योजना के पहले ही दिन 2500 से अधिक सत्तू पैकेट की बिक्री हुई।