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जिले से विधानसभा पहुंचने वाली महिलाओं की फेहरिस्त में हुआ इजाफा
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बलिया। जिले के सियासी समीकरण बनाने और बिगाड़ने में भी अहम रही महिलाओं ने इस बार आधी आबादी को भी चुनने का काम किया है। बांसडीह विधान सभा से केतकी सिंह द्वारा नेता प्रतिपक्ष रहे रामगोविंद चौधरी को 21134 मतों से पराजित कर हासिल की जीत इसकी बानगी है। हालांकि इससे पूर्व अब तक सिर्फ दो महिला जनप्रतिनिधि ही जिले की विधानसभाओं से चुनकर अब तक विधानसभा पहुंच सकी थी, लेकिन अब इनकी संख्या तीन हो गई है। जबकि लोक या राज्यसभा की दहलीज पार करना अभी भी जिले की महिलाओं के लिए चुनौती बना हैं, जहां अभी तक इनका खाता भी नहीं खुला है। इसका प्रमुख कारण चुनावों में टिकट के मामले में इनकी भागीदारी उस हिसाब से नहीं हो पाती, जिस हिसाब से होनी चाहिए। सभी प्रमुख दल आधी आबादी को कमजोर आंकते हुए इनकों टिकट देने से कतराते है।
पुरुषों के साथ हर जगह हमसफर बन चुकीं महिलाओं को चुनाव लड़ाने पर हर पार्टी पीछे नजर आती हैं। यहीं कारण है कि अब तक हुए विधानसभा चुनाव में जिले की दो महिलाएं ही विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहीं थी। लेकिन 10 मार्च 2022 की तारीख ने इस संख्या में इजाफा करते हुए इसमें केतकी का नाम भी शामिल कर दिया है। इसके पूर्व 80 के दशक में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से तब के कद्दावर कांग्रेस नेता बच्चा पाठक को विजयलक्ष्मी ने शिकस्त देकर दो बार विधायक बनी थीं। इसी प्रकार 1996 के उपचुनाव में निर्दल और साल 2007 में बलिया नगर विधानसभा से मंजू सिंह बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंच सकी थीं। अब केतकी सिंह ने नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद को मात देकर इस फेहरिस्त में अपना नाम शामिल कराया है।
वर्ष 2017 में बासंडीह विधान में अपनी मजबूत स्थिती होने के बावजूद भाजपा ने केतकी सिंह को टिकट नहीं दिया। हालांकि निर्दल चुनाव लड़कर वह दूसरे स्थान पर रहीं और पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी से मामूली अंतर से चुनाव हार गईं थी।
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पुरुषों के साथ हर जगह हमसफर बन चुकीं महिलाओं को चुनाव लड़ाने पर हर पार्टी पीछे नजर आती हैं। यहीं कारण है कि अब तक हुए विधानसभा चुनाव में जिले की दो महिलाएं ही विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहीं थी। लेकिन 10 मार्च 2022 की तारीख ने इस संख्या में इजाफा करते हुए इसमें केतकी का नाम भी शामिल कर दिया है। इसके पूर्व 80 के दशक में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से तब के कद्दावर कांग्रेस नेता बच्चा पाठक को विजयलक्ष्मी ने शिकस्त देकर दो बार विधायक बनी थीं। इसी प्रकार 1996 के उपचुनाव में निर्दल और साल 2007 में बलिया नगर विधानसभा से मंजू सिंह बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंच सकी थीं। अब केतकी सिंह ने नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद को मात देकर इस फेहरिस्त में अपना नाम शामिल कराया है।
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वर्ष 2017 में बासंडीह विधान में अपनी मजबूत स्थिती होने के बावजूद भाजपा ने केतकी सिंह को टिकट नहीं दिया। हालांकि निर्दल चुनाव लड़कर वह दूसरे स्थान पर रहीं और पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी से मामूली अंतर से चुनाव हार गईं थी।
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