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Ballia News: दो दिन में 100 बीघे फसल गंगा में समाई
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दया छपरा। गंगा उस पार प्रदेश के अंतिम गांव नौरंगा ग्राम पंचायत अंतर्गत भगवानपुर मौजा में आबाद चक्की नौरंगा गांव के सामने बुधवार से शुरु हुआ कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। 10 से 15 फिट जमीन गंगा में समाहित होती जा रही है। ग्रामीण अपने आखों के सामने लहलहाते खेत को गंगा के कटान में जाते देखने को मजबूर हैं। शुक्रवार सुबह कटान बढ़ने से लगभग 10 मीटर के चौड़ाई में दो बिघा परवल का खेत गंगा में समाहित हो गया। अब गंगा का कटान चक्की नौरंगा गांव से मात्र 300 मीटर के दूरी पर रह गया है। इससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।
शुवाल छपरा के ग्रामीण अक्षय चौबे, व रामाकांत ठाकुर ने बताया कि वर्ष 1840 में यह गांव व मौजा भुआल छपरा कट कर गंगा में विलीन हो गया था। 1882 में यह गांव बस्ती के रूप में आधा अधूरा आबाद हुआ। धीरे धीरे आबादी बढ़ती गई। लगता है कि आने वाले समय में यह गांव फिर से कटान का भेंट चढ़ जाएगा। पवन ठाकुर, विकास ठाकुर, नन्हक, नमोनारायण, संजय, विजय, बजरंगी ठाकुर सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि अब गंगा का रुख नौरांगा को रगड़ते हुए चक्की गांव के पूरब गांव से मात्र 300 मीटर के दूरी पर रह गया है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हम लोगों को कई पूछने वाला नहीं है। तीन साल पहले कटान रोकने के लिए परक्यूपाइन लगाया गया था। उसी साल गंगा में समाहित हो गया। तब से अब तक कोई झांकने के लिए नहीं आया। बिहार राज्य के सटे जवैनिया गांव में कटान रोधी कार्य जोरों से कराया जा रहा है।
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अगर ज्वैनियां में कटान रुक गया तो गंगा की धारा मुड़ कर पूरे नौरंगा, भुवाल छपरा गांव को अपने आगोश में ले लेगी। बुधवार से शुरु हुआ चक्की नौरंगा में गंगा का कटान शुक्रवार तक गांव के सामने लगभग 100 बीघा उपजाऊ खेत लील चुका है। किसानों ने इसमें परवल व मक्का की खेती थी। केंद्रीय जल आयोग का गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर शुक्रवार की 12 बजे 57.330 मीटर दर्ज किया गया। प्रति घंटा दो सेंटीमीटर का घटाव बना हुआ है।
घड़ियाल ने मचाई दहशत
दया छपरा। गंगा उस पार चक्की तौरंगा गांव में कटान देखने गए ग्रामीणों में उस समय दहशत फैल गई जब गंगा की धारा में लंबा घड़ियाल तैरते हुए किनारे आ गया। छड़ भर के लिए तो भगदड़ मच गई। युवक ईंट से घड़ियाल को पानी में भेजने मे सफल हो गए। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की कि अभी पानी घट रहा है। पानी बढ़ने पर यह घड़ियाल बस्ती में पहुंच सकता है।
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शुवाल छपरा के ग्रामीण अक्षय चौबे, व रामाकांत ठाकुर ने बताया कि वर्ष 1840 में यह गांव व मौजा भुआल छपरा कट कर गंगा में विलीन हो गया था। 1882 में यह गांव बस्ती के रूप में आधा अधूरा आबाद हुआ। धीरे धीरे आबादी बढ़ती गई। लगता है कि आने वाले समय में यह गांव फिर से कटान का भेंट चढ़ जाएगा। पवन ठाकुर, विकास ठाकुर, नन्हक, नमोनारायण, संजय, विजय, बजरंगी ठाकुर सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि अब गंगा का रुख नौरांगा को रगड़ते हुए चक्की गांव के पूरब गांव से मात्र 300 मीटर के दूरी पर रह गया है।
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ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हम लोगों को कई पूछने वाला नहीं है। तीन साल पहले कटान रोकने के लिए परक्यूपाइन लगाया गया था। उसी साल गंगा में समाहित हो गया। तब से अब तक कोई झांकने के लिए नहीं आया। बिहार राज्य के सटे जवैनिया गांव में कटान रोधी कार्य जोरों से कराया जा रहा है।
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अगर ज्वैनियां में कटान रुक गया तो गंगा की धारा मुड़ कर पूरे नौरंगा, भुवाल छपरा गांव को अपने आगोश में ले लेगी। बुधवार से शुरु हुआ चक्की नौरंगा में गंगा का कटान शुक्रवार तक गांव के सामने लगभग 100 बीघा उपजाऊ खेत लील चुका है। किसानों ने इसमें परवल व मक्का की खेती थी। केंद्रीय जल आयोग का गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर शुक्रवार की 12 बजे 57.330 मीटर दर्ज किया गया। प्रति घंटा दो सेंटीमीटर का घटाव बना हुआ है।
घड़ियाल ने मचाई दहशत
दया छपरा। गंगा उस पार चक्की तौरंगा गांव में कटान देखने गए ग्रामीणों में उस समय दहशत फैल गई जब गंगा की धारा में लंबा घड़ियाल तैरते हुए किनारे आ गया। छड़ भर के लिए तो भगदड़ मच गई। युवक ईंट से घड़ियाल को पानी में भेजने मे सफल हो गए। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की कि अभी पानी घट रहा है। पानी बढ़ने पर यह घड़ियाल बस्ती में पहुंच सकता है।