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बेखौफ घूम रहे गांवों में होम क्वारंटीन मजदूर
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बैरिया। तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में दूसरे प्रान्त से घर लौटे सैकड़ों प्रवासी होम क्वारन्टीन के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बेखौफ गांव में घूम रहे हैं। इसको लेकर आए दिन गांव में तू-तू मैं-मैं हो रही है। प्रशासन भी मामले में लापरवाह बना हुआ है।
बता दें कि क्षेत्र के दुर्जनपुर, श्रीनगर, बलिहार, चकिया, श्रीकांतपुर सहित कई ग्राम पंचायतों में ग्राम क्वारन्टीन सेंटर बना है। बलिहार ग्राम पंचायत में गैर प्रान्तों से आए 38 प्रवासी मजदूरों को स्वास्थ्य विभाग ने होम क्वारन्टीन की सलाह दी। लेकिन गांव आते ही गांव के लोगों ने तरह-तरह की चर्चाएं शुरू कर दी जिससे यह प्रवासी मजदूर गांव में स्थित धुपाराम प्यारी बालिका विद्यालय क्वारन्टीन सेन्टर पर रहना मुनासिब समझा। सूरत से आए युवक ने बताया कि कोटवां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण कर होम क्वारन्टीन का सुझाव दिया है। लेकिन मैं होम क्वारन्टीन के लिए घर नहीं जाना चाहता हूं, क्योंकि घर जाने के बाद मेरे अलावा मेरे घर के लोगों को भी एक अलग निगाह से देखा जाएगा। इसलिए क्वारन्टीन की अवधि पूरा करने के बाद ही घर जाएंगे। यही बात अन्य क्वारंटीन लोगों ने भी कही। कहा कि होम क्वारन्टीन के लिए स्वास्थ्य विभाग के लोग सुझाव तो देते हैं, लेकिन समाज के लोग इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जो लोग होम क्वारन्टीन के लिए घर गए तो उस परिवार को ही समाज के लोग बहिष्कार कर दे रहे हैं और डर के मारे ऐसे लोगों के घरों से दूरी बना लेते हैं।
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बता दें कि क्षेत्र के दुर्जनपुर, श्रीनगर, बलिहार, चकिया, श्रीकांतपुर सहित कई ग्राम पंचायतों में ग्राम क्वारन्टीन सेंटर बना है। बलिहार ग्राम पंचायत में गैर प्रान्तों से आए 38 प्रवासी मजदूरों को स्वास्थ्य विभाग ने होम क्वारन्टीन की सलाह दी। लेकिन गांव आते ही गांव के लोगों ने तरह-तरह की चर्चाएं शुरू कर दी जिससे यह प्रवासी मजदूर गांव में स्थित धुपाराम प्यारी बालिका विद्यालय क्वारन्टीन सेन्टर पर रहना मुनासिब समझा। सूरत से आए युवक ने बताया कि कोटवां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण कर होम क्वारन्टीन का सुझाव दिया है। लेकिन मैं होम क्वारन्टीन के लिए घर नहीं जाना चाहता हूं, क्योंकि घर जाने के बाद मेरे अलावा मेरे घर के लोगों को भी एक अलग निगाह से देखा जाएगा। इसलिए क्वारन्टीन की अवधि पूरा करने के बाद ही घर जाएंगे। यही बात अन्य क्वारंटीन लोगों ने भी कही। कहा कि होम क्वारन्टीन के लिए स्वास्थ्य विभाग के लोग सुझाव तो देते हैं, लेकिन समाज के लोग इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जो लोग होम क्वारन्टीन के लिए घर गए तो उस परिवार को ही समाज के लोग बहिष्कार कर दे रहे हैं और डर के मारे ऐसे लोगों के घरों से दूरी बना लेते हैं।
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