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अब ऑनलाइन होंगे जिले के मवेशी
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बलिया। जिले के मवेशी जल्द ही ऑनलाइन होंगे। पशुपालन विभाग जिले के सभी मवेशियों की ईयर टैगिंग कराएगा। पशुओं के कान में बैंगनी कलर का छल्ला लगाकर उनकी कोडिंग की जाएगी। इसकी ऑनलाइन फीडिंग की जाएगी। एक क्लिक करते ही मवेशियों का ब्योरा निकल आएगा। इससे न सिर्फ मवेशी चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि शासन द्वारा पशुपालन विभाग से संचालित योजनाओं का भी लाभ मिलेगा।
जिले के अधिकांश लोगों की जीविका पशुपालन पर निर्भर है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में करीब छह लाख मवेशी हैं। मगर इनका डाटा नहीं है, न ही इनकी पहचान है। पशुपालकों के पास कितने मवेशी हैं, उनमें गाय कितनी हैं या फिर भैंस कितनी हैं, किस नस्ल की हैं, इसका भी विभाग के पास कोई ब्यौरा नहीं है। अब पशुपालन विभाग जिले के सभी मवेशियों को ऑनलाइन करने जा रहा है। इसके लिए पशुपालन विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर पशुपालक के नाम के साथ मवेशियों के बारे में पूरी जानकारी जुटाएंगे। इस दौरान उनकी ईयर टैगिंग की जाएगी। बैगनी रंग का छल्ला मवेशियों के कानों में लगाया जाएगा, जिसमें एक कोड होगा। वहीं कोड विभाग की वेबसाइट पर फीड किया जाएगा। फीडिंग के दौरान कोड के साथ मवेशी की फोटो भी होगी। खास बात यह है कि कोड नंबर वेबसाइट पर डालते ही फोटो के साथ मवेशी का ब्यौरा सामने आ जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन द्वारा संचालित योजनाओं के लिए ऐसा किया जा रहा है
जिले में करीब छह लाख से अधिक मवेशियों की ईयर टैगिंग कर उन्हें ऑनलाइन किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। - अशोक कुमार मिश्र, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बलिया
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जिले के अधिकांश लोगों की जीविका पशुपालन पर निर्भर है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में करीब छह लाख मवेशी हैं। मगर इनका डाटा नहीं है, न ही इनकी पहचान है। पशुपालकों के पास कितने मवेशी हैं, उनमें गाय कितनी हैं या फिर भैंस कितनी हैं, किस नस्ल की हैं, इसका भी विभाग के पास कोई ब्यौरा नहीं है। अब पशुपालन विभाग जिले के सभी मवेशियों को ऑनलाइन करने जा रहा है। इसके लिए पशुपालन विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर पशुपालक के नाम के साथ मवेशियों के बारे में पूरी जानकारी जुटाएंगे। इस दौरान उनकी ईयर टैगिंग की जाएगी। बैगनी रंग का छल्ला मवेशियों के कानों में लगाया जाएगा, जिसमें एक कोड होगा। वहीं कोड विभाग की वेबसाइट पर फीड किया जाएगा। फीडिंग के दौरान कोड के साथ मवेशी की फोटो भी होगी। खास बात यह है कि कोड नंबर वेबसाइट पर डालते ही फोटो के साथ मवेशी का ब्यौरा सामने आ जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन द्वारा संचालित योजनाओं के लिए ऐसा किया जा रहा है
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जिले में करीब छह लाख से अधिक मवेशियों की ईयर टैगिंग कर उन्हें ऑनलाइन किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। - अशोक कुमार मिश्र, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बलिया
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