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पानी घटा तो मुश्किलें भी बढ़ीं, गंदगी-दुर्गंध से जीना मुहाल
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बेल्थरारोड में टीएस बंधा से सटकर बहता सरयू नदी का पानी। संवाद
- फोटो : BALLIA
रामगढ़। गंगा नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी धीरे-धीरे निकलने लगा है। इसके साथ ही लोगों के सामने नई समस्याएं आ खड़ी हुई हैं। जिन इलाकों से पानी निकल रहा है, वहां गंदगी और दुर्गंध से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है। साफ-सफाई और दवाओं का छिड़काव अब तक नहीं हो सका है। बाढ़ के पानी के गांव में फैलने के कारण कई संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोगों को आने-जाने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ पीडि़तों का आरोप है कि पहली बार ऐसे देखने को मिल रहा है कि पीडि़तों को अपने ही हाल पर जीने के लिए छोड़ दिया गया है। इसको लेकर काफी आक्रोश है। पूर्व प्रधान ग्राम सभा गोपालपुर मनोज यादव वे बताया कि गांव से बाढ़ का पानी निकल चुका है। सड़कों पर काफी कीचड़ होने के कारण आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। घरों के आसपास जो पानी जमा हुआ है उससे दुर्गंध उठने लगी है। संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा है। गोपालपुर निवासी पंकज तिवारी ने कहा कि बाढ़ कटान रोकने के नाम पर दुबे छपरा में 60 करोड़ खर्च किए गए। कार्य मानक के अनुरूप न होने के कारण गांव का एक-एक मकान गंगा की लहरों में समाता चला जा रहा है। हम लोगों की मांग थी कि प्राथमिकता के आधार पर गांव को बचाया जाए। उदय छपरा निवासी मदन उपाध्याय ने कहा कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते शासन स्तर से सिर्फ हर कार्ड धारक को तीन लीटर केरोसीन ही मिला है। राशन सामग्री का आज तक वितरण नहीं हो सका। तिरपाल का जो वितरण हुआ उसने भी भेदभाव किया गया। गुड्डू यादव ने कहा कि बाढ़ के कारण संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। गोपालपुर निवासी रमाकांत पांडेय ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद में जिन पीडि़तों का मकान गिर गया उनमें से कुछ को तो को आज तक मुआवजा नहीं मिला। पानी निकलने के बाद भी प्रशासनिक उदासीनता के चलते न तो गांव में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव हुआ नास्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। इस बाबत एसडीएम बैरिया अभय कुमार सिंह ने कहा कि शासन स्तर से जितनी मदद होगी की जाएगी। जल्द ही ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाएगा ।क्षेत्रीय लेखपाल को निर्देशित किया गया है। पीडि़तों की सूची बन चुकी है । बैरिया : बाढ़ पीडि़तों को निशुल्क खाद्यान्न पाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बाढ़ पीडि़त लेखपाल के माध्यम से या स्वयं आधारकार्ड व फोटो के साथ तहसील में आकर आनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। न कराने पर उन्हें खाद्यान्न से वंचित होना पड़ेगा। नायब तहसीलदार रजत कुमार सिंह ने बताया कि एक परिवार में पति-पत्नी व उनके अविवाहित बच्चे ही माने जाएंगे। नरहीं : बाढ़ प्रभावित गांवों के साथ भेदभाव करने का मामला प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन के निर्णय पर सवाल उठने लगे हैं। ताजा मामला केरोसिन वितरण का है। लक्ष्मणपुर गांव पूरी तरह से बाढ़ प्रभावित नहीं था और बिजली आपूर्ति भी बाधित नहीं हुई थी। लक्ष्मणपुर गांव को 750 लीटर केरोसीन तेल दिया गया। जो गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित थे उनमें गंगहरा, इच्छा चौबे का पूरा, शाहपुर बभनौली, बैरिया को 750 लीटर केरोसीन तेल दिया गया , जबकि यहां कि बिजली आपूर्ति भी ठप थी। आखिर किस मानक के तहत चार गांवों को 750 लीटर कोरोसिन दिया गया। इस पर सवाल उठ रहा है। बेल्थरारोड : सरयू नदी के जलस्तर में लगातार घटाव-बढ़ाव का सिलसिला जारी है। नदी का पानी खतरे के निशान से लगभग 39 सेमी ऊपर बह रहा है। पिछले कई दिनों से जलस्तर में वृद्धि हो रही थी। शनिवार को स्थित होने के बाद रविवार से पानी में घटाव दर्ज किया जाने लगा। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार की शाम चार बजे जलस्तर 64.390 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 64.01 मीटर है। खतरे के निशान से नदी 39 सेंटीमीटर अधिक है। आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में घटाव होने का पूर्वानुमान किया है। जलस्तर में वृद्धि से हाहानाला टगुनिया राजभर बस्ती से लगायत गुलौरा, टीएस बंधा खैरा, तुर्तीपार, मधुबनी, मुजौना, बेल्थरा बाजार, हल्दीरामपुर, शाहपुर आदि कई गांवों के भू-भाग में नदी का पानी फैल गया है। चैनपुर गुलौरा के पास टीएस बंधा तक पानी पहुंच गया है। हाहानाला, तुर्तीपार व हल्दीरामपुर रेगुलेटर पर पानी का दबाव बढ़ गया है। तुर्तीपार के अनुसूचित बस्ती व मल्लाह बस्ती में पथाव्नथी पहुंच गया है। उधर, कोईली मोहान ताल में उफान है। ताल का पानी आसपास के दर्जनों गांवों में फैल गया ाहै। ताल के पानी से तटवर्ती गांवों के धान, अरहर, सब्जी आदि फसल डूब कर बर्बादी के कगार पर है, लेकिन नदी के मिजाज में अप्रत्याशित परिवर्तन को लेकर तटवर्ती बाशिंदे सहम गए हैं।बाढ़ को लेकर प्रसाशन पूरी तरह सतर्क है।प्रसाशन तटवर्ती क्षेत्रो पर बाढ़ को लेकर नजर बनाए हुए हैं।
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