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ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे को लेकर जल्द शुरु होगी जमीन खरीद प्रक्रिया
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बलिया। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण को लेकर जमीनों का अधिग्रहण जल्द शुरू होगा। किसानों की सहमति के बाद भूमि का मूल्यांकन कर मुआवजे का भुगतान किया जाएगा। जमीनों के अधिग्रहण पर करीब 1630 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं और इसकी जिम्मेदारी यूपीडा को दी गई है।
जिले को लखनऊ और दिल्ली तक फोरलेन से जोड़ने को लेकर कवायद तेज हो गई है। इसके तहत, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण होना है। जिले में कुल करीब 65 किमी की लंबाई में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनेगा, जो चितबड़ागांव से फेफना, माल्देपुर, हल्दी, बैरिया, चांददियर होते हुए मांझी घाट के बाद बिहार में प्रवेश कर जाएगा। इसके निर्माण की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को दी गई है। शासन की ओर से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे निर्माण को लेकर भूमि अधिग्रहण का गजट महीनों पहले किया जा चुका है। एक्सप्रेस-वे जनपद में तहसील सदर के 72 और बैरिया के 16 गांवों से होकर गुजरेगा और मांझी घाट पुल से जुड़ेगा। सदर और बैरिया तहसील के गांवों के किसानों से लगभग 765 हेक्टेयर भूमि किसानों से खरीदी जानी है। इसके लिए शासन की ओर से यूपीडा को जिम्मेदारी दी गई है। बताया जाता है कि यूपीडा के अधिकारी जिले में जल्द आएंगे और अधिकारियों के साथ ही किसानों के साथ बैठक कर जमीनों के मूल्यांकन का निर्धारण करेंगे। किसानों की सहमति के बाद उन्हें निर्धारित मुआवजे का भुगतान कर अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी करेंगे। जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही एनएचएआई की ओर से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे को धरातल पर उतारने का काम शुरू कर दिया जाएगा। बता दें कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण एनएच-29 के गोरखपुर-वाराणसी हाईवे पर गाजीपुर बाईपास के पास जंगीपुर से शुरू होगा, जो बिहार के छपरा तक बनेगा।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण को लेकर प्रक्रिया जारी है। जमीन खरीदने की जिम्मेदारी यूपीडा को दी गई है। जमीन मिलने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। जल्द ही जमीन खरीद की भी प्रक्रिया शुरू होने वाली है। - एसके पाठक, परियोजना निदेशक, एनएचएआई, आजमगढ़
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जिले को लखनऊ और दिल्ली तक फोरलेन से जोड़ने को लेकर कवायद तेज हो गई है। इसके तहत, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण होना है। जिले में कुल करीब 65 किमी की लंबाई में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनेगा, जो चितबड़ागांव से फेफना, माल्देपुर, हल्दी, बैरिया, चांददियर होते हुए मांझी घाट के बाद बिहार में प्रवेश कर जाएगा। इसके निर्माण की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को दी गई है। शासन की ओर से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे निर्माण को लेकर भूमि अधिग्रहण का गजट महीनों पहले किया जा चुका है। एक्सप्रेस-वे जनपद में तहसील सदर के 72 और बैरिया के 16 गांवों से होकर गुजरेगा और मांझी घाट पुल से जुड़ेगा। सदर और बैरिया तहसील के गांवों के किसानों से लगभग 765 हेक्टेयर भूमि किसानों से खरीदी जानी है। इसके लिए शासन की ओर से यूपीडा को जिम्मेदारी दी गई है। बताया जाता है कि यूपीडा के अधिकारी जिले में जल्द आएंगे और अधिकारियों के साथ ही किसानों के साथ बैठक कर जमीनों के मूल्यांकन का निर्धारण करेंगे। किसानों की सहमति के बाद उन्हें निर्धारित मुआवजे का भुगतान कर अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी करेंगे। जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही एनएचएआई की ओर से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे को धरातल पर उतारने का काम शुरू कर दिया जाएगा। बता दें कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण एनएच-29 के गोरखपुर-वाराणसी हाईवे पर गाजीपुर बाईपास के पास जंगीपुर से शुरू होगा, जो बिहार के छपरा तक बनेगा।
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ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण को लेकर प्रक्रिया जारी है। जमीन खरीदने की जिम्मेदारी यूपीडा को दी गई है। जमीन मिलने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। जल्द ही जमीन खरीद की भी प्रक्रिया शुरू होने वाली है। - एसके पाठक, परियोजना निदेशक, एनएचएआई, आजमगढ़
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