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मजदूरों से भी आय प्रमाण-पत्र के लिए तहसील मांग रहा एलपीसी
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बलिया। प्रमाण पत्रों के जारी करने में राजस्व कर्मी खूब मनमानी कर रहे हैं। आवेदनों को कोई न कोई बहाना बनाकर रिजेक्ट कर दिया जा रहा है। हैरानी की बात है की मजदूरी के आधार पर आय प्रमाण पत्र के आवेदनों को एलपीसी (लॉस्ट पे सर्टिफिकेट) संलग्न करने का जिक्र करते हुए रिजेक्ट किया जाता है। जबकि एलपीसी सिर्फ सरकारी कर्मचारी ही दे सकता है।
लाख प्रयास के बावजूद ई-डिस्ट्रिक्ट सेवा के तहत तहसीलों से जारी होने वाले प्रमाण पत्रों में मनमानी पर लगाम नहीं लग पा रहा है। प्रमाणपत्रों के आवेदन को निर्धारित समय से अधिक दिनों तक लंबित रखने व बिना जांच किये आवेदनों को वापस करने के साथ ही मनमाने तरीके से रिजेक्ट कर दिया जाता है। वहीं दलालों के जरिये हुए आवेदनों को दो से तीन दिनों में निस्तारित किया जाता है। बताया जाता है कि राजस्वकर्मी सुविधा शुल्क वसूली के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं और मनमानी तरीके से आवेदनों को रिजेक्ट करने का काम करते हैं।
सोहांव गांव निवासी सूर्यकांत ने जनसेवा केंद्र से मजदूरी के आधार पर आय प्रमाण पत्र के लिए नौ अगस्त को आवेदन किया। लेकिन 13 अगस्त को तहसीलदार की ओर से एलपीसी संलग्न करने का जिक्र करते हुए आवेदन को रिजेक्ट कर दिया गया। जबकि एलपीसी किसी सरकारी कर्मचारी को भी तब जारी किया जाता है जब उसका स्थानांतरण किसी अन्य स्थान पर हो जाता है। ताकि उसके आधार पर उसे कार्यभार ग्रहण करने वाले स्थान पर पे बिल बन सके। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है तहसीलों में प्रमाण पत्र के आवेदनों में किस तरह का खेल किया जा रहा है।
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आय प्रमाण पत्र के आवेदनों की जांच करने व रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान है। केवल सरकारी कर्मचारी के मामले में एलपीसी संलग्न करने का नियम है। मजदूर वर्ग के पास कोई प्रमाण पत्र नहीं होता। इस मामले की जांच कर संबंधित राजस्वकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राम आसरे, एडीएम, बलिया
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लाख प्रयास के बावजूद ई-डिस्ट्रिक्ट सेवा के तहत तहसीलों से जारी होने वाले प्रमाण पत्रों में मनमानी पर लगाम नहीं लग पा रहा है। प्रमाणपत्रों के आवेदन को निर्धारित समय से अधिक दिनों तक लंबित रखने व बिना जांच किये आवेदनों को वापस करने के साथ ही मनमाने तरीके से रिजेक्ट कर दिया जाता है। वहीं दलालों के जरिये हुए आवेदनों को दो से तीन दिनों में निस्तारित किया जाता है। बताया जाता है कि राजस्वकर्मी सुविधा शुल्क वसूली के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं और मनमानी तरीके से आवेदनों को रिजेक्ट करने का काम करते हैं।
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सोहांव गांव निवासी सूर्यकांत ने जनसेवा केंद्र से मजदूरी के आधार पर आय प्रमाण पत्र के लिए नौ अगस्त को आवेदन किया। लेकिन 13 अगस्त को तहसीलदार की ओर से एलपीसी संलग्न करने का जिक्र करते हुए आवेदन को रिजेक्ट कर दिया गया। जबकि एलपीसी किसी सरकारी कर्मचारी को भी तब जारी किया जाता है जब उसका स्थानांतरण किसी अन्य स्थान पर हो जाता है। ताकि उसके आधार पर उसे कार्यभार ग्रहण करने वाले स्थान पर पे बिल बन सके। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है तहसीलों में प्रमाण पत्र के आवेदनों में किस तरह का खेल किया जा रहा है।
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आय प्रमाण पत्र के आवेदनों की जांच करने व रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान है। केवल सरकारी कर्मचारी के मामले में एलपीसी संलग्न करने का नियम है। मजदूर वर्ग के पास कोई प्रमाण पत्र नहीं होता। इस मामले की जांच कर संबंधित राजस्वकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राम आसरे, एडीएम, बलिया