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प्रतिमाह वेतन में एक करोड़ खर्च, फिर भी नहीं मिल रहा इलाज
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बैरिया। सरकार की उपेक्षात्मक रवैये के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा बदहाली के कगार पर है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अस्पताल में हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये वेतन के मद में खर्च होता है। बावजूद इसके, ओपीडी को चलाने के लिए भी यहां चिकित्सक मौजूद नहीं है। महिला अस्पताल पर ताला लटका हुआ है। गर्भवती महिलाएं मजबूरी में प्राइवेट नर्सिगिं होम में जा रही हैं, जहां उनका शोषण आम बात है।
सोनबरसा अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशीष श्रीवास्तव लंबी छुट्टी पर हैं। डॉ. विजय यादव बलिया जिला मुख्यालय से अटैच हैं। डॉ. शैलेंद्र राव वीआईपी ड्यूटी में है। डॉ. नवीन सिंह का यहां से काफी दिन पहले मऊ के लिए स्थानांतरण हो चुका है। ऐसे में रोगियों के हो-हल्ला करने पर कभी संविदा के डॉक्टर एक दिन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोटवा से भेजे जाते हैं। कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरली छपरा के प्रभारी चिकित्साधिकारी को यहां ओपीडी चलाने के लिए भेजा जा रहा है। ऐसे में करोड़ों की अत्याधुनिक मशीनें, दवाइयों से भरा गोदाम, 90 लाख रुपये की लागत से बना ऑक्सीजन प्लांट सब कुछ निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त बार-बार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यहां के लोगों को बाहर इलाज कराने के लिए न जाना पड़े लेकिन ठीक उसके विपरीत अधिकारियों की उदासीनता के कारण इलाज की बात तो दूर ओपीडी भी ठीक से नहीं चल पा रही है। महिला चिकित्साधिकारी डॉ. सुवर्णा सिंह लंबे समय से छुट्टी पर हैं। ऐसे में किससे फरियाद की जाए, कोई सुनने वाला नहीं है। इसलिए स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से इस अस्पताल की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया है।
आंदोलन की चेतावनी दी
बैरिया। जिला पंचायत स्वास्थ्य कल्याण समिति के अध्यक्ष गीता सिंह ने मुख्य चिकित्साधिकारी से तत्काल सोनबरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था सुधारने का आग्रह किया है। अन्यथा की स्थिति में संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई के लिए चेताया है। वहीं, उनके पति इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने चेताया कि एक सप्ताह के भीतर अगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो बहुत बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाएगा।
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सोनबरसा अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशीष श्रीवास्तव लंबी छुट्टी पर हैं। डॉ. विजय यादव बलिया जिला मुख्यालय से अटैच हैं। डॉ. शैलेंद्र राव वीआईपी ड्यूटी में है। डॉ. नवीन सिंह का यहां से काफी दिन पहले मऊ के लिए स्थानांतरण हो चुका है। ऐसे में रोगियों के हो-हल्ला करने पर कभी संविदा के डॉक्टर एक दिन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोटवा से भेजे जाते हैं। कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरली छपरा के प्रभारी चिकित्साधिकारी को यहां ओपीडी चलाने के लिए भेजा जा रहा है। ऐसे में करोड़ों की अत्याधुनिक मशीनें, दवाइयों से भरा गोदाम, 90 लाख रुपये की लागत से बना ऑक्सीजन प्लांट सब कुछ निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त बार-बार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यहां के लोगों को बाहर इलाज कराने के लिए न जाना पड़े लेकिन ठीक उसके विपरीत अधिकारियों की उदासीनता के कारण इलाज की बात तो दूर ओपीडी भी ठीक से नहीं चल पा रही है। महिला चिकित्साधिकारी डॉ. सुवर्णा सिंह लंबे समय से छुट्टी पर हैं। ऐसे में किससे फरियाद की जाए, कोई सुनने वाला नहीं है। इसलिए स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से इस अस्पताल की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया है।
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आंदोलन की चेतावनी दी
बैरिया। जिला पंचायत स्वास्थ्य कल्याण समिति के अध्यक्ष गीता सिंह ने मुख्य चिकित्साधिकारी से तत्काल सोनबरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था सुधारने का आग्रह किया है। अन्यथा की स्थिति में संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई के लिए चेताया है। वहीं, उनके पति इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने चेताया कि एक सप्ताह के भीतर अगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो बहुत बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाएगा।
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