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बलिनी की तर्ज पर पूर्वांचल में भी बनेंगी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां
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बलिया। केंद्र सरकार ने बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की तर्ज पर जिले में एनआरईटीपी (राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक रूपांतरण परियोजना)अंतर्गत पूर्वांचल मिल्क डेयरी वैल्यू चेन परियोजना की एक विशेष योजना स्वीकृत की है। इस योजना में एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) डेयरी सर्विस टेक्निकल सपोर्ट एजेंसी के तौर पर काम करेगी। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा कंसल्टेशन कार्यशाला एवं फील्ड भ्रमण का कार्यक्रम पूरा कर लिया गया है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक राजीव कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार मिशन शक्ति अभियान के तीसरे चरण में मुख्य रूप से पूर्वांचल की महिलाओं को विशेष तोहफा देने जा रही है। सरकार ने सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर एवं बलिया में योजना को लागू करते हुए यहां की महिलाओं को दूध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने की नई रणनीति बनाई है। इसके लिए बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की तर्ज पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। महिला समूहों के गठन का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 43 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्वीकृति कर दी है। प्रत्येक गांव में कम्प्यूटराइज्ड प्रणाली से दूध की खरीद का प्रबंध किया गया है। यह पहला मौका होगा जब पूर्वांचल के जनपदों में भी महिलाएं दूध उत्पादन के क्षेत्र में काम करने जा रही हैं।
बुंदेलखंड के पांच जिलों में चल रही बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी
बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से बुंदेलखंड के पांच जनपदों झांसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट के 634 गांव की 24180 से अधिक महिला किसानों को जोड़कर प्रतिदिन करीब 60,000 लीटर दूध का संग्रहण और व्यापार किया जा रहा है। कंपनी राष्ट्रीय आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से वित्त पोषित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर 2019 में इसका उद्घाटन किया था। इस योजना के तहत महिला किसानों के खाते में भुगतान किया जाता है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक राजीव कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार मिशन शक्ति अभियान के तीसरे चरण में मुख्य रूप से पूर्वांचल की महिलाओं को विशेष तोहफा देने जा रही है। सरकार ने सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर एवं बलिया में योजना को लागू करते हुए यहां की महिलाओं को दूध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने की नई रणनीति बनाई है। इसके लिए बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की तर्ज पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। महिला समूहों के गठन का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 43 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्वीकृति कर दी है। प्रत्येक गांव में कम्प्यूटराइज्ड प्रणाली से दूध की खरीद का प्रबंध किया गया है। यह पहला मौका होगा जब पूर्वांचल के जनपदों में भी महिलाएं दूध उत्पादन के क्षेत्र में काम करने जा रही हैं।
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बुंदेलखंड के पांच जिलों में चल रही बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी
बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से बुंदेलखंड के पांच जनपदों झांसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट के 634 गांव की 24180 से अधिक महिला किसानों को जोड़कर प्रतिदिन करीब 60,000 लीटर दूध का संग्रहण और व्यापार किया जा रहा है। कंपनी राष्ट्रीय आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से वित्त पोषित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर 2019 में इसका उद्घाटन किया था। इस योजना के तहत महिला किसानों के खाते में भुगतान किया जाता है।
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