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शहर के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान
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बलिया। महानगरों की तरह प्रदेश के छोटे शहरों के सुनियोजित विकास के लिए हाईटेक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। बलिया में भी महायोजना-2031 को डिजिटल फार्मेट में लागू किया जाना है। इसके लिए सर्वे हो गया है। नगर विकास विभाग से जुड़े विभागों से महत्वपूर्ण सुझाव लेकर विश्लेषण किया जा चुका है। जल्द ही जिलाधिकारी के साथ बैठक कर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद, शासन से मंजूरी लेकर इस पर आपत्ति ली जाएंगी
आवश्यकताओं के अनुसार शहर के सुनियोजित और व्यवस्थित विकास के लिए विनियमित क्षेत्र में 1987-2001 महायोजना को लागू किया गया था। उस समय इसमें नगर पालिका आसपास के 36 गांवों को शामिल किया था। इस महायोजना के समाप्त हुए 20 वर्ष का समय बीत चुका है। शहर बढ़कर कहां से कहां पहुंच गया है। आबादी भी काफी बढ़ी। अनियोजित विकास से शहर में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही है। रोजाना लगने वाले जाम के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिजली, पानी, जल निकासी आदि की भी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। कई क्षेत्र तो ऐसे स्थानों पर विकसित हो गए हैं, जहां इन समस्याओं का निदान भी मुश्किल है। इसके साथ ही बस अड्डा, रेलवे स्टेशन आदि शहर के बीच में हो गए हैं। इस वजह से जाम एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इन समस्याओं को देखते हुए शासन ने छोटे शहरों के सुनियोजित विकास के लिए हाईटेक मास्टर प्लान तैयार करने का निर्णय लिया था। छोटे शहरों के मास्टर प्लान बेस मैप के मुताबिक तैयार करने थे। इसके लिए कोलकाता की एक कंपनी सर्वे के लिए नामित की गई थी। कंपनी ने शहर के विकास के लिए महायोजना 2031 का माडर्न पैटर्न पर मास्टर प्लान तैयार करने के लिए अटल मिशन फॉर रिजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉरमेशन (अमृत) योजना के तहत सर्वे का कार्य पूरा कर लिया है। संयुक्त नगर नियोजक ने बताया कि नगर के विकास से जुड़े उद्योग, बिजली, नगरपालिका, पीडब्ल्यूडी, परिवहन, सिंचाई आदि विभागों से मास्टर प्लान के संबंध में सुझाव लेने के बाद उसका विश्लेषण कर लिया गया है। अब जल्द ही जिलाधिकारी के साथ बैठक की जाएगी। बैठक के बाद ड्राफ्ट को फाइनल कर शासन को भेजा जाएगा। शासन से मंजूरी के बाद इस पर आम नागरिकों की आपत्तियां ली जाएंगी। निस्तारण के बाद इसे लागू किया जाएगा।
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आवश्यकताओं के अनुसार शहर के सुनियोजित और व्यवस्थित विकास के लिए विनियमित क्षेत्र में 1987-2001 महायोजना को लागू किया गया था। उस समय इसमें नगर पालिका आसपास के 36 गांवों को शामिल किया था। इस महायोजना के समाप्त हुए 20 वर्ष का समय बीत चुका है। शहर बढ़कर कहां से कहां पहुंच गया है। आबादी भी काफी बढ़ी। अनियोजित विकास से शहर में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही है। रोजाना लगने वाले जाम के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिजली, पानी, जल निकासी आदि की भी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। कई क्षेत्र तो ऐसे स्थानों पर विकसित हो गए हैं, जहां इन समस्याओं का निदान भी मुश्किल है। इसके साथ ही बस अड्डा, रेलवे स्टेशन आदि शहर के बीच में हो गए हैं। इस वजह से जाम एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इन समस्याओं को देखते हुए शासन ने छोटे शहरों के सुनियोजित विकास के लिए हाईटेक मास्टर प्लान तैयार करने का निर्णय लिया था। छोटे शहरों के मास्टर प्लान बेस मैप के मुताबिक तैयार करने थे। इसके लिए कोलकाता की एक कंपनी सर्वे के लिए नामित की गई थी। कंपनी ने शहर के विकास के लिए महायोजना 2031 का माडर्न पैटर्न पर मास्टर प्लान तैयार करने के लिए अटल मिशन फॉर रिजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉरमेशन (अमृत) योजना के तहत सर्वे का कार्य पूरा कर लिया है। संयुक्त नगर नियोजक ने बताया कि नगर के विकास से जुड़े उद्योग, बिजली, नगरपालिका, पीडब्ल्यूडी, परिवहन, सिंचाई आदि विभागों से मास्टर प्लान के संबंध में सुझाव लेने के बाद उसका विश्लेषण कर लिया गया है। अब जल्द ही जिलाधिकारी के साथ बैठक की जाएगी। बैठक के बाद ड्राफ्ट को फाइनल कर शासन को भेजा जाएगा। शासन से मंजूरी के बाद इस पर आम नागरिकों की आपत्तियां ली जाएंगी। निस्तारण के बाद इसे लागू किया जाएगा।
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