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Ballia News: एक साथ दो अर्थियां उठने पर आंखें हुईं नम
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सिकंदरपुर। जमीन के विवाद में चाचा-भतीजे की हत्या ने हर शख्स को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद अपराह्न 4:30 बजे दोनों शव एक ही एंबुलेंस से खरीद गांव पहुंचे। एंबुलेंस से चाचा अनिल कुमार व भतीजा पंकज का शव जैसे ही बाहर निकाला गया, हर तरफ चीत्कार सुनाई देने लगी। एक साथ जब दो अर्थियां उठीं तो सबकी आंखें नम हो गईं।
शव देख कर स्वजन व रिश्तेदार रोने लगे। पंकज की मां गीता देवी व चंद्रकला के करुण क्रंदन से माहौल और गमगीन हो गया। गीता देवी बेटे के शव से लिपट कर रो रही थीं। चंद्रकला पति अनिल के शव को देख दहाड़े मार रही थीं। भाई और पुत्र का शव देख अक्षय लाल यादव फफक-फफक कर रोए जा रहे थे। पंकज की दोनों बहनें वंदना और रंजना, दोनो छोटे भाई पीयूष और प्रवीण और अनिल की पुत्री संजना और पुत्र शुभम समेत घर की महिलाओं और बच्चों का करुण क्रंदन देख लोगों की आंखें नम हो जा रही थीं। बच्चे, पुलिस के अधिकारियों का पैर पड़कर गिड़गिड़ा रहे थे। उधर परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार आंखों में आंसू लिए अंतिम यात्रा की तैयारी में जुटे हुए थे। शाम को एक साथ जब दो अर्थियां उठीं तो सबकी आंखें नम हो गई। अर्थियों को कंधा देने के लिए सैकड़ों लोग थे।
शुक्रवार दोपहर से ही गांव में लोगों की भीड़ जुटने लगी। एक साथ चाचा-भतीजे की अर्थी उठी। मृतक के परिजनों को सांत्वना देने के लिए एडिशनल एसपी अनिल कुमार झा सहित तमाम अधिकारी मौजूद रहे। सरयू घाट पर जब पंकज की चिता को पिता अक्षय लाल यादव और अनिल की चिता को शुभम ने अग्नि दी तो वहां का माहौल और गमगीन हो गया।
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छावनी में तब्दील हुआ गांव
घटना के बाद से उपजे तनाव को देखते हुए गांव में पुलिस बल को तैनात किया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर आठ से अधिक थानों की फोर्स तैनात रही। पुलिसकर्मी गांव से लेकर सरयू घाट तक साथ रहे।
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शव देख कर स्वजन व रिश्तेदार रोने लगे। पंकज की मां गीता देवी व चंद्रकला के करुण क्रंदन से माहौल और गमगीन हो गया। गीता देवी बेटे के शव से लिपट कर रो रही थीं। चंद्रकला पति अनिल के शव को देख दहाड़े मार रही थीं। भाई और पुत्र का शव देख अक्षय लाल यादव फफक-फफक कर रोए जा रहे थे। पंकज की दोनों बहनें वंदना और रंजना, दोनो छोटे भाई पीयूष और प्रवीण और अनिल की पुत्री संजना और पुत्र शुभम समेत घर की महिलाओं और बच्चों का करुण क्रंदन देख लोगों की आंखें नम हो जा रही थीं। बच्चे, पुलिस के अधिकारियों का पैर पड़कर गिड़गिड़ा रहे थे। उधर परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार आंखों में आंसू लिए अंतिम यात्रा की तैयारी में जुटे हुए थे। शाम को एक साथ जब दो अर्थियां उठीं तो सबकी आंखें नम हो गई। अर्थियों को कंधा देने के लिए सैकड़ों लोग थे।
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शुक्रवार दोपहर से ही गांव में लोगों की भीड़ जुटने लगी। एक साथ चाचा-भतीजे की अर्थी उठी। मृतक के परिजनों को सांत्वना देने के लिए एडिशनल एसपी अनिल कुमार झा सहित तमाम अधिकारी मौजूद रहे। सरयू घाट पर जब पंकज की चिता को पिता अक्षय लाल यादव और अनिल की चिता को शुभम ने अग्नि दी तो वहां का माहौल और गमगीन हो गया।
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छावनी में तब्दील हुआ गांव
घटना के बाद से उपजे तनाव को देखते हुए गांव में पुलिस बल को तैनात किया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर आठ से अधिक थानों की फोर्स तैनात रही। पुलिसकर्मी गांव से लेकर सरयू घाट तक साथ रहे।