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कैसे होगी बच्चों की पढ़ाई, बिना भवन संचालित हो रहें 2671 आंगनबाड़ी केंद्र

Wed, 06 Oct 2021 10:48 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 06 Oct 2021 10:48 PM IST
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How will the education of children be done without building 2671 Anganwadi centers
बलिया। प्राथमिक शिक्षा की सरकारी व्यवस्था को कांवेंट के टक्कर में लाने के लिए सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों में सुधार पर जोर दे रही है। इन्हें प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है, लेकिन जिले में सरकार की यह मंशा दम तोड़ रही है। देश के सर्वाधिक पिछड़े जिलों में शुमार जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल खराब है। इतना ही नहीं जिले के 3471 आंगनबाडी केंद्रों में से महज 800 केंद्रों के पास ही अपना भवन है। जबकि शेष अधार के भवन में और जैसे-जैसे तैसे संचालित हो रहे है। कहीं छत टपक रही है तो कहीं फर्श उखड़ चुकी है। कई गांवों में ताला भी नहीं खुल पा रहा। जिले के कई गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र उधार के भरोसे परिषदीय स्कूलों के भवन में चल रहे हैं तो कई ऐसे भी गांव हैं, जहां पेड़ के नीचे नौनिहालों को ककहरा सिखाया जा रहा है।
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नीति आयोग ने जिन मापदंडों पर देश में अति पिछड़े जिलों का चयन किया है, उसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण मुख्य है। आंगनबाड़ी केंद्रों की तीनों में अहम भूमिका है। केंद्रों के माध्यम से गर्भवती और धात्री महिलाओं में पोषण की निगरानी की जाती है तो छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को पोषण के साथ स्कूल पूर्व की शिक्षा भी यहां देने की व्यवस्था है। इसके लिए जिले के 429 ग्राम पंचायतों में केंद्र का निर्माण कराया गया है। कई गांवों में दो से तीन मिनी केंद्र भी संचालित हैं।
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कहीं भवन तो कहीं कार्यकत्रियों का नहीं है पता
बासडीह। बासंडीह ब्लॉक के पिडहरा गांव में करीब दो वर्ष पूर्व बना आंगनबाड़ी केंन्द्र जर्जर है। आलम यह है कि यहां ना तो कार्यकत्रियां आती हैं और ना ही पंजीकृत बच्चे। केंद्र को कागजों पर संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा देवरार में बनें आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति तो और नाजुक है। यहां केंद्र के संचालन के लिए भवन तो है, लेकिन ना कार्यकत्रियां केंद्र पर आती है और ना ही बच्चों का कोई अता पता रहता है। बता दे कि ब्लॉक अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ती,सहायिका, व मिनी आगनबाड़ी कार्यकर्ती की कुल संख्या 171 है। जिनकी जिम्मेदारी सात माह से तीन वर्ष तक के बच्चे व गर्भवतीधात्री के पोषण के साथ ही तीन से छ: वर्ष के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा की जिमेदारी व पोषण की है। जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की संख्या छ: माह से तीन वर्ष के बच्चे 6881, व तीन वर्ष से छ: वर्ष के बच्चों की संख्या 4837, गर्भवती धात्री की संख्या 2834, है।
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136 केंद्रों के पास नहीं है अपना भवन
हल्दी। विकास खंड बेलहरी में कुल 154 आंगनबाड़ी केंद्र है, जिसमें 35 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र है। 154 में 18 केन्द्र ही ऐसे है जिसके पास अपना भवन है। शेष 136 केंद्र प्राथमिक विद्यालयों में स्थापित है। ब्लाक में 0 से तीन वर्ष बच्चे 11015,तीन से छह वर्ष के बच्चे 8831,धात्री व गर्भवती महिलाएं 3272, 11 से 14 वर्ष की अनपढ़ किशोरी 462, कुपोषित बच्चे 1474, व अति कुपोषित बच्चे 401 है।

एक नजर आंगनबाडी केंद्रों पर
कुल आंगनबाड़ी केंद्रों - 3471
कुल आंगनबाड़ी कार्यकत्रिय ां- 3060
बिना भवन वाले केंद्र - 2671
भवन वाले केंद्र - 800
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का रिक्त पद - 411
आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूल की तर्ज पर विकसित करने का शासनादेश प्राप्त हुआ है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग से समन्वय बना कर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। ताकि इसके लिए आवश्यक स्ट्रक्चर डेवलप किया जा सकें।
कुष्ण मुरारी पांडेय, डीपीओ, बलिया।
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