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खेती करने के लिए भी नहीं बची जमीन
ballia
Updated Fri, 01 Sep 2017 10:37 PM IST
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चांददीयर से अठगावा पंचायत तक की कृषि भूमि कटान करती घाघ्ारा।
- फोटो : ballia
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घाघरा की नरमी से विभागीय अफरा- तफरी भले ही कम हो चली है, लेकिन इब्राहिमाबाद नौबरार में किसानों की चिंता कम होती नहीं दिख रही। किसान घाघरा की कटान से पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की बेरुखी हर साल कृषि भूमि के कटान पर भारी पड़ रही है। इब्राहिमाबाद नौबरार से चांददियर तक लगभग 350 एकड़ जमीन गंवाने के बाद किसानों को खुद की खेती के लिए भी जमीन नहीं बची। वहीं सभी किसान पशुपालन भी करते हैं, जो अपने पशुओं को लेकर भी काफी चिंतित हैं।
अठगांवा के किसान ध्रुप सिंह बताते हैं कि जब खेत था तो उसी से पशुओं के चारे आदि की व्यवस्था हो जाती थी। अब पशुओं को बेच देना ही अच्छा है। वजह की अब खुद के परिवार की परवरिश कैसे होगी। यही चिंता खाए जा रही है। चांददियर के किसान रामचंद्र यादव फौजदार का कहना है कि खेत चले जाने के बाद यहां अब खेती पर ही संकट है।
यहां तक की रूपए देने के बाद भी अब किसी और का खेत काफी मान-मनौवल के बाद ही सिकमी रूप में मिल सकते हैं। जिसके बदौलत परिवार नहीं चल सकता।
अठगांवा के किसान रामचंद्र चौधरी बताते हैं कि मात्र तीन साल के अंदर घाघरा ने वह कर दिया जो पिछले पांच दशक में भी नहीं हुआ था। जनप्रतिनिधि और सरकारों ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अठगांवा के किसान शिववचन ठाकुर का कहना हैं कि सरकारी स्तर से केवल बांध को बचाने के लिए मात्र सठिया पर प्रयास किया जा रहा है। जबकि इब्राहिमाबाद नौबरार से चांददियर तक लगभग छह किमी में घाघरा किसानों की जमीन को अभी भी निगलती जा रही है। लेकिन हम किसान चाह कर भ्ाी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। कहा कि उपाय के नाम पर कुछ भी नहीं है और न ही किसानों को जमीन का मुआवजा दिया जा रहा और न ही उनकी खैर खबर ली जा रही।
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अठगांवा के किसान ध्रुप सिंह बताते हैं कि जब खेत था तो उसी से पशुओं के चारे आदि की व्यवस्था हो जाती थी। अब पशुओं को बेच देना ही अच्छा है। वजह की अब खुद के परिवार की परवरिश कैसे होगी। यही चिंता खाए जा रही है। चांददियर के किसान रामचंद्र यादव फौजदार का कहना है कि खेत चले जाने के बाद यहां अब खेती पर ही संकट है।
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यहां तक की रूपए देने के बाद भी अब किसी और का खेत काफी मान-मनौवल के बाद ही सिकमी रूप में मिल सकते हैं। जिसके बदौलत परिवार नहीं चल सकता।
अठगांवा के किसान रामचंद्र चौधरी बताते हैं कि मात्र तीन साल के अंदर घाघरा ने वह कर दिया जो पिछले पांच दशक में भी नहीं हुआ था। जनप्रतिनिधि और सरकारों ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अठगांवा के किसान शिववचन ठाकुर का कहना हैं कि सरकारी स्तर से केवल बांध को बचाने के लिए मात्र सठिया पर प्रयास किया जा रहा है। जबकि इब्राहिमाबाद नौबरार से चांददियर तक लगभग छह किमी में घाघरा किसानों की जमीन को अभी भी निगलती जा रही है। लेकिन हम किसान चाह कर भ्ाी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। कहा कि उपाय के नाम पर कुछ भी नहीं है और न ही किसानों को जमीन का मुआवजा दिया जा रहा और न ही उनकी खैर खबर ली जा रही।
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