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कोहरे और ठंड से जनजीवन बेहाल
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Tue, 09 Dec 2014 10:47 PM IST
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कोहरे और गलन से जनजीवन बेहाल है। तड़के नींद खुलने के बाद भी शीत लहर के
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चलते लोग मंगलवार को घर से बाहर नहीं निकले। दोपहर तक धुंध छाई रही।
इससे राहगीरों को काफी परेशानी हुई। सुबह घने कोहरे के चलते दृश्यता करीब दस मीटर रही। इसके चलते वाहन दस से पंद्रह की स्पीड में आते-जाते रहे। स्कूल जाने के लिए बच्चे सिर से पांव तक गरम कपड़ों में निकले।
मंगलवार को गलन पूर्व की अपेक्षा कुछ अधिक रही। कुहासा के चलते थोड़ी दूरी तक भी दिखाई नहीं दे रहा था। वाहन शाम के बाद रेंगते नजर आए। लोग इस ठंड से बचने के दृष्टिगत नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करने लगे हैं।
चाय की दूकानों पर लोगों की अधिक भीड़ होने लगी है तो गांवों में अलाव जलाकर बैठकी होने लगी है। ठंड से सबसे ज्यादा दिक्कत उन परिवारों में हो रही है, जहां किसी की शादी है।
ठंड के चलते इन परिवाराें के लिए मेहमाननवाजी चुनौती बन गई है। उधर जिला प्रशासन की उदासीनता भी चरम पर है। अभी तक कहीं भी अलाव नहीं जलवाया गया है। कुल मिलाकर ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
इससे राहगीरों को काफी परेशानी हुई। सुबह घने कोहरे के चलते दृश्यता करीब दस मीटर रही। इसके चलते वाहन दस से पंद्रह की स्पीड में आते-जाते रहे। स्कूल जाने के लिए बच्चे सिर से पांव तक गरम कपड़ों में निकले।
मंगलवार को गलन पूर्व की अपेक्षा कुछ अधिक रही। कुहासा के चलते थोड़ी दूरी तक भी दिखाई नहीं दे रहा था। वाहन शाम के बाद रेंगते नजर आए। लोग इस ठंड से बचने के दृष्टिगत नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करने लगे हैं।
चाय की दूकानों पर लोगों की अधिक भीड़ होने लगी है तो गांवों में अलाव जलाकर बैठकी होने लगी है। ठंड से सबसे ज्यादा दिक्कत उन परिवारों में हो रही है, जहां किसी की शादी है।
ठंड के चलते इन परिवाराें के लिए मेहमाननवाजी चुनौती बन गई है। उधर जिला प्रशासन की उदासीनता भी चरम पर है। अभी तक कहीं भी अलाव नहीं जलवाया गया है। कुल मिलाकर ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।