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आत्महत्या के लिए उकसाने में पति को सजा
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Sun, 05 Apr 2015 12:07 AM IST
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आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में दोष सिद्ध होने पर कोर्ट ने पति को चार साल के सश्रम कारावास और 10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीपीएन सिंह की अदालत में हुई।
अभियोजन के मुताबिक रसड़ा कोतवाली थाना क्षेत्र के सोनामती सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी की उसकी पुत्री बबिता की शादी पांच साल पहले रामजी सिंह की लड़के अनूप सिंह के साथ हुई थी।
शादी के समय से ही कार नहीं मिलने के कारण ससुराल के लोग उससे नाराज रहते थे। इससे सास, ससुर और देवर तथा ननद बेटी को प्रताड़ित करते थे। इसी बीच कार के लिए पैसा मांगने का दबाव उस पर बनाने लगे। चार मार्च 2010 को सूचना मिली की बेटी को जला कर मार डाला गया है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि विवाहिता ने आत्महत्या किया है।
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कोर्ट ने ससुर, सास और देवर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। पति को आत्महत्या के लिए उकसाने में दोष साबित पाकर उसे चार वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी विजय बहादुर यादव और बचाव पक्ष से रंगबलि सिंह ने पैरवी की।
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अभियोजन के मुताबिक रसड़ा कोतवाली थाना क्षेत्र के सोनामती सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी की उसकी पुत्री बबिता की शादी पांच साल पहले रामजी सिंह की लड़के अनूप सिंह के साथ हुई थी।
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शादी के समय से ही कार नहीं मिलने के कारण ससुराल के लोग उससे नाराज रहते थे। इससे सास, ससुर और देवर तथा ननद बेटी को प्रताड़ित करते थे। इसी बीच कार के लिए पैसा मांगने का दबाव उस पर बनाने लगे। चार मार्च 2010 को सूचना मिली की बेटी को जला कर मार डाला गया है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि विवाहिता ने आत्महत्या किया है।
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कोर्ट ने ससुर, सास और देवर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। पति को आत्महत्या के लिए उकसाने में दोष साबित पाकर उसे चार वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी विजय बहादुर यादव और बचाव पक्ष से रंगबलि सिंह ने पैरवी की।