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गंगा फिर उफान पर, बढ़ी धुकधुकी
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Thu, 08 Sep 2016 08:23 PM IST
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नरही क्षेत्र के शाहपुर बभनौली में गंगा के बाढ़ का पानी कम होने के बाद कटान की तबाही का मंजर।
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गंगा के जलस्तर में गुरुवार को एक बार फिर बढ़ने से तटवर्ती गांव के लोगों की धुकधुकी बढ़ गई। सोहरा में भी कटान में तेजी आ गई है। बाढ़ विभाग द्वारा कोई भी कटानरोधी कार्य नहीं कराए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश है। गुरुवार को गंगापुर से उदयीछपरा तक कटान जारी है। कटान से करीब चार बीघा खेत नदी में विलीन हो गया। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर गुरुवार की शाम चार बजे 56.37 मीटर दर्ज किया गया। साथ ही प्रति घंटा एक सेमी का बढ़ाव बना हुआ है।
गंगा के जलस्तर में एक बार फिर वृद्घि का क्रम जारी है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर जाय तो कहां जाय। अभी बाढ़ के कहर से लोग एनएच पर शरण लिए हुए थे। धीरे-धीरे अपने सामानों को अपने घरों में लौट रहे थे कि गंगा की वृद्घि ने एक बार फिर दहशतजदा होने पर मजबूर कर दिया है। ऊपर से बारिश ने उनकी मुसीबतें और बढ़ा दी है।
मासूमों के भोजन के लिए इकट्ठा किए लावन व लकड़ी भी भीग गई। जिससे उनके मासूमों के भोजन पर भी लाले पड़ते नजर आ रहे हैं। लाला बगीचे में सोहरा कटान के चलते छट्ठू पासवान, शंभू शर्मा, उमाशंकर लाल के घर जल समाधि हो गई। इसके साथ ही बहादुर बाबा के मंदिर के समीप हनुमान जी का मंदिर भी लहरों की भेंट चढ़ गया। अभी भी गंगा की उफनाती लहरें बहादुर बाबा के स्थान को भी अपने पेटे में समाहित कर सकता है।
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उधर उदय छपरा में भी किसानों की जमीनों को निगलती हुई गंगा अब एकदम बस्ती के करीब पहुंच गई है, जहां भरत उपाध्याय, मोती उपाध्याय, रामशरण सिंह, दिनेश सिंह, बैजनाथ अपने घरों को उजाड़ना शुरू कर दिया है।
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गंगा के जलस्तर में एक बार फिर वृद्घि का क्रम जारी है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर जाय तो कहां जाय। अभी बाढ़ के कहर से लोग एनएच पर शरण लिए हुए थे। धीरे-धीरे अपने सामानों को अपने घरों में लौट रहे थे कि गंगा की वृद्घि ने एक बार फिर दहशतजदा होने पर मजबूर कर दिया है। ऊपर से बारिश ने उनकी मुसीबतें और बढ़ा दी है।
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मासूमों के भोजन के लिए इकट्ठा किए लावन व लकड़ी भी भीग गई। जिससे उनके मासूमों के भोजन पर भी लाले पड़ते नजर आ रहे हैं। लाला बगीचे में सोहरा कटान के चलते छट्ठू पासवान, शंभू शर्मा, उमाशंकर लाल के घर जल समाधि हो गई। इसके साथ ही बहादुर बाबा के मंदिर के समीप हनुमान जी का मंदिर भी लहरों की भेंट चढ़ गया। अभी भी गंगा की उफनाती लहरें बहादुर बाबा के स्थान को भी अपने पेटे में समाहित कर सकता है।
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उधर उदय छपरा में भी किसानों की जमीनों को निगलती हुई गंगा अब एकदम बस्ती के करीब पहुंच गई है, जहां भरत उपाध्याय, मोती उपाध्याय, रामशरण सिंह, दिनेश सिंह, बैजनाथ अपने घरों को उजाड़ना शुरू कर दिया है।