बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के सभागार में रविवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की ओर से उनकी जयंती मनाई गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की प्रासंगिकता पर गोष्ठी हुई। आरएसएस गोरक्षप्रांत के प्रांत प्रचारक सुभाष मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने पं. दीनदयाल के व्यक्तित्व और कृतित्व का वर्णन किया।
संघ के माध्यम से ही उपाध्याय जी राजनीति में आए। सन 1950 में जब उन्होंने देखा कि देश शाश्वत और चिरंतन राष्ट्रीय धारा से विचलित हो रहा है तो वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारतीय आदर्शों पर आधारित पृथक राजनीतिक संगठन बनाने में सहयोग देने को तैयार हो गए थे। पं. दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता थे। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय ने कहा कि अमृत महोत्सव के अवसर पर भारत को भी जानने की आवश्यकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से पं. दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। अनुसूचित बस्ती में चलने वाली संस्कारशाला के माध्यम से निर्धन बच्चों को पढाने वाली पूजा, गुडि़या व नेहा को तथा दो दिन पूर्व कराई गई सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त बच्चों को पुरस्कृत किया गया। संचालन शोधपीठ के निदेशक डॉ. रामकृष्ण उपाध्याय ने किया। मौक पर भृगु जी, डॉ. विनोद, परमेश्वरनश्री, विनय, संजय शुक्ल, तुलसीराम, चंद्रशेखर पांडेय आदि रहे।