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मोदी अंकल! मेरे पापा को वापस ले आओ

Thu, 09 Apr 2015 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 09 Apr 2015 11:32 PM IST
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Modi uncle...please emancipate of my kith and kin
मोदी अंकल! मेरे पापा को वापस ले आओ..., मोदी जी! एक साल से उग्रवादियों के कब्जे में है मेरा बेटा। कुछ इसी तरह मार्मिक गुहार लगाते हुए बूढ़े, बच्चे और जवान कलेक्ट्रेट में पहुंचे। मामला रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के बैजलपुर गांव के पांच लोगों के अपहरण का है। सभी मेघालय के रंभागिरि में जाकर व्यापार करते थे। इनका अपहरण उल्फा उग्रवादियों ने 25 मार्च, 2014 को कर लिया था।
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पचास-पचास लाख की फिरौती देने में असमर्थ परिवार के लोगों ने गृहमंत्री से लेकर अन्य अधिकारियों से गुहार लगाई थी लेकिन अब तक किसी की रिहाई नहीं हो सकी है। गुरुवार को फिर से अपहृत कारोबारियों के घरवाले कलेक्ट्रेट में पहुंचे और राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के नाम पत्रक एडीएम केपी सिंह को सौंपा।
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पत्र में उल्लेख किया है कि बैजलपुर निवासी मानिक चंद गुप्ता के साथ ही अशोक गुप्ता, मिट्ठू प्रसाद, संजय प्रसाद और सुनील गुप्ता मेघालय के जिला बेस्ट बोरोहिल्स के रंभागिरि के पास कारोबार करने गए थे। उल्फा उग्रवादियों ने शिलांग में इनका अपहरण कर लिया था। अपहरणकर्ताओं ने प्रति व्यक्ति के हिसाब से 50 लाख की फिरौती मांगी थी। पीड़ित परिवार के लोगों ने दो-दो लाख रुपये फिरौती की रकम इकट्ठा कर मध्यस्थ के माध्यम से चार अप्रैल 2014 को उग्रवादी संगठन को पहुंचा दिया। बावजूद किसी को नहीं छोड़ा गया।
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अपहरणकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के अन्य सदस्यों क ो भी जान से मारने की धमकी दी है। इसके बाद पीड़ित परिवार के लोग शिलांग में जाकर अपर पुलिस महानिदेशक से रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही पुलिस अधीक्षक आदि से अपने रिहाई की गुहार लगाते रहे। 16 अक्तूबर 2014 को गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिले। इस पर गृह मंत्री के सहायक निजी सचिव प्रभात त्रिपाठी ने अपहरण के मामले में कार्रवाई के लिए मेघालय सरकार को लिखा था।


पीड़ितों ने पत्र में यह भी बताया है कि अपहरणकर्ताओं के पांच मोबाइल नंबर हैं, जिससे फिरौती की मांग की गई है। अपहृत मानिक चंद्र गुप्ता का मोबाइल नंबर अब तक चालू है, जिससे अपहरणकर्ता कभी-कभी बात करते हैं। प्रकरण में एक साल बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर पीड़ितों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया तथा संपूर्ण गरिमा के साथ जीने के अधिकार की मांग की। चेतावनी दी कि अगर उनके मौलिक अधिकारों का हनन इसी तरह होता रहा तो वे कोर्ट जाने के लिए बाध्य होंगे। 
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