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नहीं घट रहा सरयू का जलस्तर, सहमे किसान
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बेल्थरारोड/सिकंदरपुर/नवानगर। खतरा बिंदु से 56 सेमी. ऊपर बह रही सरयू का जलस्तर घटने का नाम नहीं ले रहा है। जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी है। इसके साथ ही सैकड़ों एकड़ जलमग्न फसल को बचाने की संभावनाओं पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है। इससे किसान सहम गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के गेज पर बुधवार की शाम जलस्तर 64.57 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो लाल निशान से 56 सेंटीमीटर अधिक है।
कोइली मोहान ताल और गौरी ताल घोसा के उफान से दर्जनों तटवर्ती गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। हाहानाला से टगुनिया तक कई किलोमीटर के दायरे में सरयू नदी का पानी फैल गया है। पानी तुर्तीपार की माली और मल्लाह बस्ती में भी पहुंच गया है। टगुनिया की राजभर बस्ती के निकट से होकर नदी बह रही है। जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहने से तटवर्ती गांवों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहमे हैं। सरयू के बढ़ते जलस्तर को देख नदी के किनारे खेती करने वाले किसान बेचैन हैं। चारे की फसल में पानी लग गया है। रिंग बंधे पर दबाव बढ़ने लगा है। डूहा से कठौड़ा तक बने करीब पांच किमी लंबे रिंग बंधे से सटकर नदी बह रही है। लिलकर से लेकर सिसोटार तक बने रिंग बंधे को बाढ़ का पानी छूने को बेताब है। 200 बीघा फसल जलमग्न है। धान, मक्का, गन्ना और बाजरा आदि फसलें डूब गई हैं। तहसील प्रशासन से जूनियर हाईस्कूल डूहा विहरा, बहदुरा, काजीपुर समेत प्राथमिक विद्यालय माल्दह, लिलकर और डाक बंगला कठौड़ा एवं पंचायत भवन सिसोटार में बाढ़ पीड़ितों के लिए सात चौकियां स्थापित की गईं हैं। खरीद, पुरुषोत्तमपट्टी, निपनिया आदि में गांवों के पास तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। करीब 300 बीघा खेत डूब चुका है। गन्ने और धान की फसल का काफी नुकसान हुआ है।
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कोइली मोहान ताल और गौरी ताल घोसा के उफान से दर्जनों तटवर्ती गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। हाहानाला से टगुनिया तक कई किलोमीटर के दायरे में सरयू नदी का पानी फैल गया है। पानी तुर्तीपार की माली और मल्लाह बस्ती में भी पहुंच गया है। टगुनिया की राजभर बस्ती के निकट से होकर नदी बह रही है। जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहने से तटवर्ती गांवों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहमे हैं। सरयू के बढ़ते जलस्तर को देख नदी के किनारे खेती करने वाले किसान बेचैन हैं। चारे की फसल में पानी लग गया है। रिंग बंधे पर दबाव बढ़ने लगा है। डूहा से कठौड़ा तक बने करीब पांच किमी लंबे रिंग बंधे से सटकर नदी बह रही है। लिलकर से लेकर सिसोटार तक बने रिंग बंधे को बाढ़ का पानी छूने को बेताब है। 200 बीघा फसल जलमग्न है। धान, मक्का, गन्ना और बाजरा आदि फसलें डूब गई हैं। तहसील प्रशासन से जूनियर हाईस्कूल डूहा विहरा, बहदुरा, काजीपुर समेत प्राथमिक विद्यालय माल्दह, लिलकर और डाक बंगला कठौड़ा एवं पंचायत भवन सिसोटार में बाढ़ पीड़ितों के लिए सात चौकियां स्थापित की गईं हैं। खरीद, पुरुषोत्तमपट्टी, निपनिया आदि में गांवों के पास तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। करीब 300 बीघा खेत डूब चुका है। गन्ने और धान की फसल का काफी नुकसान हुआ है।
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