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लाइसेंस सिर्फ 89 को, चल रहे 200 से ज्यादा

Mon, 21 Mar 2022 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Mar 2022 11:18 PM IST
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License only on 89, more than 200 running
बलिया। जिले में करीब ढाई दशक पहले तक आरा मशीन के कुल 95 लाइसेंस वन विभाग की ओर से जारी हुए और इसके बाद से नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लग गई। हालांकि वर्ष 2018 में प्रदेश सरकार ने नवीनीकरण की सुविधा दी। जिले में कुल 89 आरा मशीनों के संचालन के लिए ही लाइसेंस है। इसके बावजूद हर चट्टी चौराहों पर अवैध तरीके से आरा मशीनों का संचालन किया जाता है। बताया जाता है कि वन कर्मियों, पुलिस व वन माफियाओं की मिलीभगत से यह खेल वर्षों से चल रहा है। 200 से अधिक स्थानों पर अवैध तरीके से संचालित इन आरा मशीनों पर लकड़ियों की भी भरमार रहती है।
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जिले में वर्ष 1981 से 1996 के बीच कुल 95 आरा मशीनों के लाइसेंस जारी किए गए थे। वर्ष 1997 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से आरा मशीनों के लाइसेंस जारी करने व नवीनीकरण के साथ ही किसी भी लाइसेंस के अन्यत्र हस्तांतरित करने पर भी रोक लगा दिया गया। इसके चलते करीब दो दशक तक जिले में वन विभाग की ओर से कोई भी आरा मशीन संचालन के लिए नया लाइसेंस जारी नहीं किया गया। वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनते ही प्रदेश सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नए लाइसेंस पर रोक लगा दिया हालांकि 2018 में छूट देने हुए केवल नवीनीकरण का आदेश जारी किया। हालांकि कार्रवाई के बाद वर्तमान में कुल 89 आरा मशीनें लाइसेंसी हैं। लेकिन जिले के अधिकांश प्रमुख चट्टी-चौराहे व बाजार के आसपास धड़ल्ले से आरा मशीनों का संचालन किया जाता है।
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धड़ल्ले से हो रहा संचालन
जिले के प्रमुख बाजार, गांव की चट्टी व नगरीय इलाकों के आसपास धड़ल्ले से अवैध आरा मशीनों का संचालन वर्षों से किया जा रहा है। बतौर उदाहरण शहर के आसपास के अलावा रसड़ा क्षेत्र के नरला, राघोपुर, अठिला, पकवाइनार, नाथ बाबा रोड, मालगोदाम रोड, कोटवारी आदि के अलावा सोहांव ब्लॉक के सोहांव, कोटवां नारायनपुर में अवैध तरीके से तो भरौली व उजियार में नामांतरण के आधार पर आरा मशीनों का संचालन किया जाता है।
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कई जगहों पर बिना लाइसेंस चल रही आरा मशीनें
सिकंदरपुर। क्षेत्र में मात्र तीन-चार आरा मिलों को ही लाइसेंस प्राप्त है लेकिन दर्जनों आरा मशीनें बगैर लाइसेंस के संचालित हो रहीं हैं। कई बार आरा मशीनों पर कार्रवाई को लकेर शिकायत की गई लेकिन पुलिस व वन कर्मियों की मिलीभगत से पुन: संचालित होने लगती हैं। वन विभाग की शिथिलता के कारण अवैध आरा मशीन संचालकों के माध्यम से हरे व फलदार वृक्षों को काट लिया जाता है। क्षेत्र के अवैध आरा मशीन पर नीम, पीपल सहित अनेक प्रतिबंधित पेड़ों की लकड़ी बड़ी मात्रा में जमा कर रखी है। पीपल की हरी लकड़ियां रोजाना रात्रि को ट्रैक्टर ट्रालियों में भरकर आती हैं और सिकन्दरपुर स्थित आरा मशीनों पर एकत्रित की जाती हैं।
धड़ल्ले से हो रहा अवैध तरीके से आरा मशीनों का संचालन
जयप्रकाशनगर। केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर पौधे लगाने व हरे पेड़ों को बचाने की कवायद वर्षों से लगातार की जा रही है, लेकिन वहीं वन विभाग सहित संबंधित के सहयोग से दूसरे जनपद से लकड़ी तस्कर आकर बेहिचक हरे पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से कर रहे हैं। इस समय इन पेड़ों के रक्षक ही भक्षक बनकर गैर जनपदों से लकड़ी तस्करों को बुलाकर सरकारी पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से करवा रहे हैं। वह तस्कर हरे पेड़ काटकर एक स्थान पर एकत्रित कर जब एक या दो ट्रक भरने के लिए लकड़ी हो जाती है। तब देर शाम लकड़ी को ट्रक पर लादकर ले जाते हैं। क्षेत्र के एन एच 31से लेकर टोला सेवक राय के,रामनगर, रामपुर कोडरहा, बकुल्हा संसार टोला बांध के आसपास, जयप्रकाशनगर, बकुल्हा से सटे आसपास, चांददीयर सरकारी पौधशाला आदि स्थानों पेड़ों की कटाई की जा रही है। इस बाबत वन क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जो पेड़ प्रतिबंधित है और उन्हें काटा जा रहा है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अवैध तरीके से संचालित आरा मशीनों को लेकर समय-समय पर छापेमारी कर कार्रवाई की जाती है। इस दौरान लाइसेंस से इतर मशीनों के संचालन करने पर भी कार्रवाई की जाती है। जल्द ही इस बाबत कार्रवाई शुरु की जाएगी।
- श्रद्धा यादव, डीएफओ, बलिया।
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