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जगमगा उठे दीये-झालर, खूब फूटे पटाखे
ballia
Updated Thu, 19 Oct 2017 06:50 PM IST
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नगर में दीपावली पर घर में आितशबाजी करते े बच्चे।
- फोटो : ballia
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दीपावली गुरुवार को जनपद दीयो और विद्युत झालरों जगमगा उठा। उत्साह और उल्लास के साथ दीपावली का पर्व पटाखों के बीच मना। लोगों ने विधि विधान से गणेश और लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। हालांकि पटाखे बजाने के दौरान बड़ों ने बच्चों की सुरक्षा का ख्याल रखा। गुरुवार को सुबह मिठाई, कुटकी, बताशा, पटउरा, चियरा व लाई के दूकानों पर ग्राहकों की भीड़ लग गई। इस दौरान लोग सूखी और पैकेट वाली मिठाइयों को ज्यादे डिमांड कर रहे थे। इसके अलावा मगदर, गोंद, मोतीचूर व सोमपापड़ी मिठाइयों की डिमांड भी अधिक रही।
मिठाई विक्रेमा उदय ने बताया कि लोगों को शुद्धता की गारंटी वाली मिठाई अधिक पसंद रहे। इसके अलावा फूल-मालाआें की दूकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ उमड़ी रही।
शाम होते ही नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घरों पर मिट्टी के दिये तथा मोमबत्ती की रोशनी अपनी छठा बिखेर रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो आसमान से तारे जमीन पर उतर आए हो। तत्पश्चात व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों तथा आमजन ने अपने-अपने घरों में गणेश-लक्ष्मी की पूजन-अर्चन कर परिवार के मंगलमय की कामना की। शाम से ही आतिशबाजी का जो दौर चला तो वह देररात तक जारी रहा।
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इस दौरान बड़े बच्चों ने एटम बम, लाइटर बम, राकेट, बड़ा बम आदि बजाया। वहीं छोटे बच्चों ने फुलझड़ी, महुआ, चिटपुटिया बजाते रहे। पटाखा बजाने वाले स्थान पर अभिभावक बाल्टी में पानी भरकर रखा हुआ था। इस वर्ष आमजन द्वारा सामूहिक रूप से चायनीज पटाखे का बहिष्कार देखने को मिला। प्रत्येक घरों में भारत निर्मित पटाखे ही बजाए गए। लेकिन पटाखों पर जीएसटी का असर साफ दिखा।
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मिठाई विक्रेमा उदय ने बताया कि लोगों को शुद्धता की गारंटी वाली मिठाई अधिक पसंद रहे। इसके अलावा फूल-मालाआें की दूकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ उमड़ी रही।
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शाम होते ही नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घरों पर मिट्टी के दिये तथा मोमबत्ती की रोशनी अपनी छठा बिखेर रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो आसमान से तारे जमीन पर उतर आए हो। तत्पश्चात व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों तथा आमजन ने अपने-अपने घरों में गणेश-लक्ष्मी की पूजन-अर्चन कर परिवार के मंगलमय की कामना की। शाम से ही आतिशबाजी का जो दौर चला तो वह देररात तक जारी रहा।
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इस दौरान बड़े बच्चों ने एटम बम, लाइटर बम, राकेट, बड़ा बम आदि बजाया। वहीं छोटे बच्चों ने फुलझड़ी, महुआ, चिटपुटिया बजाते रहे। पटाखा बजाने वाले स्थान पर अभिभावक बाल्टी में पानी भरकर रखा हुआ था। इस वर्ष आमजन द्वारा सामूहिक रूप से चायनीज पटाखे का बहिष्कार देखने को मिला। प्रत्येक घरों में भारत निर्मित पटाखे ही बजाए गए। लेकिन पटाखों पर जीएसटी का असर साफ दिखा।