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पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होंगे गंगा के घाट

Thu, 29 Sep 2022 10:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2022 10:27 PM IST
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Ghats of Ganga will be developed as tourist destination
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक को संबोधित करतीं जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल। - फोटो : BALLIA
जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के अंतर्गत ग्राम प्रधानों, सचिवों और संबंधित अधिकारियों की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में ली। बैठक का उद्देश्य गंगा के किनारे बसे ग्राम पंचायतों की जानकारी हासिल करना और ग्राम पंचायतों के माध्यम से गंगा को स्वच्छ करने पर चर्चा की गई।
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मुख्य विकास अधिकारी प्रवीण वर्मा ने बताया कि इस तरह की 64 ग्राम पंचायतें हैं जो गंगा नदी के किनारे हैं। नमामि गंगा की टीम जल्द ही इन क्षेत्रों का भ्रमण करेगी और इस बात की जानकारी हासिल करेगी कि किस प्रकार इन क्षेत्रों को रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाए। ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके यहां गंगा के किनारे वाले स्थलों पर घाट निर्माण, शवदाह गृह का निर्माण और मछुआरों के जीवन यापन के लिए रोजगार के नए अवसर तलाशने की आवश्यकता है। मछुआरे वाले क्षेत्रों में शिक्षा का अभाव है। साथ ही वे सिर्फ मछली पकड़ने में ही लगे रहते हैं। जिससे उनकी आय कम है।
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जिलाधिकारी ने सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों से अपने-अपने क्षेत्रों में गंगा के किनारे घाटों का निर्माण कराने, मंदिरों का सुंदरीकरण करने और मछुआरों के जीवन यापन के लिए रोजगार के नए अवसर तलाशने के निर्देश दिए। क्योंकि घाटों का निर्माण होने से यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। इससे मछुआरों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
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एक्सईएन जल निगम ने बताया कि जनपद में गंगा की सहायक नदियां भी गंगा में प्रदूषण लाती हैं। अत: इन नदियों में मिलने वाले नालों के पानी को भी स्वच्छ करना आवश्यक है। जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधानों और सचिवों से कहा कि इस बात की जानकारी प्रशासन को दें कि उनके गांव से कितने नाले गंगा नदी में मिलते हैं। गंगा नदी के जलस्तर से पौधरोपण करने में दिक्कत आती है। फॉरेस्टेशन का कार्य तभी अच्छा हो पाएगा जब वन विभाग को गंगा के किनारे ऊंचा और उचित स्थान मिलेगा।

तहसीलदार सदर ने बताया कि यदि उजियार घाट का निर्माण कर दिया जाए तो अच्छा पर्यटन स्थल बन सकता है। तहसीलदार बैरिया ने बताया कि हल्दी से रामगढ़ के बीच शवदाह गृह का निर्माण किया जा। ईओ नगरपालिका ने बताया कि कटहल नाले का पानी गंगा में जाता है। इसके लिए एसटीपी बनाना आवश्यक है। डीएम ने कहा कि गंगा में डॉल्फिन भी पाई जाती है जिसे स्थानीय भाषा में सॉस कहा जाता है जो पर्यटन का एक प्रमुख साधन बन सकती है। अत: सभी ग्राम प्रधान अपने-अपने क्षेत्रों में घाटों का निर्माण जल्द से जल्द करवाएं जिसके लिए सरकार की तरफ से धन आवंटित किया जाएगा।
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