{"_id":"60be3fe38ebc3ea6dd2e9304","slug":"gyanu-selected-in-pcs-ballia-news-vns593549257","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीसीएस में चयनित हुए ज्ञानू प्रताप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीसीएस में चयनित हुए ज्ञानू प्रताप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो सहित..
पीसीएस में चयनित हुए ज्ञानू प्रताप
रसड़ा। क्षेत्र के नागपुर गांव में एक युवक के दूसरे प्रयास में बिहार पीसीएस में चयन होने से गांव ही नहीं पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। एक दूसरे को मिष्ठान खिलाकर ग्रामीणों ने खुशी का इजहार किया। नागपुर निवासी बिहार में प्रोफेसर पद पर कार्यरत परमात्मा सिंह का सबसे बड़े पुत्र ज्ञानू प्रताप सिंह ने अपने दूसरे प्रयास में बिहार पीसीएस में सफलता पाप्त किया।
राय बरेली से 2005 में हाई स्कूल एवं 2007 में इंटरमीडिएट, बीएचयू से स्नातक की परीक्षा 2012 में भूगोल से पास किया। 2014 में बीएड सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ एवं 2016 परास्नातक भूगोल से काशी विद्यापीठ वाराणसी से पास करने के बाद जालंधर सेंट्रल स्कूल में भूगोल विषय के प्रवक्ता पद पर कार्य करते थे। कोरोना काल में अपने पिता को खोने के बाद भी ज्ञानू प्रताप सिंह ने अपने हौसले एवं जज्बे को कम नहीं होने दिया। ज्ञानू प्रताप सिंह अपनी सफलता का श्रेय पिता के साथ माता गीता सिंह एवं गुरुजनों को दिया।
विज्ञापन
पीसीएस में चयनित हुए ज्ञानू प्रताप
रसड़ा। क्षेत्र के नागपुर गांव में एक युवक के दूसरे प्रयास में बिहार पीसीएस में चयन होने से गांव ही नहीं पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। एक दूसरे को मिष्ठान खिलाकर ग्रामीणों ने खुशी का इजहार किया। नागपुर निवासी बिहार में प्रोफेसर पद पर कार्यरत परमात्मा सिंह का सबसे बड़े पुत्र ज्ञानू प्रताप सिंह ने अपने दूसरे प्रयास में बिहार पीसीएस में सफलता पाप्त किया।
राय बरेली से 2005 में हाई स्कूल एवं 2007 में इंटरमीडिएट, बीएचयू से स्नातक की परीक्षा 2012 में भूगोल से पास किया। 2014 में बीएड सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ एवं 2016 परास्नातक भूगोल से काशी विद्यापीठ वाराणसी से पास करने के बाद जालंधर सेंट्रल स्कूल में भूगोल विषय के प्रवक्ता पद पर कार्य करते थे। कोरोना काल में अपने पिता को खोने के बाद भी ज्ञानू प्रताप सिंह ने अपने हौसले एवं जज्बे को कम नहीं होने दिया। ज्ञानू प्रताप सिंह अपनी सफलता का श्रेय पिता के साथ माता गीता सिंह एवं गुरुजनों को दिया।
विज्ञापन