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भाजपा और सपा में खिताबी मुकाबला होना तय
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बलिया। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर राजनीतिक पंड़ितों की कयासी पर मंगलवार को पूरी तरह विराम लग गया। नामवापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए तीन जुलाई को मतदान होना भी सुनिश्चत हो गया। क्योंकि सपा और भाजपा के उम्मीदवार नाम वापस नहीं लिया। दोनों उम्मीदवार अपनी जीत को लेकर भी पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे है। हांलाकि उनके दावे के पीछे अपने-अपने तर्क और सियासी समीकरण भी है।
वैसे जिले के वर्तमान सियासी परिदृश्य पर नजर डालें तो भाजपा के पास 11 जिला पंचायत सदस्य है। जबकि समाजवादी पार्टी के समर्थन से 10 जिला पंचायत सदस्य चुनाव जीत कर सदन में पहुंचे है। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के 10 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 9 सदस्य भी परिणाम को प्रभावित करने की स्थिती में है। इस चुनाव में कोई भी दल निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों की अनदेखी कर अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज नहीं हो सकता है। क्योंकि सत्ता की चाबी इनके पाले से होकर गुजरती दिख रही है। क्योंकि बसपा ने भाजपा उम्मीदवार को अघोषित समर्थन दे रखा है। सुभासपा, कांग्रेस और गोंगपा ने सपा को समर्थन देने का एलान किया है।
दोनों दलीय उम्मीदवारों और उनके समर्थक दलों को मिलाकर भी कोई उम्मीदवार 58 सदस्यी सदन में बहुमत के जादुई ऑकड़े 30 के करीब पहुंचता नहीं दिख रहा। ऐसे में 14 निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जा रही है। बिना उनके चाहे सपा अथवा भाजपा जिला पंचायत में सत्ता का स्वाद चखने से वंचित रहे जाएंगे। यहीं कारण है कि जिपं अध्यक्ष चुनाव की पूरी स्क्रिप्ट निर्दलीयों के ईर्द गिर्द घूम रही है। जिससे उनको मोल भाव भी बढ़ गया है।
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वैसे जिले के वर्तमान सियासी परिदृश्य पर नजर डालें तो भाजपा के पास 11 जिला पंचायत सदस्य है। जबकि समाजवादी पार्टी के समर्थन से 10 जिला पंचायत सदस्य चुनाव जीत कर सदन में पहुंचे है। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के 10 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 9 सदस्य भी परिणाम को प्रभावित करने की स्थिती में है। इस चुनाव में कोई भी दल निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों की अनदेखी कर अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज नहीं हो सकता है। क्योंकि सत्ता की चाबी इनके पाले से होकर गुजरती दिख रही है। क्योंकि बसपा ने भाजपा उम्मीदवार को अघोषित समर्थन दे रखा है। सुभासपा, कांग्रेस और गोंगपा ने सपा को समर्थन देने का एलान किया है।
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दोनों दलीय उम्मीदवारों और उनके समर्थक दलों को मिलाकर भी कोई उम्मीदवार 58 सदस्यी सदन में बहुमत के जादुई ऑकड़े 30 के करीब पहुंचता नहीं दिख रहा। ऐसे में 14 निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जा रही है। बिना उनके चाहे सपा अथवा भाजपा जिला पंचायत में सत्ता का स्वाद चखने से वंचित रहे जाएंगे। यहीं कारण है कि जिपं अध्यक्ष चुनाव की पूरी स्क्रिप्ट निर्दलीयों के ईर्द गिर्द घूम रही है। जिससे उनको मोल भाव भी बढ़ गया है।
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