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जान जोखिम में डालकर नाला पार करते हैं ग्रामीण
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Sun, 08 Feb 2015 10:34 PM IST
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विकास खंड दुबहर के सेमरी और छाता गांव के सैकड़ों किसान आज के आधुनिक युग में भी अपनी जान को जोखिम में डालकर जलकुंभी की नाव बनाकर यमुना डेनिंग नाला पार करते हैं।
किसानों को खेती करने के लिए उस पार जाना पड़ता है। कम दूरी नापने के चक्कर में वे अपनी जान की भी परवाह नहीं करते। किसानों का कहना है कि सेमरी और छाता दोनों स्थानाें पर पुलिया का निर्माण हो जाय तो हमलोगों को इस समस्या से निजात मिल जाएगी।
क्षेत्र के सेमरी व छाता गांव के उत्तर दिशा में यमुना डेनिंग नाला है। जिसके उस पार सैकड़ों एकड़ खेत है। जहां सैकड़ों किसान अपनी खेती करने के लिए जलकुम्भी की नाव बनाकर उस पार जाते हैं।
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जबकि उस पार जाने के लिए गांव के पूरब लगभग तीन सौ मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। कम दूरी नापने की चक्कर में वह जलकुंभी के नाव का सहारा लेते हैं।
किसानों की माने तो गांव के पूरब स्थित रोड से खेत जाने में करीब पौन घंटे लग जाते हैं। जबकि जलकुम्भी नाव से पार कर जाने में मात्र पांच से सात मिनट लगता है। दो दशक से अधिक समय से यहां के ग्रामीण ऐसी नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं।
किसानों ने बताया कि हम लोग इसी से पशुओं के लिए चारा भी लाते हैं। जलकुंभी जल के ऊपर तैरता है, इसलिए उसकी नाव बनाकर आते-जाते हंै।
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किसानों को खेती करने के लिए उस पार जाना पड़ता है। कम दूरी नापने के चक्कर में वे अपनी जान की भी परवाह नहीं करते। किसानों का कहना है कि सेमरी और छाता दोनों स्थानाें पर पुलिया का निर्माण हो जाय तो हमलोगों को इस समस्या से निजात मिल जाएगी।
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क्षेत्र के सेमरी व छाता गांव के उत्तर दिशा में यमुना डेनिंग नाला है। जिसके उस पार सैकड़ों एकड़ खेत है। जहां सैकड़ों किसान अपनी खेती करने के लिए जलकुम्भी की नाव बनाकर उस पार जाते हैं।
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जबकि उस पार जाने के लिए गांव के पूरब लगभग तीन सौ मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। कम दूरी नापने की चक्कर में वह जलकुंभी के नाव का सहारा लेते हैं।
किसानों की माने तो गांव के पूरब स्थित रोड से खेत जाने में करीब पौन घंटे लग जाते हैं। जबकि जलकुम्भी नाव से पार कर जाने में मात्र पांच से सात मिनट लगता है। दो दशक से अधिक समय से यहां के ग्रामीण ऐसी नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं।
किसानों ने बताया कि हम लोग इसी से पशुओं के लिए चारा भी लाते हैं। जलकुंभी जल के ऊपर तैरता है, इसलिए उसकी नाव बनाकर आते-जाते हंै।